ईरान के नए सुप्रीम लीडर पर फिदा हुए ट्रंप! मोजतबा खामेनेई को लेकर दिया ऐसा बयान कि हिल गई पूरी दुनिया

Donald Trump Mojtaba Khamenei statement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि मोजतबा अपने पिता से "ज्यादा समझदार" हैं और न्यूक्लियर डील को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम, प्रतिबंधों और यूरेनियम स्टॉकपाइल को लेकर बातचीत जारी है। ट्रंप के इस बयान ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन नई ईरानी लीडरशिप के साथ बातचीत की संभावना को खुला रखना चाहता है।

Donald Trump Mojtaba Khamenei statement

ट्रंप ने मोजतबा को 'ज्यादा समझदार' क्यों बताया?

ट्रंप का मानना है कि मोजतबा खामेनेई मौजूदा हालात को बेहतर तरीके से समझते हैं और टकराव की जगह बातचीत का रास्ता चुन सकते हैं। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मोजतबा डील को लेकर प्रैक्टिकल सोच रखते हैं। अमेरिका को उम्मीद है कि नई लीडरशिप ईरान को ऐसी पोजिशन में ला सकती है जहां न्यूक्लियर विवाद का समाधान निकल सके। ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर ईरान के साथ भविष्य की बातचीत को ध्यान में रखकर देखा जा रहा है।

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क्या न्यूक्लियर डील में मोजतबा की बड़ी भूमिका है?

ट्रंप ने साफ कहा कि किसी भी संभावित न्यूक्लियर डील के अप्रूवल प्रोसेस में मोजतबा खामेनेई शामिल हैं। इसका मतलब है कि ईरान की रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी बड़ी नीतियों में उनकी मजबूत पकड़ है। अमेरिका समझता है कि अंतिम फैसला लेने वालों में मोजतबा की अहम भूमिका होगी। यही वजह है कि ट्रंप ने उनके लिए सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल किया और संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह सीधे बातचीत के लिए भी तैयार हैं।

ट्रंप की नजर में सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति का मुख्य फोकस ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम है। ट्रंप ने कहा कि वह केवल न्यूक्लियर हथियार बनाने पर रोक नहीं चाहते, बल्कि ईरान किसी भी तरीके से ऐसा हथियार खरीद या हासिल भी न कर सके। उनके मुताबिक नई डील में ऐसे सभी विकल्पों को बंद करने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप का दावा है कि ईरान इस मामले में पहले से ज्यादा लचीला रुख दिखा रहा है, जिससे समझौते की संभावना बनी हुई है।

यूरेनियम को लेकर अमेरिका की क्या योजना है?

ट्रंप ने दो संभावित रास्तों का जिक्र किया। पहला, अगर डील हो जाती है तो अमेरिका और ईरान मिलकर हाई एनरिच्ड यूरेनियम को हटाकर नष्ट करेंगे। दूसरा, अगर बातचीत फेल होती है तो अमेरिका पहले ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करेगा और उसके बाद यूरेनियम स्टॉकपाइल को अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश करेगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैटेलाइट लगातार ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर नजर रख रहे हैं।

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क्या अमेरिका-ईरान रिश्तों में नरमी के संकेत हैं?

ट्रंप के बयान को पूरी तरह दोस्ताना नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसमें बातचीत के संकेत जरूर दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान "अच्छा व्यवहार" करता है तो प्रतिबंधों और फ्रीज संपत्तियों पर आगे चर्चा हो सकती है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि किसी शुरुआती डील से पहले ईरानी संपत्तियां अनफ्रीज नहीं की जाएंगी। ऐसे में ट्रंप की रणनीति दबाव और बातचीत, दोनों को साथ लेकर चलने की दिखाई देती है, जिसमें मोजतबा खामेनेई को एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

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