टेस्ट क्रिकेट हुआ रोमांचक: अंतिम विकेट के लिए 20 साल में 11 बार सेंचुरी पार्टनरशिप

टेस्ट क्रिकेट में पहले अंतिम विकेट से ज्यादा रन बनते कम ही देखे जाते थे लेकिन अब यह ट्रेंड बदल गया है। आजकल अंतिम विकेट के खिलाड़ी गेंदबाजों के नाक में दम कर देते हैं।

Matt Henry

Test Cricket: पाकिस्तान के खिलाफ कराची टेस्ट में मैट हेनरी और एजाज पटेल ने अंतिम विकेट के लिए 100 से अधिक रन जोड़ कर न्यूजीलैंड को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। इसके पहले 1973 में ब्रायन हेस्टिंग्स और रिचर्ड हेनरी ने पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम विकेट के लिए 151 रन बनाये थे। पिछले दो दशक में टेस्ट क्रिकेट का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले कभी कभार आखिरी विकेट के लिए सेंचुरी पार्टनरशिप होती थी। लेकिन अब अक्सर ऐसा हो रहा है। 2001 के बाद अभी तक ग्यारह बार टेस्ट मैचों में अखिरी विकेट के लिए सौ या इससे अधिक रनों की साझेदारी हो चुकी है। सबसे अधिक तीन बार भारत ने, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने दो-दो बार, न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका ने एक- एक बार ये कारनामा किया है। आखिर इसकी वजह क्या है ?

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टी-20 और वनडे ने टेस्ट क्रिकेट को रोमांचक बनाया

अक्सर कहा जाता है कि वनडे और टी-20 के कारण क्रिकेट का शास्त्रीय स्वरूप नष्ट हो गया है। लेकिन यह भी सच है कि सीमित ओवरों के प्ररूप के कारण आज टेस्ट क्रिकेट रोमांचक और दर्शनीय हो गया है। टेस्ट क्रिकेट में पहले टेलैंडर्स की अवधारणा थी। गेंदबाज से रन बनाने की आशा नहीं की जाती थी। अगर बना दिया तो बोनस। सात-आठ विकेट गिरने के बाद पारी का खात्मा नजदीक माना जाता था। लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट ने इस सोच को बदल दिया है। अब नम्बर 11 के बल्लेबाज से भी रन बनाने की आशा की जाती है। इसकी वजह से टेस्ट क्रिकेट में बॉलिंग ऑलराउंडर्स की संख्या बढ़ी है। टीम बने रहने के लिए अब गेंदबाज भी अपनी बैटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए मेहनत करते हैं। इसकी वजह से ही अब टेस्ट क्रिकेट में अक्सर अंतिम विकेट की साझेदारी में 100 से अधिक रन बन रहे हैं।

नौटिंघम टेस्ट – अंतिम विकेट साझेदारी का अनोखा डबल

पिछले 20 साल में भारत ने ही टेस्ट क्रिकेट में अंतिम विकेट के लिए तीन बार सेंचुरी पार्टनरशिप की है। नम्बर 11 के बल्लेबाज की क्षमता इतनी बढ़ चुकी है अब एक ही टेस्ट में दोनों टीमों की तरफ ये कारनामा किया जा चुका है। मिसाल के तौर पर 2014 के नौटिंघम टेस्ट की ही बात ले लीजिए। इस मैच में की पहली पारी में भारत की तरफ से भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी ने अंतिम विकेट के लिए 111 रनों की साझेदारी की थी। मोहम्मद शमी आखिरी बल्लेबाज के रूप में नम्बर 11 पर उतरे थे। उन्होंने धमाकेदार पारी खेली और 81 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाये जिसमें 6 चौके और एक छक्का शामिल था। भुवनेश्वर ने संयम के साथ संभल कर बल्लेबाजी की। 149 गेंदें पर 58 रन बनाये। इंग्लैंड का कोई नियमित गेंदबाज भुवनेश्वर को परेशान नहीं कर पाया। तब पार्ट टाइम स्पिनर जो रूट को बुलाया गया। आखिरकार रूट ने ही भुवनेश्वर को आउट किया था। भारत ने बोर्ड पर 457 रनों का स्कोर टांगा। क्या कमाल का टेस्ट मैच था ये ? इंग्लैंड ने इसका करारा जवाब दिया। उसने टेस्ट क्रिकेट में अंतिम विकेट की साझेदारी का वर्ल्ड रिकॉर्ड ही बना दिया।

