Jaguar Fighter Jet: क्या 40 साल पुराना था चूरू में क्रैश हुआ जगुआर फाइटर जेट? हादसे की असली वजह क्या?
Jaguar Fighter Jet Churu Rajasthan: राजस्थान के चूरू जिले की रतनगढ़ तहसील के गांव भानुदा में भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान जगुआर 9 जुलाई 2025 की दोपहर करीब 1:25 बजे क्रैश हो गया। यह दो सीटों वाला जगुआर फाइटर जेट श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ान भरकर निकला था।
विमान हादसे की सूचना मिलते ही चूरू के जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा मौके के लिए रवाना हुए और राहत एवं बचाव कार्य शुरू करवा दिए गए। जेट के दोनों पायलट शहीद हो गए हैं। भारतीय वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (आंतरिक जांच) के आदेश दिए हैं।

भारतीय वायुसेना का आधिकारिक बयान
"एक नियमित प्रशिक्षण मिशन के दौरान भारतीय वायुसेना का एक जगुआर ट्रेनर विमान आज राजस्थान के चूरू के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में दोनों पायलटों को जानलेवा गंभीर चोटें आईं। अन्य किसी नागरिक संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ है। भारतीय वायुसेना गहरी संवेदना प्रकट करती है और इस दुखद घड़ी में शोकसंतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। हादसे के कारणों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित कर दी गई है।"
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चूरू में क्रैश हुआ यह फाइटर जेट करीब 40 साल पुराना था। यह विमान भारतीय वायुसेना के सूरतगढ़ बेस से नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद यह जेट चूरू जिले के भानुदा गांव के एक खेत में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जेट का मलबा दूर-दूर तक फैल गया और पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार छा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान आसमान में असंतुलित हो गया था और नीचे गिरते समय आग का गोला बन गया था।
Churu Jaguar Fighter Jet Crash Reason: हादसे की असली वजह क्या?
वायुसेना के जगुआर विमान के क्रैश की पुख्ता वजह अब तक सामने नहीं आई है, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी खराबी, पायलट की मानवीय भूल या पक्षी से टकराव को संभावित कारण माना जा रहा है।
हालांकि, सही कारणों का पता भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय की संयुक्त जांच के बाद ही चलेगा। टीमें दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे और ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) का विश्लेषण करेंगी।

जगुआर विमान कब बना और किसने बनाया?
साल 1970 में फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर सेपेकैट जगुआर (SEPECAT Jaguar) नामक इस लड़ाकू विमान का निर्माण किया था। वर्ष 1979 में यह विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हुआ।

जगुआर एक ट्विन-सीटर फाइटर जेट है, यानी इसमें दो पायलट बैठ सकते हैं। उम्र के लिहाज से ये विमान 40 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं। बीते दशकों में तकनीक काफी आधुनिक हो चुकी है, जिसके चलते जगुआर को अपग्रेड करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
ताकत और विशेषताएं
जगुआर फाइटर जेट को मुख्य रूप से जमीन पर हमला करने और हवाई रक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय वायुसेना में इसे डीप पेनेट्रेशन स्ट्राइक और टोही मिशनों के लिए तैनात किया गया है।
सूरतगढ़ एयरबेस जैसे रणनीतिक स्थानों से अक्सर ये विमान नियमित उड़ानें भरते हैं। जगुआर 46,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और सिर्फ डेढ़ मिनट में 30,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने में सक्षम है। ये विमान केवल 600 मीटर के छोटे रनवे से भी टेकऑफ और लैंडिंग कर सकते हैं।
भारत में जगुआर का निर्माण और रखरखाव हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया जाता है। इसमें सिंगल और ट्विन-सीटर जैसे कई वेरिएंट्स शामिल हैं।

Jaguar crash incidents in India: भारत में जगुआर क्रैश की घटनाएं
भारतीय वायुसेना के लिए जगुआर विमानों का लगातार क्रैश होना चिंता का विषय बना हुआ है। साल 2025 में ही यह तीसरी बार है जब जगुआर क्रैश हुआ है।
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मार्च 2025 में हरियाणा के अंबाला एयरबेस से उड़ान भरने के बाद एक जगुआर विमान क्रैश हुआ था।
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अप्रैल 2025 में गुजरात के जामनगर के पास सुवर्डा गांव में ऐसा ही एक और हादसा हुआ था।
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और अब जुलाई 2025 में चूरू में तीसरा हादसा सामने आया है।
लगातार हो रही इन दुर्घटनाओं से वायुसेना के जगुआर बेड़े की सेफ्टी और टेक्नोलॉजिकल अपग्रेड को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।












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