Kerala CM Oath Ceremony: वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण में नहीं दिखे विजय, क्या है कांग्रेस से दूरी की असली वजह?
Kerala CM Oath Ceremony: केरल में नई UDF सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन आज, 18 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इस कार्यक्रम में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई बड़े विपक्षी नेता शामिल होने वाले हैं।
लेकिन इसी बीच दक्षिण भारतीय सुपरस्टार और तमिल राजनीति में तेजी से उभर रहे नेता विजय के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए जिससे नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विजय ने जानबूझकर इस समारोह से दूरी बनाई है ताकि उनकी छवि कांग्रेस के साथ बहुत ज्यादा जुड़ी हुई न दिखाई दे। माना जा रहा है कि अभिनेता-राजनेता विजय फिलहाल केंद्र सरकार के साथ टकराव की बजाय संतुलित संबंध बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
विजय की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई अटकलें
केरल के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण समारोह में कई विपक्षी नेताओं को आमंत्रित किया गया है। कांग्रेस इस कार्यक्रम को सिर्फ राज्य स्तरीय आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विपक्षी एकजुटता के संदेश के रूप में भी पेश करने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में विजय की गैरमौजूदगी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर विजय इस समारोह में क्यों नहीं जा रहे हैं।
हालांकि विजय या उनकी पार्टी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
कांग्रेस से 'सुरक्षित दूरी' बनाकर चल रहे विजय? 'जूनियर पार्टनर' दिखाने से परहेज
तमिलनाडु की राजनीति में विजय को एक नए और संभावित बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है और विजय लगातार खुद को "जनता के नेता" के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि विजय फिलहाल किसी एक राष्ट्रीय दल के बहुत करीब दिखने से बचना चाहते हैं। खासकर कांग्रेस के मंच पर प्रमुखता से दिखाई देना उनके लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक,अगर विजय केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF सरकार के शपथ ग्रहण में शामिल होते, तो यह संदेश जा सकता था कि वे राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के साथ खड़े हैं। इससे केंद्र की भाजपा सरकार और दक्षिण की राजनीति में उनके भविष्य के समीकरण प्रभावित हो सकते थे।
केंद्र के साथ 'वर्किंग रिलेशन' बनाए रखने की कोशिश
सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार विजय फिलहाल केंद्र सरकार के साथ कम से कम एक "व्यावहारिक और कामकाजी संबंध" बनाए रखना चाहते हैं। यही वजह है कि वे ऐसे आयोजनों से दूरी बना रहे हैं जिन्हें सीधे तौर पर कांग्रेस या विपक्षी गठबंधन की ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, राजनीति में एंट्री के बाद विजय अभी अपनी राजनीतिक पहचान को संतुलित रखने की कोशिश कर रहे हैं। वे न तो खुलकर भाजपा विरोधी खेमे में दिखना चाहते हैं और न ही किसी राष्ट्रीय पार्टी के सहयोगी के रूप में अपनी छवि बनाना चाहते हैं।
विपक्षी एकता के मंच से दूरी का क्या मायने?
केरल का यह शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में विपक्षी दलों की शक्ति प्रदर्शन का मंच माना जा रहा है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री इसमें शामिल हो रहे हैं। ऐसे समय में विजय की दूरी यह संकेत दे सकती है कि वे फिलहाल राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति का हिस्सा बनने से बचना चाहते हैं। वे अपनी राजनीति को तमिलनाडु केंद्रित रखते हुए धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाने की रणनीति अपना सकते हैं।
क्या आगे बदल सकते हैं समीकरण?
फिलहाल विजय की पार्टी TVK किसी बड़े राष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा नहीं है। लेकिन आने वाले समय में तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण बदलने के साथ उनकी रणनीति भी बदल सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि विजय अभी वेट एंड वॉच की नीति पर चल रहे हैं। वे जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद ही किसी राष्ट्रीय राजनीतिक धड़े के करीब जाने का फैसला कर सकते हैं। फिलहाल केरल के शपथ ग्रहण समारोह से दूरी ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि विजय अपनी राजनीतिक यात्रा में हर कदम बेहद सोच-समझकर रख रहे हैं।














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