इंग्लैंड का करारा जवाब

2014 का नौटिंघम टेस्ट इतिहास के पन्नों में दर्ज है। इंग्लैंड की पहली पारी भी शानदार तरीके से शुरू हुई। रॉब्सन ने 59 और गैरी बैलेंस ने 71 रन बनाये। जो रूट क्रीज पर जमें हुए थे। 298 के स्कोर पर इंग्लैंड का 9वां विकेट गिरा। तब तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन रूट का साथ देने के लिए मैदान पर उतरे। एंडरसन कुछ अलग सोच कर बैटिंग के लिए आये थे। उन्हें मोहम्मद शमी की आतिशी पारी चुभ गयी थी। शुरू में रूट ने एंडरसन को स्ट्राइक से बचा कर बैटिंग की। लेकिन एंडरसन ने उन्हें जल्द ही बता दिया कि वे आज खुल कर बल्लेबाजी करने आये हैं। इसलिए उन पर भरोसा रखें।

रूट और एंडरसन ने इतिहास रचा

फिर तो रूट और एंडरसन ने इतिहास रच दिया। रूट का तो बल्लेबाजी में नाम था लेकिन एंडरसन ने सबको आश्चर्यचकित कर दिया। नम्बर 11 के बल्लेबाज एंडरसन ने 130 गेंदें खेल कर 81 रन बनाये जिसमें 17 चौके थे। यानी 81 में से उन्होंने 68 रन सिर्फ बाउंड्री से बनाये थे। रूट 154 रनों पर नाबाद रहे। दोनों ने अंतिम विकेट के लिए 198 रनों की साझेदारी कर एक नया विश्व कीर्तिमान बनाया। एक ही टेस्ट में भारत और इंग्लैंड ने अंतिम विकेट के लिए सेंचुरी पार्टनरशिप की।

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    भारत के लिए अंतिम विकेट का कमाल

    इसके अलावा भारत ने 2010 और 2004 में यह उपलब्धि प्राप्त की थी। 2010 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हैदराबाद में श्रृंखला का दूसरा टेस्ट मैच खेला गया था। न्यूजीलैंड ने पहले खेलते हुए 350 रन बनाये। जवाब में भारत ने भी ठोस बल्लेबाजी की। गंभीर के 54, सहवाग के 96, लक्ष्मण के 74 रनों की बदौलत भारत को मजबूत प्लेटफॉर्म मिल चुका था। बॉलिंग में चार विकेट लेने के बाद हरभजन सिंह उस दिन बैटिंग में भी कुछ खास करने के मूड में थे। 367 के स्कोर पर भारता 9वां विकेट गिरा। हरभजन का साथ देने के लिए श्रीसंत मैदान पर उतरे। इस टेस्ट पारी को हरभजन ने बिल्कुल वनडे के अंदाज में खेला। 116 गेंदों पर नाबाद 111 रन बनाये जिसमें 7 चौके और 7 जबर्दस्त छक्के शामिल थे। श्रीसंत ने इनका बखूबी साथ दिया। नम्बर 11 के पोजिशन पर खेलते हुए श्रीसंत ने 71 गेंदें खेलीं और 24 रन बनाये। दोनों ने अंतिम विकेट के लिए 105 रन जोड़े थे। 2004 में सचिन तेंदुलकर और जहीर खान ने बांग्लादेश के खिलाफ अंतिम विकेट के लिए 133 रन जोड़े थे। सचिन इस टेस्ट में नाबाद 248 और जहीर खान ने 75 रन बनाये थे। यानी अब देखा जा सकता है कि टेस्ट क्रिकेट में नम्बर 11 का बल्लेबाज क्या कमाल कर सकता है।

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