Pak के मददगार Turkiye की कनपटी पर तैनात होगी BrahMos मिसाइल, साइप्रस को क्या-क्या देगा भारत?
India Cyprus Relation: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान (Pakistan) की मदद करने वाला तुर्किये (Turkiye) अब भारत की तरफ से डर महसूस कर रहा है। दरअसल साइप्रस (Cyprus) भारत में बनने वाली शानदार मिसालइ ब्रह्मोस (BrahMos) अपने यहां तैनात करवा सकता है। पिछले एक साल के दौरान भारत और साइप्रस के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है। इतना ही नहीं, इसी महीने दोनों देशों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए पांच साल का विस्तृत रोडमैप भी जारी किया है। और इसी को लेकर तुर्किये के पसीने छूट रहे हैं।
नॉर्दन साइप्रस पर तुर्किये का अवैध कब्जा
दरअसल तुर्किये सालों से चले आ रहे दबाव और असुरक्षा के कारण साइप्रस भारत के और करीब आया है। इतिहास में झांके तो, तुर्किये ने 1974 से साइप्रस के उत्तरी हिस्से के लगभग एक-तिहाई क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है, जिसे वह नॉर्दर्न साइप्रस कहता है। यह मुद्दा दशकों से दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। दूसरी तरफ भारत भी हाल के सालों में तुर्किये और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को लेकर सतर्क रहा है। यही वजह है कि भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

साइप्रस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से बढ़ी साझेदारी
इस महीने की शुरुआत में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी तक अपग्रेड किया। साथ ही रक्षा सहयोग के लिए अगले पांच साल का रोडमैप भी जारी किया गया। माना जा रहा है कि इसी रोडमैप के तहत साइप्रस अब भारत से बड़े हथियार खरीदकर तुर्किये की दादागीरी को झटका देना चाहता है।
कौन-कौन से भारतीय हथियार खरीद सकता है साइप्रस?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साइप्रस भारत से कई मिलिट्री इक्विपमेंट्स खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है। इनमें ऐसे हथियार और प्लेटफॉर्म शामिल हैं जिनका प्रदर्शन हाल के युद्धों में देखा जा चुका है। इस संभावित खरीद लिस्ट में कुछ खास हथियार शामिल हो सकते हैं, जैसे-
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ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
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नागास्त्र-1 (Nagastra-1) लुटरिंग म्यूनिशन ड्रोन
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स्काईस्ट्राइकर (SkyStriker) आत्मघाती ड्रोन
रिपोर्ट के मुताबिक, साइप्रस विशेष रूप से ड्रोन और मिसाइल सिस्टम में रुचि दिखा रहा है, जिन्हें आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी माना जाता है।
तुर्किये और पाकिस्तान की बढ़ती साझेदारी भी बनी वजह
पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के युद्ध के दौरान तुर्किये ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन और अन्य मिलिट्री टेक्नोलॉजी दी थी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उसने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया। दूसरी ओर, साइप्रस लंबे समय से तुर्किये के सैन्य दबाव और क्षेत्रीय दावों का सामना कर रहा है। ऐसे में तुर्किये दोनों देशों के लिए एक साझा रणनीतिक चिंता बन गया है।
भारत और साइप्रस के बीच तुर्किये पर भी हुई चर्चा
राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने तुर्किये के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा चुनौतियों पर भी चर्चा की। शीर्ष साइप्रस अधिकारियों के अनुसार, इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच समान चिंताएं मौजूद हैं और इसी वजह से सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
तुर्किये ने जताई चिंता
तुर्किये में सरकार की ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल ज्यादा सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कुछ प्रभावशाली सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने सोशल मीडिया पर चिंता जताई है। सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ रऊफ कोसे ने कहा कि साइप्रस को भारतीय मिसाइलें खरीदने से रोका जाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि क्षेत्र में हथियारों की होड़ बढ़ती है, तो तुर्किये को भविष्य में स्ट्राइक जैसे विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है।
भारत-इजरायल-साइप्रस गठजोड़ का दावा
रऊफ कोसे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक अन्य पोस्ट में दावा किया कि भारत और इजरायल मिलकर साइप्रस को हथियारबंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तुर्किये को अपने "भाईचारे वाले देश" पाकिस्तान को और ज्यादा समर्थन देना चाहिए। उनके मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्किये को मिलकर भारत और साइप्रस के बढ़ते सहयोग का मुकाबला करना चाहिए। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं और इस संबंध में कोई आधिकारिक सरकारी बयान सामने नहीं आया है।
कई नए समझौतों पर हुए हस्ताक्षर
भारत और साइप्रस ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में Joint Working Groups बनाने के लिए समझौता MoUs पर भी साइन किए, जैसे-
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आतंकवाद विरोधी सहयोग
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डिप्लोमेट्स की ट्रेनिंग
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इनोवेशन और टेक्नोलॉजी
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रिसर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेश
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Higher Education and Research
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Culture Exchange
कुल मिलाकर, भारत और साइप्रस के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में तुर्किये को कड़ी टक्कर दे सकता है।
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