कौन थीं किरण शेखावत, जिन्हें लोग ऑपरेशन सिंदूर में पहली ऑन ड्यूटी शहीद महिला बता रहे हैं, पिता क्या बोले?
Who Was Lt. Kiran Shekhawat: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें भारतीय नौसेना की शहीद अधिकारी लेफ्टिनेंट किरण शेखावत को "ऑपरेशन सिंदूर की पहली ऑन ड्यूटी शहीद महिला" बताया जा रहा है। हालांकि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। लेफ्टिनेंट शेखावत वर्ष 2015 में एक रूटीन नाइट पैट्रोलिंग मिशन के दौरान शहीद हुई थीं और उनका निधन किसी सैन्य अभियान "ऑपरेशन सिंदूर" का हिस्सा नहीं था।
फिर भी, यह सही है कि वह भारतीय नौसेना की पहली महिला अधिकारी थीं जिन्होंने ड्यूटी के दौरान शहादत दी। उनकी वीरता और योगदान को भारत हमेशा याद रखेगा।

शहीद के पिता ने बताई हकीकत
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में लेफ्टिनेंट किरण शेखावत के पिता लेफ्टिनेंट विजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रहे दावों की उन्हें जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बेटी का निधन "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत नहीं हुआ था, बल्कि वह एक सामान्य रात्रि समुद्री गश्त मिशन का हिस्सा थीं।

सेफरगुवार गांव में प्रतियोगिताएं
विजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि बेटी की स्मृति में हर साल गांव सेफरगुवार में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। अब तक युवकों के लिए क्रिकेट प्रतियोगिता होती रही है, लेकिन इस वर्ष से युवतियों के लिए भी खेल प्रतियोगिताएं जोड़ी जा रही हैं।
नौसैनिक परिवार में जन्म
किरण शेखावत का जन्म 1 मई 1988 को मुंबई में एक नौसैनिक परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय नौसेना से मानद लेफ्टिनेंट पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी माता श्रीमती मधु चौहान हैं। उनका परिवार मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनू जिले की खेतड़ी तहसील के सेफरगुवार गांव से है।
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पिता की पोस्टिंग के कारण किरण ने अपनी स्कूली शिक्षा विशाखापत्तनम के केंद्रीय विद्यालय-2 से पूरी की और आंध्र विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की।

बैंक से नौसेना तक का सफर
स्नातक के बाद उन्होंने एक निजी बैंक में कुछ समय तक कार्य किया। वर्ष 2010 में उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला (केरल) में प्रवेश लिया। जनवरी 2011 में वे ऑब्जर्वर स्कूल में शामिल हुईं और फरवरी 2012 में उन्हें प्रतिष्ठित 'विंग्स' प्रदान किए गए। इसके बाद उन्हें INAS 311 स्क्वाड्रन (कोडनेम "Kites") में मिशन कंट्रोलर के रूप में पहली पोस्टिंग मिली।

विवाह और पारिवारिक जीवन
फरवरी 2013 में किरण शेखावत ने साथी नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विवेक सिंह छोकर से विवाह किया, जो गुड़गांव के पास कुर्थला गांव के निवासी हैं। विवेक की मां सुनीता छोकर गांव की सरपंच थीं और परिवार कृषि से जुड़ा हुआ है।

सैन्य जीवन और विशिष्ट जिम्मेदारियां
INS डेगा में सफल सेवा के बाद किरण INAS 310 (कोडनेम "Cobra") स्क्वाड्रन से जुड़ीं, जो एक प्रतिष्ठित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट है। यहां उन्हें खुफिया विश्लेषण, पर्यावरणीय चार्टिंग और महत्वपूर्ण सामरिक मापदंड रिकॉर्ड करने जैसी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। 26 जनवरी 2015 को उन्हें गणतंत्र दिवस परेड में नौसेना की पहली महिला मार्चिंग टुकड़ी का हिस्सा बनने का गौरव मिला।
डोर्नियर विमान हादसा: 24 मार्च 2015
24 मार्च 2015 की रात लेफ्टिनेंट किरण शेखावत गोवा से एक नियमित रात्रिकालीन समुद्री गश्त मिशन पर रवाना हुईं। डोर्नियर Do-228 विमान में उनके साथ कमांडर निखिल जोशी (पायलट) और लेफ्टिनेंट अभिनव नागोरी (सह-पायलट) थे।

रात लगभग 10 बजे विमान ने "ऑपरेशन नॉर्मल" का संदेश भेजा, लेकिन कुछ ही समय बाद वह रडार से गायब हो गया। विमान गोवा तट से लगभग 25 नॉटिकल मील दूर समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त पाया गया।
दो दिन बाद लेफ्टिनेंट किरण शेखावत और लेफ्टिनेंट नागोरी के शव बरामद किए गए। कमांडर जोशी को एक मछुआरे ने बचा लिया। किरण का शव विमान के धड़ के अंदर मिला।
शहादत और विरासत
लेफ्टिनेंट किरण शेखावत युद्धकाल में शहीद नहीं हुई थीं, लेकिन वह भारतीय नौसेना की पहली महिला अधिकारी थीं जिन्होंने ड्यूटी के दौरान प्राण गंवाए। उनका बलिदान भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी की मिसाल है। उनकी स्मृति में उनके पिता ने "लेफ्टिनेंट किरण शेखावत फाउंडेशन" की स्थापना की है, जो समाज सेवा और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत के रूप में कार्य करता है।
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