Jaisalmer Water: जैसलमेर में निकले पानी की असली वजह पता चल गई, टेथिस सागर के बाद आर्टेसियन थ्योरी आई सामने
Jaisalmer Water: राजस्थान के जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ के 27 बीडी चक 3 जोरावाला के विक्रम सिंह भाटी के खेत में नलकूप खुदाई के दौरान निकला पानी और गैस के बारे में अब नई थ्योरी सामने आई है, जिसे "आर्टेसियन स्थिति" कहा जाता है। भूजल वैज्ञानिक जैसलमेर पानी वाली घटना के पीछे की वजह यही थ्योरी बता रहे हैं।
मीडिया की खबरों के अनुसार राजस्थान भूजल विभाग के वरिष्ठ जल-भूविज्ञानी डॉ. नारायण दास इनाखिया ने बताया कि जैसलमेर के ट्यूबवेल से अचानक अथाह पानी निकलने की घटना "आर्टेसियन स्थिति" के कारण हुई थी। यह पृथ्वी की सतह के नीचे तलछट और मिट्टी की परतों के बीच दबाव में जमा पानी की ओर इशारा करती है।
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Jaisalmer Water wahts is artesian conditions? क्या होती हैं आर्टेसियन स्थिति?
आर्टेसियन स्थिति के मायने ये हैं कि नियमित कुओं के विपरीत, आर्टेसियन पानी भूमिगत दबाव के कारण स्वाभाविक रूप से ऊपर उठ सकता है। जब ड्रिलिंग होती है, तो यह दबाव पानी को ऊपर की ओर धकेलता है। 'आर्टेसियन' शब्द फ्रांस के आर्टोइस से उत्पन्न हुआ है, जो मध्य युग से अपने बहते आर्टेसियन कुओं के लिए जाना जाता है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे आर्टेसियन एक्वीफर को अभेद्य चट्टान की परतों के नीचे दबाव में सीमित पानी के रूप में वर्णित करता है।
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Jaisalmer Water Reason: राजस्थान के जैसलमेर में रेगिस्तान में पानी क्यों उत्पन्न हुआ?
डॉ. इनाखिया ने बताया कि जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में पानी बलुआ पत्थर की परतों के नीचे फंसा हुआ है। जब ये परतें टूटती हैं, तो पानी काफी दबाव के कारण ऊपर की ओर बहता है। जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ और नाचना समिति पंचायत जैसे इलाकों में भी ऐसी ही घटनाएं दर्ज की गई हैं। हालांकि, मोहनगढ़ में देखी गई तीव्रता अभूतपूर्व थी।
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ऑस्ट्रेलिया और अफ़्रीका के रेगिस्तानी इलाकों में भी दिखी 'आर्टेसियन स्थिति'
'आर्टेसियन स्थिति' यह घटना सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है; इसे ऑस्ट्रेलिया और अफ़्रीका के रेगिस्तानी इलाकों में भी देखा गया है। इस घटना को प्राचीन ग्रंथों में वर्णित सरस्वती नदी से जोड़ने की कुछ अटकलों के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि यह पानी लाखों साल पुराना है और इसका राजस्थान के रेगिस्तान में बहने वाली सरस्वती समेत अन्य किसी नदी प्रणाली से कोई संबंध नहीं है।
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Jaisalmer Water News: जैसलमेर के मोहनगढ़ में पानी वाली घटना कैसे हुई?
