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Jaisalmer Water: वो 6 करोड़ साल पुराना पानी या सरस्वती नदी? जैसलमेर की ज़मीन से निकली सच्चाई चौंका देगी!

Jaisalmer Water: राजस्थान के जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ इलाके में 27 दिसंबर 2024 को किसान विक्रम सिंह भाटी के खेत में नलकूप खुदाई के दौरान अचानक जमीन से पानी का तेज फव्वारा फूट पड़ा था। इस हादसे में खुदाई कर रही लोरिंग मशीन और ट्रक पानी में समा गए थे। आज, 18 मई 2025 तक भी वह ट्रक बाहर नहीं निकाला जा सका है। हालांकि रहस्‍यमयी पानी निकलना बंद हो चुका है।

Jaisalmer Water News:पानी का रहस्य आज भी बरकरार

इस घटना के कई महीनों बाद भी जमीन से निकले पानी का रहस्य सुलझ नहीं पाया है। ट्रक अब भी पानी के नीचे दबा हुआ है। वहीं, अब इस स्थान पर सरस्वती नदी के संभावित प्राचीन मार्ग को लेकर नया शोध कार्य शुरू किया जाएगा। किसान विक्रम सिंह भाटी ने मौजूदा हालात को लेकर अपनी पीड़ा साझा की है।

Jaisalmer Water

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Jaisalmer Farmer: किसान की जुबानी पूरा घटनाक्रम

वनइंडिया हिंदी से बातचीत में विक्रम सिंह भाटी ने बताया कि पिछले साल नलकूप की खुदाई के दौरान जमीन से अचानक अत्यधिक मात्रा में पानी निकलने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई अब तक नहीं हो पाई। पानी के गड्ढे में ट्रक अब भी समाया हुआ है।

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विक्रम सिंह ने बताया कि पानी के साथ-साथ अथाह मिट्टी (मलबा) भी निकली थी, जो पूरे खेत में करीब चार-पांच फीट तक जमा हो गई है। इसकी वजह से जमीन अब खेती लायक नहीं रह गई है और पूरा खेत बर्बाद हो गया है।

खेती पर पड़ा असर, परिवार पर दोहरी मार

विक्रम सिंह ने बताया कि घटना से पहले उन्होंने 20 बीघा में मूंगफली की बुवाई की तैयारी की थी, लेकिन अब खेत पूरी तरह से बंजर हो चुका है। इससे उनके परिवार पर दोहरी आर्थिक मार पड़ी है। घटना के समय खेत में जीरे की फसल बोई हुई थी, जो पूरी तरह नष्ट हो गई।

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उनका आरोप है कि, "जिला प्रशासन ने पानी के गड्ढे में दफन ट्रक को निकालने पर पाबंदी लगा दी थी, जो अब तक हटाई नहीं गई है। हमने कई बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मंत्री और जिला कलेक्टर से गुहार लगाई, मगर अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।"

क्या होगा अब उस स्थान पर रिसर्च?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां से पानी का फव्वारा फूटा था, वहां अब राजस्थान के रेगिस्तान में विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के प्राचीन मार्ग (पैलिया चैनल) को तलाशने का काम होगा। यह शोध कार्य डेनमार्क सरकार के विशेषज्ञों और केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) के वैज्ञानिकों द्वारा किया जाएगा।

jaisalmer tethys sea: टेथिस सागर का 6 करोड़ साल पुराना पानी!

जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में, भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास स्थित 27 बीडी के 3 जोरा माइनर पर यह घटना हुई थी। भूजल वैज्ञानिक नारायण इनखिया ने बताया था कि उस समय पानी के नमूने लिए गए थे और जांच में यह अनुमान लगाया गया कि यह पानी करीब 6 करोड़ साल पुराना हो सकता है, क्योंकि पानी का टीडीएस 500 से अधिक था।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पानी वैदिक काल की सरस्वती नदी का नहीं हो सकता, क्योंकि सरस्वती नदी के प्रमाण करीब 5 हजार साल पुराने माने जाते हैं, जबकि यह पानी उससे कहीं ज्यादा पुराना यानी संभवतः टेथिस सागर से संबंधित हो सकता है, जो उस काल में इस क्षेत्र में मौजूद था।

बोरिंग मशीन भी समा गई, बहनोई की कमाई का जरिया खत्म

इस हादसे में जो लोरिंग मशीन पानी में समा गई, वह किसान विक्रम सिंह के बहनोई तगसिंह की थी। करीब 200 टन वजनी यह मशीन उनका परिवार का एकमात्र कमाई का जरिया थी। तगसिंह ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में उन्होंने मोहनगढ़ और नाचना नहर क्षेत्र में सैकड़ों ट्यूबवेल की खुदाई की है, लेकिन ऐसी घटना उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।

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