MP News: सागर में तांबे के घड़े में फंसा 2 साल का मासूम, छैनी-हथौड़े से घड़ा काटकर बचाई बच्चे की जान
MP News: मध्य प्रदेश के सागर शहर में रविवार दोपहर एक दो साल के मासूम बच्चे के साथ एक अनोखा हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी। शहर के चकराघाट वार्ड में तीनबत्ती चौराहे के पास एक बच्चा खेल-खेल में तांबे के घड़े में फंस गया। बच्चे का कमर तक का हिस्सा घड़े के अंदर चला गया, जबकि उसका सिर और हाथ बाहर रह गए।
घड़े का मुंह संकरा होने के कारण बच्चा बाहर नहीं निकल पा रहा था। परिजनों की तमाम कोशिशों के बाद भी जब बच्चा बाहर नहीं निकला, तो उसे घड़े समेत ताम्रकार की दुकान ले जाया गया। वहां ताम्रकार ने छैनी और हथौड़े की मदद से घड़े को सावधानीपूर्वक काटकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। यह पूरा घटनाक्रम करीब एक घंटे तक चला और आसपास के लोगों के लिए एक नाटकीय दृश्य बन गया।

हादसे का विवरण, खेल-खेल में फंसा बच्चा
घटना रविवार, 1 जून 2025 की दोपहर की है, जब चकराघाट वार्ड में रहने वाला दो साल का मासूम बच्चा अपने घर में खेल रहा था। खेलते समय वह पास रखे एक तांबे के घड़े में जाकर बैठ गया। यह घड़ा पारंपरिक डिजाइन का था, जिसका मुंह संकरा और नीचे का हिस्सा चौड़ा था। बच्चे का कमर और पैरों का हिस्सा घड़े के अंदर चला गया, लेकिन संकरे मुंह के कारण वह बाहर नहीं निकल पाया। बच्चे का सिर और दोनों हाथ घड़े के बाहर रह गए, जिससे वह असहज और डर गया। उसकी रोने की आवाज सुनकर परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन बच्चे की हालत देखकर वे घबरा गए।
परिजनों की कोशिशें नाकाम
परिजनों ने अपने स्तर पर बच्चे को बाहर निकालने की हरसंभव कोशिश की। उन्होंने बच्चे के शरीर पर तेल लगाकर उसे फिसलन के जरिए बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन घड़े का संकरा मुंह और बच्चे की स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो सका। बच्चा लगातार रो रहा था, जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई। आसपास के पड़ोसियों ने भी मदद की कोशिश की, लेकिन कोई भी उपाय काम नहीं आया। इस दौरान बच्चे को चोट न पहुंचे, इसके लिए परिजन बेहद सावधानी बरत रहे थे।
लगभग आधे घंटे तक कोशिश करने के बाद परिजनों ने फैसला किया कि बच्चे को घड़े समेत किसी विशेषज्ञ के पास ले जाया जाए। उन्होंने बच्चे को सावधानी से उठाया और घड़े समेत उसे पास के ताम्रकार की दुकान पर ले गए।
ताम्रकार का हुनर, छैनी-हथौड़े से निकाला बच्चा
तीनबत्ती चौराहे के पास स्थित ताम्रकार की दुकान पर परिजनों ने पूरी घटना बताई। ताम्रकार ने स्थिति को समझते हुए तुरंत काम शुरू किया। उन्होंने छैनी और हथौड़े का उपयोग करके घड़े को सावधानीपूर्वक काटना शुरू किया। यह प्रक्रिया बेहद जोखिम भरी थी, क्योंकि घड़े को काटते समय बच्चे को किसी भी तरह की चोट नहीं पहुंचनी थी। ताम्रकार ने अपने अनुभव और कौशल का परिचय देते हुए घड़े के ऊपरी हिस्से को धीरे-धीरे काटा, ताकि बच्चे का शरीर सुरक्षित रहे।
करीब एक घंटे की मेहनत के बाद ताम्रकार ने घड़े को पूरी तरह से काट दिया, और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चे को कोई चोट नहीं आई, और उसे तुरंत परिजनों के हवाले कर दिया गया। परिजनों ने राहत की सांस ली, और ताम्रकार की तारीफ करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। इस घटना के दौरान आसपास के लोग भी जमा हो गए थे, और सभी ने बच्चे के सुरक्षित निकलने पर खुशी जताई।
परिजनों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
बच्चे की मां ने बताया, "जब हमारा बेटा घड़े में फंस गया, तो हम बहुत डर गए थे। उसे रोता देखकर हमारी हालत खराब हो रही थी। हमने तेल लगाकर और अन्य तरीकों से कोशिश की, लेकिन कुछ काम नहीं आया। ताम्रकार जी ने बहुत सावधानी से काम किया और हमारे बच्चे की जान बचाई।"
स्थानीय निवासी राजेश साहू ने कहा, "यह एक ऐसा हादसा था, जिसे देखकर हम सब हैरान थे। बच्चे को घड़े में फंसा देखकर डर लग रहा था, लेकिन ताम्रकार ने अपने हुनर से सबको राहत दी।" घटना के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी और इस तरह के बर्तनों को बच्चों की पहुंच से दूर रखने की बात कही।
बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घरों में बच्चों की पहुंच के भीतर रखे गए भारी या संकरे मुंह वाले बर्तन, जैसे कि तांबे के घड़े, मटके, या अन्य सामान, खतरनाक हो सकते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा ने बताया, "छोटे बच्चे जिज्ञासु होते हैं और खेल-खेल में ऐसी चीजों में फंस सकते हैं। परिजनों को चाहिए कि वे घर में ऐसी वस्तुओं को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और उनकी गतिविधियों पर नजर रखें।"
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस तरह के हादसों में तुरंत विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए, क्योंकि गलत तरीके से बच्चे को निकालने की कोशिश से उसे चोट पहुंच सकती है। इस मामले में परिजनों का ताम्रकार की मदद लेना एक समझदारी भरा फैसला साबित हुआ।
सामुदायिक सहयोग और ताम्रकार की भूमिका
इस घटना में ताम्रकार की भूमिका को सभी ने सराहा। ताम्रकार, जिनका नाम रामस्वरूप बताया जा रहा है, ने न केवल अपने कौशल का परिचय दिया, बल्कि संयम और धैर्य के साथ बच्चे की जान बचाई। रामस्वरूप ने कहा, "जब बच्चे को घड़े में फंसा देखा, तो मुझे भी चिंता हुई। लेकिन मैंने सावधानी से काम किया, ताकि बच्चे को कोई नुकसान न हो। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं मदद कर सका।"
स्थानीय समुदाय ने इस घटना को सामूहिक सहयोग का उदाहरण बताया। पड़ोसियों ने परिजनों को सांत्वना दी और ताम्रकार की दुकान तक पहुंचने में उनकी मदद की। इस घटना ने यह भी दिखाया कि आपात स्थिति में स्थानीय कारीगर और समुदाय की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।












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