राजस्थान में भारत पाकिस्तान सीमा पर स्थित जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ में भाजपा मंडल अध्यक्ष व किसान विक्रम सिंह भाटी अपने खेत पर बोरवेल खुदवा रहे थे। करीब 850 फीट गहराई तक खुदाई की जा चुकी थी। 28 दिसंबर 2025 को बोरवेल से पाइप वापस निकालते समय अचानक पानी का तेज बहाव आया और उसके मिट्टी व गैर-ज्वलनशील गैस भी थी। पानी इतना ज्यादा था कि विक्रम सिंह ही नहीं बल्कि आस-पास के किसानों के खेत भी तालाब बन गए।
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Jaisalmer Water VIDEO: जैसलमेर की जमीन से निकला पानी 72 घंटे बाद अपने आप बंंद हो गया
जैसलमेर के मोहनगढ़ में बोरवेल से पानी निकलने के दौरान इतना भी समय नहीं मिला कि बोरवेल खुदाई में लगा ट्रक व बोरिंग मशीन को वहां से हटाया जा सके। 72 घंटे बाद पानी निकलना अपने आप बंद हो गया। करीब 22 टन वजनी मशीन व ट्रक पानी के उस खड्डे में समा गए। खेतों में पानी व मिट्टी जमा हो गई। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। जैसलमेर जिला प्रशासन ने लोगों को घटनास्थल के नजदीक जाने से मना किया है।
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Jaisalmer Water ONGC Report: जैसलमेर के पानी से नहीं निकाले ट्रक व मशीन-ओएनजीसी
जैसलमेर की धरती से अचानक पानी का फव्वारा फूटने पर जैसलमेर जिला प्रशासन, वरिष्ठ जल-भूविज्ञानी डॉ. नारायण दास इनाखिया और गुजरात के बड़ोदा से ओएनजीसी की टीम मौके पर पहुंची। प्रशासन ने लोगों को घटनास्थल से सतर्क रहने के निर्देश दिए। इनाखिया व 31 दिसंबर 2024 को आई ओएनजीसी की टीम ने मिट्टी व पानी की जांच करके रिपोर्ट जैसलमेर जिला कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत को सौंपी। रिपोर्ट में यह चेताया गया कि हो सकता है कि जमीन से मिट्टी व पानी का रिसाव ट्रक व बोरिंग मशीन के दबाव की वजह से बंद हुआ है। अगर इन्हें वापस निकाला गया तो यह नए खतरे को न्योता देना जैसा है।
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Jaisalmer Water Tethys Sea: क्या जैसलमेर का पानी 25 करोड़ साल पुराने टेथिस सागर का था?
जैसलमेर के मोहनगढ़ में बोरवेल खुदाई के दौरान अचानक निकले पानी को (250 मिलियन) 25 करोड़ साल पुराने टेथिस सागर से जुड़ा जा रहा है। कहा जा रहा है कि जैसलमेर वाला यह पानी करीब 60 लाख साल पुराना है। इस खारे पानी का टीडीएस करीब 5 हजार के आस-पास है। हालांकि समुद्र के पानी का टीडीएस इससे भी ज्यादा होता है, मगर जैसलमेर में निकले रहस्यमयी पानी में खनिज लवणों का मिश्रण होने से उसका टीडीएस पांच हजार रहा है।
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Jaisalmer Water Dinosaur: जैसलमेर में किसी जमाने में रहते थे डायनासोर?
जैसलमेर में जिस जगह बोरवेल खुदाई के दौरान अचानक पानी, मिट्टी और गैर-ज्वलनशील गैस निकली, वहां किसी जमाने में डायनासोर का राज हुआ करता था। वैज्ञानिक दावा करते हैं कि यह इलाका 25 करोड़ साल पहले टेथिस सागर का तट हुआ करता था। जैसलमेर के एक तरफ डायनासोर रहते थे और दूसरी ओर था टेथिस सागर का तट।
IIT रुड़की और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम ने जैसलमेर जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर जेठवाई क्षेत्र में 16.7 करोड़ साल पुराना शाकाहारी डायनासोर का जीवाश्म भी मिल चुका है। साल 2014 और 2016 में जैसलमेर के गांव जेठवाई और थैयात के रेगिस्तान में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के वैज्ञानिक देबाशीष भट्टाचार्य, कृष्ण कुमार, प्रज्ञा पांडे और त्रिपर्णा घोष की टीम द्वारा खोजे गए जीवाश्म की सुनील बाजपेयी और देबाजित दत्ता ने उन जीवाश्म की आईआईटी रुड़की रिसर्च सेंटर में जांच के बाद अगस्त 2023 में यह नतीजा निकला कि यह जीवाश्म दुनिया के सबसे पुराने शाकाहारी डायनासोर के हैं।
jaisalmer water Desert: जैसलमेर में टेथिस सागर कैसे बन गया रेगिस्तान?
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में डॉ रविंद्र कुमार बुडानिया आचार्य भूगोल राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू कहते हैं कि जैसलमेर बाड़मेर तथा इसके आसपास का थार मरुस्थल का संपूर्ण क्षेत्र मध्य जीवी युग में टेथिस सागर के रूप में स्थित था। यूरेशियन तथा भारतीय प्लेट में उत्पन्न संपीडनात्मक बल के कारण इस स्थान पर गर्त का निर्माण हुआ, जहां कई सालों तक नदियां बहती थीं। इन्हीं नदियों के अवसाद के जमाव के कारण यह एक मैदान बना और बाद में हुए जलवायु परिवर्तनों के कारण यह एक मरुस्थल बन गया।
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