Jat Andolan Rajasthan: राजस्थान के जाट मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग पर इस दिन से डालेंगे महापड़ाव
Jat Andolan Bharatpur Rajasthan: राजस्थान में लोकसभा चुनाव 2024 से पहले जाट आरक्षण आंदोलन का जिन्न बोतल से हार आ गया है।
राजस्थान के जाटों ने केंद्र में ओबीसी वर्ग में आरक्षण की मांग के लिए 17 जनवरी से मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग के पास जयचौली गांव में महापड़ाव की तैयारियां शुरू कर दी है।

भरतपुर जिले के गांव जयचौली में महापड़ाव स्थल पर बुधवार को आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य पहुंचे और तैयारियों का जायजा लिया। आंदोलन के दौरान लोगों के लिए खानपान की व्यवस्था की भी जानकारी ली। सदस्य गांव-गांव ढाणी-ढाणी भी जा रहे हैं।
बता दें कि राजस्थान के दो जिलों भरतपुर व धौलपुर के जाटों का ओबीसी में आरक्षण राजस्थान से भी वर्ष 2014 में खत्म कर दिया गया था। वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली राजस्थान की भाजपा सरकार ने साल 2017 में ओबीसी कमिशन की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर राज्य में ओबीसी आरक्षण दिया था, लेकिन केंद्र में आरक्षण नहीं मिला।
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इसलिए भरतपुर व धौलपुर जिले के जाट केंद्र में ओबीसी में आरक्षण की मांग विगत 9 वर्षों से कर रहे हैं, जबकि राजस्थान के अन्य जिलों के जाटों को केंद्र की ओबीसी में पहले से ही आरक्षण मिला हुआ है। सिर्फ भरतपुर-धौलपुर दो जिलों के जाटों को आरक्षण नहीं मिला हुआ है।
मीडिया से बातचीत में भरतपुर-धौलपुर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह ने बताया कि हमारी मांग को लेकर सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं। पिछले दिनों सम्मेलन करके 17 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया था। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में 17 जनवरी से मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग के पास महापड़ाव शुरू किया जाएगा।
बता दें कि 7 जनवरी 2024 को डीग जिले के जनूथर कस्बे के भूतेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित महापंचायत में जाट आरक्षण के लिए महापड़ाव का निर्णय लिया गया। जाट आरक्षण समिति के संरक्षक पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह हैं।
जाट आरक्षण आंदोलन राजस्थान का इतिहास
उल्लेखनीय है कि भरतपुर व धौलपुर के जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण दिए जाने की मांग साल 1998 से चली आ रही है। 2013 में केंद्र की मनमोहन सरकार ने भरतपुर-धौलपुर जिलों के साथ अन्य 9 राज्यों के जाटों को केंद्र में ओबीसी वर्ग में आरक्षण दिया था।
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साल 2014 में केंद्र में भाजपा की भाजपा की सरकार बनी तो कोटा का सहारा लेकर 10 अगस्त 2015 को भरतपुर-धौलपुर के जाटों को केंद्र में राज्य में ओबीसी आरक्षण खत्म कर दिया। 23 अगस्त 2017 को वसुंधरा राजे सरकार ने दोनों जिलों के जाटों को ओबीसी में आरक्षण दिया, लेकिन केंद्र में नहीं मिला।












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