लोकसभा चुनाव में इस ट्रिक से शुभकरण चौधरी के वोट कटवा रहे 'लाल डायरी' वाले राजेंद्र गुढ़ा
Rajendra Gudha vs Shubhakaran Choudhary Jhunjhunu: राजस्थान में लाल डायरी वाले नेता के रूप में पहचान बना चुके राजेंद्र सिंह गुढ़ा भी लोकसभा चुनाव 2024 के मैदान में उतर गए हैं।
झुंझुनूं संसदीय क्षेत्र से राजेंद्र गुढा नहीं लड़ रहे हैं, मगर वोट कटवा साबित हो रहे हैं, जिसका भाजपा को सीधा-सीधा नुकसान व कांग्रेस को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होता दिख रहा है।

दरअसल, राजेंद्र सिंह गुढ़ा इन दिनों गांव-गांव में जनसम्पर्क कर रहे हैं। गुढ़ा किसी के लिए वोट नहीं मांग रहे बल्कि रहे भाजपा उम्मीदवार शुभकरण चौधरी के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।
'मोदी तुमसे बैर नहीं, जातिवादी जनप्रतिनिधि शुभकरण चौधरी तेरी खैर नहीं' स्लोगन के साथ गांव-गांव ढाणी-ढाणी जा रहे हैं। इसे 'जातिवादी, भष्ट्राचारी, टोल माफिया, दलित विरोधी भाजपा प्रत्याशी शुभकरण चौधरी के खिलाफ जनसंपर्क कार्यक्रम' नाम दिया है।
राजेंद्र गुढ़ा ने एक दिन पहले सोशल मीडिया पर लिखा कि BJP के आलाकान ने झुंझुनूं से शुभकरण चौधरी को टिकट दिया है। ये जातिवादी, भ्रष्टाचार, टोल माफिया, दलित विरोधी नेता हैं। इन्हें लोकसभा का टिकट दिया जाना कतई बर्दास्त नहीं है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट में गुढ़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा उम्मीदवार शुभकरण चौधरी द्वारा सार्वजनिक मंच पर राजपूत समाज, गुर्जर समाज एवं अन्य समाजों के खिलाफ अनर्गल एवं विवादित टिप्पणी करना, इनकी जातिवादी एवं संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
बता दें कि राजेंद्र गुढ़ा बसपा से जीतकर कांग्रेस ज्वाइन करके अशोक गहलोत सरकार में मंत्री बन गए थे। फिर कांग्रेस से निष्कासित होने पर राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले शिवसेना ज्वाइन की और शिवसेना की टिकट पर चुनाव लड़ा, मगर हार गए थे।
विधानसभा चुनाव में शुभकरण चौधरी भी हारे। कांग्रेस के भगवान राम सैनी विधायक बने। विधानसभा चुनाव 2023 में राजेंद्र गुढ़ा लाल डायरी लेकर आए और दावा कि लाल डायरी में उनके पास अशोक गहलोत सरकार में हुए घोटालों के सबूत हैं।
अब लोकसभा चुनाव 2024 में राजेंद्र गुढ़ा खुलकर शुभकरण चौधरी का विरोध कर रहे हैं, जिसका अप्रत्यक्ष रूप से फायदा कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र ओला को होगा। गुढ़ा ने भी आरोप लगाया है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में हार के बाद शुभकरण चौधरी द्वारा राजनैतिक द्वेषता के चलते, राजपूत समाज, सैनी समाज, दलित एवं गुर्जर समाज के कर्मचारियों के ट्रांसफर हेतु भेजी गई में इनका अन्य समाजों के प्रति दुर्भावना को दर्शाता है।












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