राजस्थान विधानसभा से दो विधायकों की छुट्टी तय? फिर से 200 नहीं, 198 पर रह जाएंगे सदस्य!
Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा में एक बार फिर 200 की बजाय 198 विधायक ही रह सकते हैं। भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में फंसे दो विधायकों की सदस्यता पर तलवार लटक रही है। बागीदौरा से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक जयकृष्ण पटेल और अंता से भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा के खिलाफ कार्रवाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। दोनों मामलों में कानूनी और संवैधानिक पहलुओं के चलते राजस्थान विधानसभा में एक बार फिर खाली सीटों का संकट गहरा सकता है।
जयकृष्ण पटेल जेल में, सदाचार समिति कर रही जांच
बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 20 लाख की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बुधवार को उन्हें एसीबी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इस मामले की जांच अब विधानसभा की 12 सदस्यीय सदाचार समिति को सौंपी गई है, जिसके सभापति भाजपा विधायक कैलाश वर्मा हैं। अगर समिति पटेल के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई, तो एसीबी कोर्ट का फैसला आने से पहले ही उनकी सदस्यता समाप्त हो सकती है।

कंवरलाल मीणा को 3 साल की सजा, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
दूसरी ओर अंता से भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा के खिलाफ 20 साल पुराना मामला अब निर्णायक मोड़ पर है। 2005 में उप सरपंच चुनाव के दौरान SDM पर रिवॉल्वर तानने और वीडियोग्राफर की कैसेट तोड़ने के मामले में झालावाड़ की अकलेरा कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज करते हुए 2 सप्ताह में सरेंडर का आदेश दिया है। यदि वे 2 साल से अधिक जेल में रहते हैं, तो उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है।
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क्या फिर नहीं रहेंगे 200 विधायक?
राजस्थान विधानसभा में वर्तमान में 200 सीटें हैं। लेकिन यदि जयकृष्ण पटेल और कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द होती है, तो सदन की संख्या एक बार फिर घटकर 198 हो जाएगी। विधानसभा में पहले भी इस्तीफों और अयोग्य ठहराने के चलते पूर्ण संख्या कम होती रही है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म है कि क्या राजस्थान विधानसभा एक बार फिर अधूरी रह जाएगी?
विधानसभा भवन का संयोग: बीते 20 साल में एक भी बार नहीं बैठे सभी 200 विधायक
राजस्थान विधानसभा का वर्तमान भवन वर्ष 2001 में जयपुर के ज्योतिनगर में बना, लेकिन तब से लेकर अब तक कभी भी 200 विधायक एक साथ पूरे कार्यकाल में इस भवन में नहीं बैठ पाए। यह एक ऐसा संयोग बन गया है, जो अब एक तरह की परंपरा जैसा लगने लगा है।
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शुरुआत से अशुभ घटनाएं
नये भवन में शिफ्टिंग के साथ ही दो विधायकों भीमसेन चौधरी और भीखाभाई की मृत्यु हो गई। इसके बाद कांग्रेस विधायक किशन मोटवानी (2002) और भाजपा विधायक जगत सिंह दायमा (2002) की मौत हुई। 2004 में मंत्री रामसिंह विश्नोई का निधन हुआ, फिर 2005 में अरुण सिंह और 2006 में नाथूराम आहारी का।
जेल और इस्तीफे का सिलसिला
2008-13 के कार्यकाल में भाजपा विधायक राजेंद्र राठौड़ दारा सिंह एनकाउंटर केस में जेल गए। वहीं, मंत्री महीपाल मदेरणा और विधायक बाबूलाल नागर चर्चित आपराधिक मामलों में जेल भेजे गए। 2014 में 4 विधायक सांसद बन गए, सीटें खाली हुईं। बाद में विधायक बाबूलाल कुशवाह जेल गए और कीर्ति कुमारी, धर्मपाल चौधरी, कल्याण सिंह की मौत हो गई।
क्या श्मशान की भूमि पर बना राजस्थान विधानसभा भवन?
स्थानीय मान्यता है कि राजस्थान विधानसभा भवन जिस ज़मीन पर बना, वह पहले मोक्षधाम (श्मशान) थी। भवन के पास आज भी एक मोक्षधाम और एक मजार स्थित है। निर्माण के दौरान भी आधा दर्जन मजदूरों की मौत हुई थी, जिससे यह स्थान 'अशुभ' माना जाने लगा। पिछले 20 वर्षों में 12 विधायकों की मृत्यु, कई जेल भेजे गए, और कुछ सांसद बनकर चले गए - नतीजतन हर बार सदन में 200 की बजाय 199 या उससे कम विधायक ही बैठे।
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