Jaisalmer Water: जैसलमेर पानी की घटना के 1 माह बाद सता रहा यह नया डर, मालिक जान देने को क्यों तैयार?
Jaisalmer Water: राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर के मोहनगढ़ के 27 बीडी चक 3 जोरावाला में किसान विक्रम सिंह भाटी के खेत में 28 दिसंबर 2024 को बोरवेल खुदाई के दौरान जमीन से अचानक रहस्यमयी पानी निकलने की घटना को एक माह बीते जाने के बाद अब नया डर सता रहा है, जिसकी वजह से खेत मालिक भाटी अपनी जान की बाजी लगाने तक को तैयार हैं।
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में विक्रम सिंह भाटी ने बताया कि उनके खेत में बोरवेल खुदाई में भूगर्भ से पानी का फव्वारा फूटने और पूरे खेत में तीन-चार फीट तक पानी व मिट्टी जमा होने के बाद अब स्थिति सामान्य होती जा रही है। पानी सूख चुका है। हालांकि मिट्टी अभी भी जमा है। जहां से अचानक अथाह पानी निकला था। वहां 40 से 45 फीट चौड़ा गड्ढा हो चुका है, जिसमें बोरवेल खोद रही लोरिंग मशीन और ट्रक अभी भी गिरे हुए हैं।

विक्रम सिंह भाटी के अनुसार बोरवेल के पास बने गड्ढे में भी पानी सूख गया। ट्रक और मशीन बोरवेल के सुराग से दूर पड़े हैं। वो भी अब पानी में नहीं हैं। पहले तो उन पर पानी आर मलबा चढ़ गया था। ट्रक व मशीन साफ-साफ दिखाई देने लगे हैं। उन्हें बाहर निकालने चाहते हैं, मगर सबसे बड़ी समस्या जैसलमेर जिला प्रशासन की चेतावनी है, जिसकी वजह से ट्रक व मशीन को नहीं निकाल पा रहे हैं।

Jaisalmer Water News: जैसलमेर की जमीन से निकला था 25 करोड़ साल टेथिस सागर का पानी
दरअसल, जैसलमेर की इस जमीन से 25 करोड़ साल टेथिस सागर का पानी निकलने की इस घटना की जांच करने के लिए भूजल वैज्ञानिक व ओएनजीसी की क्राइसेस मैनेजमेंट टीम मौके पर आई। ओएनजीसी टीम के जीएम ए एन्न गठोरिया व डीजीएम बिनोद ओरान ने जांच रिपोर्ट जैसलमेर कलेक्टर को सौंपी, जिसमें यह अंदेशा जताया कि बोरवेल के गड्ढे में दफन ट्रक व मशीन को बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए, क्योंकि संभवतया गड्ढे से पानी, गैस व मिट्टी निकलना ट्रक व मशीन के प्रेशर की वजह से बंद हुआ है। अब ट्रक-मशीन को वापस निकाला गया तो फिर से पहले जैसा मंजर देखने को मिल सकता है।

Jaisalmer Water Photo: सरपंच करताराम का आया फोन, बोले-डीएम के आदेश की पालना करना होगी
विक्रम सिंह भाटी ने बताया कि उनके पास दो-तीन पहले सरपंच किरताराम व ग्राम सेवक फोन आया है। उन्होंने कहा कि जैसलमेर जिला कलेक्टर के 9 तारीख के आदेश की पालना में अब ट्रक व मशीन को बोरवेल के गड्ढे में मिट्टी डालकर दफन करना होगा। इस पर भाटी का तर्क है कि ट्रक व मशीन उनके बहनोई के हैं, जिनके पास कमाई का ये इकलौता जरिया है। प्रशासन पहले प्राकतिक आपदा का मुआवजा दिलाएं, वरना इन्हें हम अपने स्तर पर बाहर निकाल लेंगे। दफन नहीं होने देंगे।

Jaisalmer Water Update: विक्रम सिंह भाटी बन गए हार्ट पेशेंट
विक्रम सिंह भाटी कहते हैं कि जैसलमेर जिला प्रशासन उन्हें गड्ढे से ट्रक व मशीन नहीं निकालने देगा या फिर इन्हें बिना मुआवजा दिए दफन कर दिया तो भूख हड़ताल पर चला जाऊंगा। प्राण देने पड़े तो भी पीछे नहीं हटूंगा। इस प्राकृतिक आपदा के कारण पूरा खेत खराब हो गया। 734 फीट गहरे बोरवेल में पाइप दफन हो गए। बहनोई के ट्रक-मशीन भी गड्ढे में पड़े हैं। पूरे प्रकरण की चिंता ने हार्ट पेशेंट बना दिया। अहमदाबाद से इलाज चल रहा है। अब या तो मुआवजा लूंगा या फिर ट्रक-मशीन वापस निकालकर बहनोई को हुए नुकसान की भरपाई करूंगा।

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