IND V PAK: टॉप ऑर्डर की ऐसी लचर बल्लेबाजी रही तो ‘घायल’ शेर दबोच लेगा !
क्या भारत अपनी इसी लचर बैटिंग के दम पर एशिया कप या टी-20 वर्ल्ड कप जीतेगा ? हांगकांग की कमजोर गेंदबाजी के खिलाफ भी भारत के कुछ बल्लेबाज जिस तरह संघर्ष करते नजर आये वह चिंता की बात है।
नई दिल्ली, 2 सितंबर: क्या भारत अपनी इसी लचर बैटिंग के दम पर एशिया कप या टी-20 वर्ल्ड कप जीतेगा ? हांगकांग की कमजोर गेंदबाजी के खिलाफ भी भारत के कुछ बल्लेबाज जिस तरह संघर्ष करते नजर आये वह चिंता की बात है। वो तो आखिरी तीन ओवरों में 54 रन बन गये वर्ना भारत की लुटिया तो डूबने वाली थी। अगर सूर्य कुमार यादव ने विध्वंशक पारी नहीं खेली होती तो भारत का स्कोर 150-160 के बीच भी रह सकता था। फिर जिस तरह से हांगकांग ने पांच विकेट पर 152 रन बना दिये थे, क्या वे 160 के स्कोर को पार नहीं कर लेते ? अगर चार सितम्बर को फिर पाकिस्तान से मैच हो तो क्या भारत ऐसी ही पकाऊ बल्लेबाजी के साथ मैदान पर उतरेगा?

रोहित का कम स्कोर पर आउट होना चिंता की बात
पाकिस्तान के खिलाफ हार्दिक ने नैया परा लगा दी। हांगकांग के खिलाफ सूर्य कुमार यादव ने। यानी भारत के टॉप आर्डर के बल्लेबाजों ने अभी तक निराश ही किया है। क्या रोहित शर्मा माइक ब्रेयरली जैसा कप्तान बनना चाहते हैं ? इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली टेस्ट मैच तो जीत जाते थे लेकिन खुद बड़ी पारी नहीं खेल पाते थे। रोहित ने पिछली 12 पारियों में सिर्फ एक अर्धशतक लगाया है। अगर रोहित एक सौ साठ-सत्तर की स्ट्राइक रेट से खेलें और रन बनाएं सिर्फ 20- 30 तो यह कितने दिनों तक चलेगा ? टी-20 का खेल जोखिम वाला होता है। किसी का बल्ला चल भी सकता है और नहीं भी। आप एक दो खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रह सकते। हांगकांग के खिलाफ धमाल मचाने वाले सूर्या ने पाकिस्तान के विरुद्ध सिर्फ 18 रन ही बनाये थे। अगर किसी मैच में सूर्या, हार्दिक या रवीन्द्र जडेजा नहीं चले तो क्या होगा ? जब पहले बैटिंग की नौबत आये तो बोर्ड पर बड़ा स्कोर टंगा होना चाहिए। 180 प्लास का टारगेट तो होना ही चाहिए ताकि गेंदबाज उसकी रक्षा कर सकें।

हांगकांग के खिलाफ क्या रही कमजोरी ?
रोहित शर्मा 13 गेंदों पर 21 रन बना कर चलते बने। वे जब आउट हुए तब भारत का स्कोर था 4.5 ओवर में 38 रन था। उस समय तक लगभग 8 रन प्रति ओवर के हिसाब स्कोर आगे बढ़ रहा था। रोहित आउट हुए तो केएल राहुल और विराट कोहली रनों के लिए संघर्ष करते नजर आये। टीम में बने रहने के लिए राहुल और कोहली किसी तरह रन बनाना चाहते थे। पहले पावर प्ले में तेज खेलना था। लेकिन दोनों रुक-रुक कर खेलने लगे। नतीजा ये हुआ कि स्ट्राइक रेट गिरने लगा। कोहली और राहुल के धीमा खेलने से ही 10 ओवर में सिर्फ 70 रन बने थे। हांगकांग की कमजोर गेंदबाजी के सामने भी कोहली और राहुल तेजी से रन नहीं बना पा रहे थे। आइसीसी के एक एसोसिएट मेम्बर के खिलाफ भारत की ऐसी बल्लेबाजी चौंकाने वाली थी। टी-20 में या तो रन बनाइए या फिर रन बनाने की कोशिश में आउट होइए। डॉट गेंद खेलने से क्या फायदा ? आखिरकार के एल राहुल 39 गेंदों पर 36 रन बना कर आउट हुए। राहुल के आउट होने के बाद सूर्या आये। तब जाकर भारत के खेमे में उजाला फैला।

