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लॉकडाउन में घर पहुंचने की बेचैनी ने ले ली मजदूर की जान, दिल्ली से बिहार के लिए साइकिल से निकला था युवक

शाहजहांपुर। पूरे देश में लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी गई है। ऐसे में दूसरे राज्यों में फंसे लोग कैसे भी कर के अपने घर पहुंचना चाहते हैं। इसके लिए कोई पैदल चल रहा है तो कोई साइकिल से ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए निकल जा रहा है। इसी कड़ी में बिहार के खगड़िया जिले के धर्मवीर जो कि लॉकडाउन के दौरान घर पहुंचने के लिए वो दिल्ली से अपने दोस्तों के साथ 1300 किलोमीटर का सफर पूरा करने के लिए निकल पड़े थे।

दोस्तों के साथ निकला था युवक

दोस्तों के साथ निकला था युवक

लेकिन धर्मवीर को क्या पता था कि ये उनके जीवन का आखिरी सफर है। धर्मवीर साइकिल से अपने दोस्तों के साथ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर तक ही पहुंचे थे कि उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बीते गुरुवार को बारिश होने लगी तो वे सभी एक जगह सु्स्ताने के लिए रुक गए। शुक्रवार सुबह धर्मवीर के सीने में तेज दर्द होने लगा और सांस लेने में परेशानी होने लगी। जबतक किसी तरह की चिकित्सक सेवा मिलती तब तक धर्मवीर ने दम तोड़ दिया। मृतक धर्मवीर का सैंपल कोरोना टेस्ट के लिए भेज दिया गया है। उनके बाकी साथियों की भी स्क्रीनिंग की गई है।

अचानक सीने में शुरू हुआ दर्द

अचानक सीने में शुरू हुआ दर्द

दिल्ली के शकूरबस्ती इलाके में रहने वाले धर्मवीर और उनके साथियों को लगा था कि लॉकडाउन बढ़ता ही जाएगा। इसी डर के चलते वे सात लोग मंगलवार की सुबह साइकिल से ही बिहार के लिए निकल पड़े थे। शाहजहांपुर कोतवाली के एसएचओ ने बताया, 'इस ग्रुप के एक शख्स ने डायल-112 को सूचना दी थी। जानकारी मिलने पर जब हमारी टीम पहुंची तो धर्मवीर सांस लेने में दिक्कत महसूस कर रहा था और अचानक बेहोश हो गया। हम धर्मवीर को मेडिकल कॉलेज लेकर गए, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत बताया। अब धर्मवीर के बाकी साथियों को क्वारंटीन कर दिया है। हमने धर्मवीर के परिवार को सूचना दे दी है।'

कई लोग पैदल और साइकिल के जरिए जा रहे हैं घर

कई लोग पैदल और साइकिल के जरिए जा रहे हैं घर

बताया गया कि सैकड़ों लोग पैदल या अन्य तरीकों से जिले में पहुंच रहे हैं। स्थानीय एनजीओ और प्रशासन की ओर से उनके खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया, 'हम उन्हें शेल्टर होम में नहीं रख सकते क्योंकि अगर हम उनकी एंट्री करेंगे तो उन्हें 14 दिन क्वारंटीन में रखना होगा। घर जा रहे लोग क्वारंटीन में रुकना नहीं चाहते हैं। हम सिर्फ आगे जाने में उनकी मदद कर रहे हैं और उन्हें खाने की चीजें, मास्क और सैनिटाइजर दे रहे हैं। हम जगह-जगह थर्मल स्कैनर की मदद से उनकी स्क्रीनिंग भी कर रहे हैं।'

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