एक सपना टूटा तो दूसरे ने बदली किस्मत: MMA फाइटर ने दर्द को सफलता में बदलकर कामयाबी की नई कहानी गढ़ी
जब भाग्य का एक दरवाजा बंद होता है तो परमात्मा आगे बढ़ने का दूसरा दरवाजा खोल देते हैं। ऐसा ही कुछ ऑस्ट्रेलिया और टोंगा मूल के मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर इसी फिटिकेफु के साथ हुआ। उन्होंने जब से होश संभाला तब से रग्बी खिलाड़ी बनने का सपना देखा था, लेकिन किस्मत ने ऐसी करवट ली कि सारे सपने धराशाई हो गए।
जब 33 वर्षीय फाइटर को लगा कि अब सब कुछ खत्म हो गया तो उनके लिए MMA नया जोश और नया करियर बनकर सामने आया। अब उनका सामना 24 जनवरी को होने वाले ONE Fight Night 39 इवेंट में अमेरिकी फाइटर चेज़ मैन से वेल्टरवेट MMA मुकाबले में होगा। इस मुकाबले को जीतकर वो खिताबी मैच के करीब पहुंचना चाहेंगे।

टीम में जगह न मिलने ने सपने को चकनाचूर कर दिया
फिटिकेफु ऑस्ट्रेलिया की नेशनल रग्बी लीग के फर्स्ट ग्रेड में खेलने के बेहद करीब थे। जब उनका सेलेक्शन टोयोटा कप में नहीं हुआ तो मानो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और आगे की राह धुंधली नजर आने लगी।
उन्होंने जीवन बदल देने वाले पल को याद करते हुए बताया, "सेलेक्शन नहीं होने पर मुझे समझ नहीं आया कि क्या करना है। तब मुझे लगा कि मेरा करियर खत्म है। बचपन से आपने रग्बी खिलाड़ी बनने का सपना देखा हो और ये पूरा न हो तो मुंह पर मुक्का लगने जैसा महसूस होता है।"
MMA के खेल में किस्मत आजमाकर करियर का दूसरा अध्याय शुरु किया
एक पुरानी हिंदी फिल्म का गाना कुछ इस प्रकार है 'जीवन चलने का नाम, चलते रहो सुबह-शाम!' फिटिकेफु का करियर भले ही रुक गया हो, लेकिन उन्होंने आगे बढ़ना जारी रखा और मार्शल आर्ट्स में भाग्य आजमाने का फैसला लिया और इसने उनके जीवन की दशा और दिशा को बदलकर दिया।
रग्बी जैसे खेल में मजबूत कद-काठी की जरूरत होती है और यही शारीरिक बनावट उनके लिए MMA में सफलता की कुंजी बनी। उन्होंने विस्तार से बताया, "मुझे इस राह पर चलने की जरूरत थी। मैं अब जहां हूं, वहां खुद को पाकर खुश हूं। मैं मानता हूं कि मार्शल आर्ट्स ने मेरे मन, मानसिकता और जीवन को देखने के रवैये को बदला है। इससे मैंने खुद का साथ देने और कभी हार न मानने के बारे में सीखा।"












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