IND vs WI: विराट-रोहित की कप्तानी में प्रज्ञान ओझा ने बताया असल फर्क, कोहली पर दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सीमित ओवर्स प्रारूप के नये नियमित कप्तान रोहित शर्मा ने रविवार को लगभग 2 महीने की इंजरी के बाद जबरदस्त तरीके से वापसी की और वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गये पहले ही वनडे मैच में 60 रनों की अर्धशतकीय पारी खेलकर अपनी टीम को 6 विकेट की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अहमदाबाद में खेले गये इस मैच में रोहित शर्मा ने जिस तरह से अपने ट्रेडमार्क पुल शॉट और एलिगेंट खेल के जरिये 10 चौके, एक छ्क्के लगाये, उसे देखकर यही लगा कि जैसे यह खिलाड़ी कभी मैदान से दूर गया ही न हो। भारत के लिये यह जीत कई मायनों में खास रही, क्योंकि यह जीत न सिर्फ साल 2022 में मिली पहली जीत थी बल्कि भारत ने अपने 1000वें वनडे मैच में हासिल की थी।
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इसके साथ ही रोहित शर्मा वेस्टइंडीज के खिलाफ इस मैच से नियमित रूप से वनडे प्रारूप की कमान भी संभालने जा रहे थे और जीत से बेहतर शुरुआत किसी भी कप्तान के लिये नहीं हो सकती। अहमदाबाद की स्लगिश विकेट पर रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और स्पिनर्स की मदद से कैरिबियाई टीम को 176 रन पर समेट दिया। जवाब में भारतीय टीम ने सूर्यकुमार यादव (34) और डेब्यू कर रहे दीपक हुड्डा (26) की नाबाद पारियों की बदौलत मैच को 28 ओवर्स में 4 विकेट खोकर खत्म कर दिया।
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ओझा ने बताया विराट-रोहित की कप्तानी में अंतर
वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय टीम को पहली जीत के बाद पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने रोहित शर्मा की कप्तानी में खासियतों के बारे में बताया कि कैसे उनका शांत स्वाभाव टीम में युवा खिलाड़ियों को राहत का एहसास देता है। इस दौरान उन्होंने विराट कोहली के मुंहफट एटिट्यूड और आक्रामक कैरेक्टर की भी बात की और बताया कि उनका यह नेचर नये प्लेयर्स को डरा देता है।
क्रिकबज से बात करते हुए ओझा ने कहा,'कोहली इतने ज्यादा ऊर्जावान और एक्सप्रेसिव खिलाड़ी हैं कि अगर मैदान पर कोई खिलाड़ी ऐसा हो जिसका व्यव्हार उनके जैसा नहीं हो तो उसे अपनी बात रखने में दिक्कत होती है। उसे मुश्किल समय में कप्तान के सामने अपने विचार और आइडिया देने में झिझक होती है। वहीं पर रोहित की बात करें तो बहुत ज्यादा एक्सप्रेसिव नहीं है, वो जानते हैं कि जब दो टीमों के बीच हाई इंटेंसिटी मैच होता है तो आपको कुछ ऐसे खिलाड़ी भी मिलेंगे जो अपने आप तक सीमित रहते हैं। मुझे लगता है कि कोहली और रोहित की कप्तानी के तरीके में यह सबसे बड़ा फर्क है।'

क्या है दोनों की कप्तानी में समानता
भारत के लिये 14 टेस्ट, 18 वनडे और 6 टी20 मैच खेल चुके ओझा ने विराट और रोहित की कप्तानी में अंतर बताने के बाद समानता भी बतायी और कहा कि दोनों खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना चाहते हैं और हर हाल में जीत हासिल करने का गोल रखते हैं।
उन्होंने कहा,' ओवरऑल दोनों खिलाड़ियों के अंदर मैच को जीतने का जुनून एक जैसा है लेकिन कई खिलाड़ी यह कह सकते हैं कि वो रोहित के साथ ज्यादा सहज महसूस करते हैं। एक नया खिलाड़ी टीम में खुलने से पहले समय लेता है और रोहित उस खिलाड़ी के लिये यह काम आसान बना देते हैं। वह मैदान पर बहुत ज्यादा एक्सप्रेसिव नहीं है जिसकी वजह से नया खिलाड़ी उनके साथ जल्दी खुल जाता है जबकि कोहली के सामने कह देने वाले नेचर से प्लेयर डर जाता है। हालांकि दोनों खिलाड़ियों का गोल भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का है।'

रोहित की कप्तानी में हो रही है नये अध्याय की शुरुआत
इस जीत के साथ ही रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट के एक नये अध्याय की शुरुआत हो रही है जिसमें हिटमैन लंबे समय से चले आ रहे आईसीसी खिताब के सूखे को खत्म करने की ओर देख रहे हैं। रोहित की कप्तानी में भारत को इस साल ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्वकप खेलना है तो वहीं पर 2023 में घर पर वनडे विश्वकप भी आयोजित किया जाना है।
रोहित की कप्तानी की बात करें तो वो मैदान पर ज्यादातर शांत स्वाभाव में नजर आते हैं और अपने खिलाड़ियों को खुल कर खेलने की आजादी देते हैं। मुंबई इंडियंस के लिये उनकी कप्तानी साफ बताती है कि उनके अंदर कितनी काबिलियत है। उन्होंने अपनी टीम की कप्तानी करते हुए सबसे ज्यादा 5 बार आईपीएल खिताब जिताने का काम किया है और टूर्नामेंट के सबसे सफल कप्तान बने हैं।












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