Iran Attack Kuwait Airbase: ट्रंप की डील से ठीक पहले ईरान का कुवैत में बड़ा अटैक, कई अमेरिकी सैनिक घायल

Iran Attack Kuwait Airbase: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा तेज है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और कहानी बता रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत स्थित अमेरिकी अली अल सलेम एयरबेस के पास ईरानी फतेह-110 बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा गिरने से कई अमेरिकी कर्मी घायल हो गए और करोड़ों डॉलर के MQ-9 रीपर ड्रोन को नुकसान पहुंचा।

यह घटना ऐसे समय हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक संभावित डील पर अंतिम फैसला लेने की तैयारी कर रहे थे। सवाल यह है कि अगर बातचीत आगे बढ़ रही है, तो फिर मिसाइल और हमलों का सिलसिला क्यों जारी है?

Iran Attack Kuwait Airbase

ट्रंप की डील मीटिंग से पहले बड़ा झटका

व्हाइट हाउस में ईरान को लेकर हाई लेवल मीटिंग चल रही थी और माना जा रहा था कि ट्रंप जल्द किसी शुरुआती समझौते पर फैसला ले सकते हैं। इसी बीच कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने के पास मिसाइल से जुड़ी घटना सामने आ गई। इससे बातचीत का माहौल और जटिल हो सकता है। अमेरिका के लिए यह सिर्फ एक सुरक्षा चुनौती नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव का मामला भी बन गया है। अब ट्रंप प्रशासन को डील और सुरक्षा, दोनों मोर्चों पर फैसला लेना होगा।

मिसाइल का मलबा गिरा, US ड्रोन हुए तबाह

रिपोर्ट के अनुसार ईरान की फतेह-110 बैलिस्टिक मिसाइल को कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में इंटरसेप्ट कर लिया था। लेकिन उसके मलबे ने अमेरिकी बेस को नुकसान पहुंचाया। इस घटना में एक MQ-9 रीपर ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गया जबकि दूसरा गंभीर रूप से डैमेज हुआ। MQ-9 रीपर अमेरिका का एडवांस सर्विलांस और स्ट्राइक ड्रोन माना जाता है। इसकी कीमत करीब 3 करोड़ डॉलर बताई जाती है। ऐसे में यह नुकसान सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक भी है।

ये भी पढे़ं: Iran Vs America: एक तरफ अमेरिका-ईरान का समझौता, दूसरी तरफ लेबनान में तबाही, हर 24 घंटे में 11 बच्चों की मौत

सीजफायर के बावजूद क्यों जारी हैं हमले?

अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल से एक नाजुक सीजफायर लागू बताया जा रहा है। इसके बावजूद दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने के आरोप लगा रहे हैं। गुरुवार को भी दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। ताजा घटना ने दिखा दिया है कि कागजों पर मौजूद सीजफायर और जमीन पर मौजूद हालात में बड़ा अंतर है। क्षेत्र में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और किसी भी समय स्थिति फिर बिगड़ सकती है।

अली अल सलेम एयरबेस इतना अहम क्यों?

कुवैत का अली अल सलेम एयरबेस खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक माना जाता है। यहां से निगरानी मिशन, एयर ऑपरेशन और क्षेत्रीय सुरक्षा गतिविधियां संचालित की जाती हैं। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने में इस बेस की बड़ी भूमिका है। यही वजह है कि यहां हुआ कोई भी हमला या नुकसान सीधे अमेरिकी रणनीति और सुरक्षा से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस घटना को वॉशिंगटन में गंभीरता से देखा जा रहा है।

ये भी पढे़ं: Iran America War: ईरान से जंग में बर्बाद अमेरिका! महंगाई-बेरोजगारी ने तोड़ा रिकॉर्ड, जाएगी ट्रंप की सत्ता?

क्या खतरे में पड़ सकती है अमेरिका-ईरान डील?

ट्रंप प्रशासन लंबे समय से ईरान के साथ किसी बड़े समझौते की संभावना तलाश रहा है। लेकिन कुवैत की यह घटना बातचीत को मुश्किल बना सकती है। अमेरिका के अंदर भी ऐसे लोग हैं जो ईरान पर भरोसा करने के खिलाफ हैं। दूसरी ओर ईरान अपने सुरक्षा हितों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं दिखता। ऐसे में यह हमला डील के रास्ते में नई बाधा बन सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों देश बातचीत आगे बढ़ाते हैं या तनाव एक बार फिर बढ़ता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+