Ebola Outbreak: हंता के बाद अब तेजी से फैल रहा इबोला वायरस, क्या हैं इसके लक्षण? भारत को कितने रिस्क?
Ebola Outbreak: नीदरलैंड के एक क्रूज लाइनर पर हंतावायरस फैलने की खबर के कुछ ही दिनों बाद अब दुनिया एक और बड़े हेल्थ संकट को लेकर चिंतित हो गई है। World Health Organization ने 17 मई को कांगो (DRC) और युगांडा में फैले इबोला वायरस के प्रकोप को अंतर्राष्ट्रीय चिंता बताते हुए पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया। इस फैसले ने दुनिया भर में संक्रामक बीमारियों को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
कितनी खतरनाक हो चुकी है स्थिति?
पूर्वी कांगो के इटुरी प्रांत में शुरू हुए इस प्रकोप में अब तक कम से कम 88 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 300 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं। वायरस अब पड़ोसी देश युगांडा तक पहुंच चुका है, जहां कांगो से आए यात्रियों से जुड़े दो कन्फर्म केस सामने आए हैं। इनमें राजधानी कंपाला में हुई एक मौत भी शामिल है।

WHO ने क्या चेतावनी दी है?
WHO का कहना है कि फिलहाल यह स्थिति महामारी आपातकाल के स्तर तक नहीं पहुंची है। लेकिन संगठन ने चेतावनी दी है कि कांगो की सीमा से लगे देशों में इसके तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से WHO लगातार निगरानी कर रहा है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील कर रहा है।
आखिर इबोला है क्या?
WHO की घोषणा के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इबोला आखिर है क्या और यह कितना खतरनाक है। भारत में भी लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या यह बीमारी यहां तक पहुंच सकती है। इसे समझने के लिए पहले इबोला वायरस के नेचर को समझना जरूरी है। इसका पहला मामला साल 1976 में सूडान (अब दक्षिणी सूडान) में पाया गया था। यह इबोला नदी के पास मिला था, इसीलिए इसका नाम इबोला रखा गया।
फ्रूट बैट से जुड़ा है वायरस
WHO के हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबि इबोला का संबंध फ्रूट बैट यानी फल खाने वाले चमगादड़ों से माना जाता है। यह वायरस अक्सर वायरल हेमरेजिक फीवर का कारण बनता है। 1976 के बाद से दुनिया में इबोला के 40 से ज्यादा लहरें दर्ज की जा चुकी हैं। वहीं मौजूदा लहर जो DRC में फैली है उसे 17वां नंबर दिया गया है। कांगो में पिछले साल भी इबोला फैला था जिसमें 53 लोगों में वायरस पाया गया जिनमें से 45 लोगों की मौत हो गई थी।
इबोला कैसे फैलता है?
इबोला इंसानों के बीच संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। इसमें उल्टी, खून, पसीना और वीर्य जैसे तरल शामिल हैं। यानी यह वायरस कोविड-19 की तरह हवा में आसानी से नहीं फैलता, बल्कि सीधे संपर्क से फैलता है।
इबोला के लक्षण क्या होते हैं?
इबोला से संक्रमित व्यक्ति में शुरुआत में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बाद में उल्टी, दस्त, त्वचा पर दाने और शरीर के अंदर-बाहर रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इस बीमारी की मृत्यु दर करीब 50 प्रतिशत तक मानी जाती है। मतलब हर दूसरे आदमी की मौत लगभग तय है।
इस बार का प्रकोप अलग क्यों माना जा रहा है?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार चिंता की सबसे बड़ी वजह वायरस का बुंडिबुग्यो स्ट्रेन है। यह इबोला का कम पाया जाने वाला लेकिन बेहद खतरनाक प्रकार माना जाता है। यह स्ट्रेन पहली बार 2007-2008 में युगांडा के बुंडिबुग्यो जिले में सामने आया था। उस दौरान 149 मामलों में से 37 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 2012 में कांगो के इसिरो इलाके में फिर इसका प्रकोप हुआ, जहां 57 मामले और 29 मौतें दर्ज की गई थीं। साथ ही इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई वैक्सीन भी नहीं है।
कितने मामले और कितनी मौतें?
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा लहर पिछले महीने शुरू हुई थी। पहला संदिग्ध मरीज 59 साल का व्यक्ति था, जिसमें 24 अप्रैल को लक्षण दिखे और तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई। वहीं अब तक कुल 336 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 88 मौतें दर्ज की गई हैं। ज्यादातर मामले कांगो में हैं, जबकि दो मामले पड़ोसी युगांडा में सामने आए हैं।
क्या भारत के लिए भी खतरा है?
WHO की घोषणा के बाद भारत में भी चिंता बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए फिलहाल जोखिम काफी कम है क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों से भारत के लिए ज्यादा सीधी हवाई यात्रा नहीं होती। बावजूद इसके एक डर बना ही है। साथ ही भार तमें पहले से थर्मल स्क्रीनिंग, आइसोलेशन प्रोटोकॉल और वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ समन्वय जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
कोविड जैसा खतरा क्यों नहीं?
डॉक्टरों का कहना है कि इबोला कोविड-19 की तरह हवा से तेजी से नहीं फैलता। यह मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसलिए इसका फैलाव रोकना कोरोना की तुलना में आसान माना जाता है।
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