सूर्या : फास्ट एंड फ्यूरियस
14वें ओवर से सूर्या ने ड्राइविंग सीट संभाली। फिर तो वे फास्ट एंड फ्यूरिस फिल्म के अभिनेता बिन डिजल की तरह एडवेंचर की दुनिया में दाखिल हो गये। अब सूर्या क्रिकेटर से अधिक जिमनास्ट हो गये हैं। रबर के पुतले की तरह जहां चाहे वहां से शरीर को मोड़ कर शॉट खेलने लगे हैं। सूर्या के आने का एक और फायदा। जो कोहली दब-दब कर खेल रहे थे वे भी धूम झड़ाके पर उतर आये। भारत के सौ रन 13.3 ओवर में बने थे। 17 ओवर में 138 रन बने थे। लेकिन अंतिम तीन ओवरों में 54 रन बने जिससे भारत का स्कोर 192 तक पहुंचा। अंतिम ओवर में सूर्या ने चार छक्के लगाये थे। अंतिम तीन ओवरों में जो 54 रन बने थे उनमें 43 रन सूर्या ने ही बनाये थे।

राहुल और कोहली अब चेत जाएं
बहरहाल कोहली ने भी 44 गेंदों पर 59 रनों का की पारी खेली जिसमें 3 छक्के और एक चौका शामिल था। ग्यारह पारियों के बाद कोहली के बल्ले से कोई अर्धशतक निकला था। अब कोहली को पुराने अंदाज में खेलना होगा। अगर नहीं, तो उनकी जगह लेने के लिए कई खिलाड़ी पीछे खड़े हैं। केएल राहुल इंजुरी के बाद टीम में लौटे हैं। उन्होंने पिछले दो मैचों में निराश किया है। सलामी जोड़ी के रूप में भारत पहले ही बहुत प्रयोग कर चुका है। अब टीम को अंतिम रूप देने का समय आ गया है। राहुल के पास ज्यादा वक्त नहीं है। उन्हें परफॉर्म करना होगा या फिर जगह खाली करनी होगी।

गेंदबाजी में कमजोर कड़ी
जसप्रीत बुमराह के नहीं रहने से सारा दबाव भुवनेश्वर कुमार पर आ गया है। उन्हें दूसरे छोर से वैसा सहयोग नहीं मिल रहा है जैसा कि मिलना चाहिए था। हांगकांग को अभी टेस्ट दर्जा नहीं मिला है। फिर भी भारत के गेंदबाज उनको काबू में नहीं रख सके। सिर्फ पांच विकेट ही ले सके। आवेश खान भारतीय गेंदबाजी की कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं। उन्होंने 19वें ओवर में 21 रन लुटा दिये। स्कॉट मैकेनी और जिशान ने इस ओवर में दो छक्के और दो चौके लगाये। जब कि 18वें ओवर में भुवनेश्वर ने सिर्फ 4 रन दिये थे। अगर कोई निर्णायक मैच होता तो आवेश, भुवी की मेहनत पर पानी फेर दिये होते। आवेश ने 4 ओवर में 53 रन दिये। अर्शदीप सिंह में प्रतिभा है लेकिन बड़े मुकाबलों के लिए उन्हें अभी इंतजार करना होगा। अर्शदीप ने 4 ओवरों में 44 रन दिये। डेथ ओवरों में इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
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