Rajendra Rathore: तारानगर सीट पर क्यों बोल गए राजेंद्र राठौड़ के 'मोरिया'? इंटरव्यू में बताई हार की असली वजह
Rajendra Rathore Taranagar Churu: ''इतना भी गुमान ना कर अपनी जीत पे ऐ बेखबर, शहर में तेरी जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं'' ये लाइनें राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ पर सटीक बैठती हैं। सात बार के विधायक राजेंद्र राठौड़ ने हार के बाद हाल ही मीडिया से बातचीत की और कई सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। (वीडियो नीचे)
राजेंद्र राठौड़ कहते हैं कि ''मैं जिंदगी में पहली बार चुनाव हारा हूं। विपक्षी नेता कह रहे थे कि 'मोरिया बुला दूंगा' (चुनाव हारना)। मैं मानता हूं कि उन्होंने मेरा मोरिया बुला दिया। अपनी हार को मैं सहज स्वीकार करता हूं। वैसे मुझे मेरी हार के गम से ज्यादा खुशी इस बात की है कि राजस्थान में मेरी पार्टी जीती है। मुझे गर्व है कि हमने कांग्रेस की सरकार को परास्त कर दिया।

इस बात की भी खुशी है कि हमने कहा था कि राजस्थान से कांग्रेस की हटा देंगे। वो हमने कर दिखाया। राजस्थान की जनता ने पीएम नरेंद्र मोदी की नीतियों व गारंटियों पर भरोसा जताया है। अब हम नए राजस्थान का निर्माण करेंगे। साधारण कार्यकर्ता से लेकर किसी भी स्तर पर मेरा योगदान लिया जाएगा तो मैं योगदान जरूर करूंगा।

यह भी पढ़ें- Baba Balak Nath Biography: पंकज क्यों बना महंत बालकनाथ? माता-पिता ने बताई असली वजह
तारानगर से राजेंद्र राठौड़ के हारने की वजह
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में चूरू जिले में तारानगर सीट पर खुद हार की वजहों पर चर्चा करते हुए राजेंद्र सिंह राठौड़ कहते हैं कि ''मैं लोगों का विश्वास नहीं जीत पाया। लोगों को यह भरोसा नहीं दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान का जरिया मैं बन सकता हूं।''

यह भी पढ़ें- Sukhdev Singh Gogamedi: सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की कितनी पत्नियां? तीसरी बीवी ने खोला मर्डर का सबसे बड़ा राज
राजेंद्र राठौड़ कहते हैं कि लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंद सिंह डोटासरा दूसरे दल में हैं। वैसे ऐसे मित्रों के रहते हुए दूसरे किसी शत्रुओं की आवश्यकता पड़ती नहीं है। वो अहंकार से लबरेज रहे। चुनौती दोनों को मिली थी। वो जीतकर कामयाब हो गए। हम चुनाव हार गए। इनकी जीत के लिए उनको मुबारकबाद।
राजेंद्र राठौड़ कहते हैं कि चुनाव से पहले मैंने अनुमान लगाया था कि राजस्थान में अबकी बार भाजपा की 135 से 150 सीटें आएंगीं। मैं मानता हूं कि मेरे अनुमान के नजदीक भाजपा नहीं पहुंची और ना मैं खुद विधानसभा पहुंच पाया।

राठौड़ ये भी मानते हैं कि लोकतंत्र परिपक्व हो गया और जातियों के आधार पर मतों का विभाजन ज्यादा बढ़ गया। ये लोकतंत्र को कमजोर करने का काम हुआ है। ऐसा होना नहीं चाहिए। होने नहीं दिया जाएगा।
यही वजह है कि राजेंद्र राठौड़ ने अपनी सीट चूरू से हरलाल सहारण को खड़ा किया और जनता से कहा कि इसकी हार मुझे बर्दाश्त नहीं होगी। ये हारा तो मेरे प्राण निकल जाएंगे। इस चुनाव में हरलाल सहारण जीत गए।
यह भी पढ़ें - Ravindra Bhati: 25 की उम्र में MLA बने रविंद्र सिंह भाटी ने राजस्थान CM चुनने से पहले उठाया बड़ा कदम

राजेंद्र राठौड़ कहते हैं कि हरलाल सहारण को चूरू विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिलाकर वे खुद चुनौतीपूर्ण सीट तारानगर गए। वहां हार हुई और अब खुद की हार को बर्दाश्त व स्वीकार करने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं। हार के बाद वसुंधरा राजे से पार्टी कार्यालय में मुलाकात हुई थी।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस जीती थी तब अशोक गहलोत का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए फाइनल होने में 16 दिन लग गए थे। नाम घोषित होते ही कई लोगों ने रेल पटरियों पर जाकर विरोध प्रदर्शन तक किया था।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की जीत के बाद आलाकमान ने पर्यवेक्षक लगा दिए, जो दो दिन में आ जाएंगे। जनता ने जो फैसला किया है। उसी के अनुरूप जल्द ही भाजपा की सरकार आकार ले लेगी।

राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन होगा?
राजेंद्र राठौड़ कहते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी जिस भाजपा नेता व कार्यकर्ता के सिर पर ताज रख देंगे वो ही राजस्थान का नया मुख्यमंत्री बनेगा। उसके किसी को जरा भी शक-शंका नहीं होगी।
राजेंद्र राठौड़ बोले कि मैं मेरी अब तक राजनीति से पूर्णतया संतुष्ट हूं। किसी ने किसी मोड़ पर इतिहास के इन पन्नों का बंद होना ही था। वो चाहे इस चुनाव से हो या आगे हो जाए मुझे कोई मलाल नहीं है।

राजेंद्र राठौड़ चूरू से लड़ सकते हैं लोकसभा चुनाव 2023
राजेंद्र राठौड़ कहते हैं कि मैंने हमेशा से चूरू से चुनाव लड़े हैं। राज्य की राजनीति में सक्रिय रहा हूं। कभी केंद्र की राजनीति नहीं की। फिर भी अगर पार्टी मौका देगी जरूरी करूंगा। अगर लोकसभा चुनाव 2024 में चूरू समेत किसी भी सीट से उम्मीदवार बनने का मौका मिलेगा तो जरूर बनूंगा।
तारानगर सीट से चुनाव हारने के बाद दूसरी सीटों से जीते हुए आधा दर्जन विधायकों ने राजेंद्र राठौड़ से कहा कि वे उनके लिए सीट खाली करने को तैयार हैं, मगर राठौड़ ने उन्हें उपचुनाव लड़ने से मना कर दिया।

राजेंद्र राठौड़ की जीवनी
राजस्थान के चूरू जिले के सरदारशहर के गांव हरपालसर में 21 अप्रैल 1955 में जन्मे राजेंद्र राठौड़ छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। राजेंद्र राठौड़ ने साल 1990-1993 में पहली बार चूरू सीट से चुनाव लड़ा था और फिर लगातार 2008 तक चार बार जीत दर्ज की। साल 2008 में चूरू की बजाय ताराानगर से जीता। फिर 2013 व 2018 में चूरू से विधायक बने। इस बार 2023 में तारानगर में कांग्रेस के विधायक नरेंद्र बुडानिया के सामने चुनाव हार गए।
-
'शूटिंग सेट पर ले जाकर कपड़े उतरवा देते थे', सलमान खान की 'हीरोइन' का सनसनीखेज खुलासा, ऐसे बर्बाद हुआ करियर -
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार












Click it and Unblock the Notifications