कैसे आई विराट कोहली और रोहित शर्मा के करियर में बड़ी गिरावट? आंकड़ों से समझें क्यों अब खाली करनी होगी जगह
IND vs AUS: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न टेस्ट मैच में हार के साथ ही टीम इंडिया के ऊपर अब वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।सिडनी में होने वाला अंतिम टेस्ट मैच काफी अहम हो गया है। उस मुकाबले को हर हाल में जीतना ही पड़ेगा।
भारतीय टीम की बैटिंग यूनिट के दो बड़े स्तम्भ विराट कोहली और रोहित शर्मा का बल्ला इस सीरीज में खामोश रहा है। दोनों के प्रदर्शन में निरंतर गिरावट आती चली गई है। रोहित शर्मा के आंकड़ों को लेकर तो सोशल मीडिया पर मीम भी काफी देखने को मिल रहे हैं।

विराट कोहली की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में अच्छी हुई थी। पर्थ टेस्ट में शतक आने के बाद माना जा रहा था कि अब वह धमाल करेंगे लेकिन बाद में मामला खराब होता चला गया और उनके आंकड़ों में गिरावट दर्ज हुई। कोहली नियमित रूप से फ्लॉप होते चले गए।
पर्थ के शतक के बाद कोहली ने 7,11,3,36 और 5 रन बनाए हैं। इस प्रदर्शन से टीम इंडिया का भला होना मुश्किल ही था और वही हुआ। दूसरी तरफ रोहित शर्मा ने टीम को पर्थ टेस्ट के बाद जॉइन किया था। उनके बल्ले से तो रन आए ही नहीं हैं।
रोहित शर्मा ने एडिलेड टेस्ट से शुरुआत की और अब तक पांच पारियों में 31 रन बना पाए हैं। वह छठे नम्बर से ओपनर के तौर पर भी खेलने आ गए। केएल राहुल को नम्बर तीन पर धकेल दिया लेकिन इन बदलावों का कोई असर देखने को नहीं मिला है। बुमराह ने 30 विकेट झटके हैं और रोहित ने 31 रन बनाए हैं।
अपने बच्चे के जन्म के अवसर पर रोहित शर्मा इंडिया में थे और ऑस्ट्रेलिया में पहले टेस्ट के दौरान कप्तान जसप्रीत बुमराह थे। देश को जब इनकी जरूरत होती है, तब खेल के मैदान पर नहीं होते लेकिन बातों और इंटरव्यू में हमेशा कहते हैं कि हम तो देश के लिए खेलते हैं। दरअसल पैसों से मालामाल हो जाने के बाद देश से कोई मतलब नहीं रह जाता है। देश की बात करने पर सरहद पर खड़े उस सिपाही को याद करना जरूरी है, जो उत्सव, त्योहार, बच्चे के जन्म आदि मौकों पर अपने घर नहीं जा पाता। क्रिकेटर्स के काम को प्रोफेशनल कहा जाता है, इसका अर्थ होता है कि यह प्रोफेशन है और बदले में पैसा मिलता है।
नाम और शोहरत हासिल होने के बाद सोशल मीडिया के जरिये ब्रांड्स प्रमोशन से भी धड़ाधड़ पैसे आते रहते हैं। भले ही फॉर्म साथ नहीं दे रही हो लेकिन ब्रांड्स प्रमोशन के लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना जरूरी होता है। बाद में खराब प्रदर्शन के लिए इधर-उधर की बात कर मामले को रफादफा करने का प्रयास होता है। रोहित शर्मा और विराट कोहली को अपने भविष्य के बारे में सोचना होगा क्योंकि इन दोनों के रहते युवा प्लेयर्स का भविष्य खराब होने के साथ ही टीम का प्रदर्शन भी दोयम दर्जे का हो गया है।
कोहली की तो स्थिति और भी खराब है। वह मैदान को जंग का अखाड़ा समझते हैं। बल्ला भले ही नहीं चल रहा हो लेकिन जुबान चलती रहनी चाहिए। मेलबर्न टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के युवा बल्लेबाज सैम कोन्सटास को बेवजह कंधे से मारकर कोहली ने साबित कर दिया कि हम नहीं सुधरेंगे, भले ही रन नहीं बन रहे और टीम लगातार हार रही हो। इसके बाद आउट होकर जाते हुए कोहली दर्शकों से भिड़ने चले जाते हैं।
रन बनाने के बाद अग्रेशन हो, तो ठीक है लेकिन बिना कुछ किये ही खराब बर्ताव आलोचना को आमंत्रण देने जैसा है और ऐसा ही हुआ है। कोहली को इसे समझना पड़ेगा क्योंकि अब वह 26 के नहीं बल्कि 36 के हैं।












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