बिहार में फार्मर रजिस्ट्री के दूसरे चरण की शुरुआत, सभी किसानों की फार्मर आईडी बनाने का संकल्प
बिहार अपने किसान पंजीकरण का दूसरा चरण शुरू कर रहा है, जिसमें पटना के फुलवारी शरीफ के किसानों को किसान आईडी बांटे जा रहे हैं। यह कदम मोदी प्रशासन के डिजिटल इंडिया विजन के अनुरूप, एग्री स्टैक के माध्यम से सब्सिडी, इनपुट और भूमि डेटा तक डिजिटल पहुँच को मजबूत करता है।
बिहार सरकार ने राज्य में फार्मर रजिस्ट्री अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। कृषि भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री Vijay Kumar Sinha ने पटना जिले के फुलवारीशरीफ प्रखंड के किसानों की फार्मर आईडी बनाकर अभियान की औपचारिक शुरुआत की।

इस अवसर पर पांच किसानों — लछमिनिया देवी, सुनील कुमार सिंह, रामप्रवेश सिंह, अजय कुमार और उदय कुमार — को फार्मर आईडी वितरित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री Narendra Modi के डिजिटल इंडिया विजन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना है।
उन्होंने कहा कि ‘एग्री स्टैक’ सरकार और किसानों के बीच एक मजबूत डिजिटल सेतु का काम करेगा और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करेगा। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिलेगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य में कुल 4 करोड़ 54 लाख जमाबंदी कायम हैं। अब तक कृषि विभाग के पोर्टल पर 88 लाख 40 हजार किसानों का ई-केवाईसी पूरा किया जा चुका है, जिनमें से 47 लाख 85 हजार किसानों की फार्मर आईडी तैयार हो चुकी है। शेष 40 लाख 54 हजार किसानों की फार्मर आईडी बनाना सरकार का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि पहले चरण में 47 लाख 85 हजार से अधिक किसानों का सफल पंजीकरण कर बिहार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि पीएम-किसान योजना के 23 लाख 79 हजार लाभार्थियों की भी फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत सरकार ने बिहार को इस उपलब्धि के लिए 269 करोड़ 88 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री केवल एक नंबर नहीं, बल्कि किसानों का डिजिटल पहचान पत्र है। इससे खाद, बीज, ऋण और फसल सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ सीधे किसानों के खातों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सकेगा। साथ ही किसानों को अपनी जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध होगी।
कार्यक्रम में बिहार के मुख्य सचिव Pratyay Amrit ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि फार्मर आईडी बनने के बाद किसानों की जमीन का परिमार्जन भी स्वतः हो सकेगा।
कृषि विभाग के प्रधान सचिव Narmdeshwar Lal ने फार्मर रजिस्ट्री को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए सभी किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूपीआई ने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई है, उसी तरह फार्मर रजिस्ट्री भी कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगी।
इस अवसर पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव Jai Singh, कृषि विभाग के विशेष सचिव बीरेन्द्र प्रसाद यादव, कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव, निदेशक उद्यान अभिषेक कुमार सहित विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।












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