Bhilwada Petrol Pumps Shut: खत्म हो गया पेट्रोल-डीजल? अचानक क्यों बंद हुए भीलवाड़ा के सभी पेट्रोल पंप?

Bhilwada Petrol Pumps Shut Indefinitely: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में सोमवार से पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। जिले के पेट्रोल पंप संचालकों ने अचानक बड़ा फैसला लेते हुए सभी पेट्रोल पंप अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए हैं। भीलवाड़ा पेट्रोलियम डीलर सोसायटी की रविवार को हुई अहम बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके बाद सोमवार सुबह 9 बजे से जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल की बिक्री रोक दी गई।

इस फैसले से आम लोगों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ने लगा है। डीलर्स का कहना है कि वे किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी साख और सम्मान बचाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग भी की जाएगी। जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहने के संकेत दिए गए हैं।

बैठक के बाद लिया गया फैसला

भीलवाड़ा पेट्रोलियम डीलर सोसायटी के सचिव अशोक कुमार मुंदड़ा ने बताया कि रविवार को हुई बैठक में सभी डीलर्स ने एकमत होकर पेट्रोल पंप बंद रखने का निर्णय लिया। इसके तहत सोमवार सुबह से जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर तेल की बिक्री रोक दी गई है।

सोसायटी का कहना है कि इस दौरान जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर अपनी समस्याएं और मांगें सरकार तक पहुंचाई जाएंगी। डीलर्स ने साफ कहा है कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती, तब तक पेट्रोल पंप बंद रहेंगे।

जांच के बाद बढ़ा विवाद

डीलर्स के मुताबिक हाल ही में राज्य के उपभोक्ता मामलात मंत्री सुमित गोदारा के निर्देश पर भीलवाड़ा के कुछ पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया गया था। यह जांच विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत की गई थी।

जांच के दौरान 5 लीटर पेट्रोल-डीजल के माप में 30 मिलीलीटर तक तेल कम मिलने की बात सामने आई थी। इसी के बाद मामला चर्चा में आ गया और कई पेट्रोल पंपों पर सवाल उठने लगे।

डीलर्स ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि जांच का तरीका सही नहीं था। सोसायटी के अनुसार मशीनों की तकनीकी बनावट ऐसी होती है कि यदि 21 मिलीलीटर का अंतर भी हो तो मशीन सीधे 30 मिलीलीटर दिखाती है। ऐसे में इसे ग्राहकों को कम तेल देना नहीं माना जा सकता।

डीलर्स ने कहा कि जांच के आधार पर उन्हें गलत तरीके से बदनाम किया गया। उनका कहना है कि बिना पूरी तकनीकी जानकारी के मामले को बड़ा बनाकर पेश किया गया।

नियमों का दिया हवाला

सोसायटी ने सरकारी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि 5 लीटर तेल के माप में 25 मिलीलीटर तक का अंतर मान्य होता है। यह सामान्य तकनीकी अंतर माना जाता है और इसे किसी तरह की गड़बड़ी नहीं कहा जा सकता।

डीलर्स का कहना है कि इस सीमा के भीतर आने वाले अंतर को लेकर पेट्रोल पंप मालिकों को दोषी ठहराना गलत है।

सोशल मीडिया पर नाराजगी

डीलर्स का सबसे ज्यादा विरोध इस बात को लेकर है कि जांच पूरी होने और किसी कानूनी प्रक्रिया के बिना ही मामला सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया।

सोसायटी का आरोप है कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पेट्रोल पंप मालिकों के खिलाफ आपत्तिजनक और गलत टिप्पणियां कीं। इससे व्यवसायियों की छवि को नुकसान पहुंचा है और समाज में गलत संदेश गया है।

कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन

सोसायटी के अध्यक्ष जाहिर हुसैन, सचिव अशोक कुमार मुंदड़ा और कोषाध्यक्ष दिनेश भगत सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, लेकिन जांच के नाम पर सार्वजनिक रूप से बदनाम करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

डीलर्स ने जिला कलेक्टर को दिए जाने वाले ज्ञापन में मांग की है कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने और व्यवसायियों का अपमान करने वाले लोगों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उनकी प्रतिष्ठा बहाल करने के लिए प्रशासन जरूरी कदम उठाए।

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