राजस्‍थान बॉर्डर पर 'डिफेंस सिस्‍टम' जैसा है तनोट माता का चमत्‍कार, मंदिर में गिरे पाक के 450 बम फटे ही नहीं

India Pakistan War Rajasthan Border: भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 8-9 मई 2025 की रात राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की ओर से भारी गोलाबारी की गई। मिसाइल दागी गईं, जिन्‍हें भारतीय एयर डिफेंस सिस्‍टम एस-400 ने हवा में ही नष्‍ट कर दिया था। जैसलमेर में तनोट माता के चमत्‍कार भी डिफेंस सिस्‍टम सरीखे हैं।

जैसलमेर सरदह पर बढ़ते तनाव को देखते हुए 9 मई को शाम 6 बजे से बाजार पूरी तरह बंद और सुबह छह बजे तक पूर्ण ब्‍लैकआउट की गाइडलाइन जारी की गई है। बॉर्डर पार से हमलों के बीच एक बार फिर आस्था का केंद्र रहा श्री तनोट राय माता मंदिर (Shri Tanot Mata Mandir Trust) सुर्खियों में आ गया है।

Tanot Mata Temple Jaisalmer

भारत पाक सीमा पर राजस्‍थान के आखिरी गांव तनोट में माता का यह मंदिर साल 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में अपने अद्भुत चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। Shritanot Mata Mandir Trust की वेबसाइट के अनुसार 1965 के युद्ध में पाकिस्तान की ओर से श्री तनोट माता परिसर के आस-पास लगभग 3,000 बम गिराए गए थे, उनमें से 450 बम मंदिर परिसर में गिरे थे। उन 450 में से एक भी बम श्री तनोट राय माता मंदिर परिसर में फटा नहीं था। मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रहा, जबकि चारों ओर भारी तबाही हुई। कई जिंदा बम (अविस्फोटित बम) आज भी तनोट माता मंदिर परिसर में रखे हुए हैं।

तनोट माता की पूजा करते हैं भारतीय सैनिक

भारत-पाकिस्‍तान जंग में बम नहीं फटने के चमत्कार के बाद से श्री तनोट राय माता को सेना और विशेष रूप से सीमा सुरक्षा बल के जवानों की आराध्य देवी माना जाता है। तनोट के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि सैनिकों के लिए आत्मबल का भी स्रोत है। वर्तमान में मंदिर की देखरेख ऑपरेशन तनोट राय और घंटियाली माता ट्रस्ट द्वारा की जाती है, जिसमें BSF की सक्रिय भूमिका है। मंदिर की पूजा-पाठ और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सीमा सुरक्षा बल के जवानों के हाथों में है।

इतिहास फिर से दोहराने की उम्मीद

जैसलमेर के लोग और सैनिक आशा करते हैं कि 1965 और 1971 जैसा चमत्कार एक बार फिर घटित होगा। वैसी ही माता की कृपा इस बार भी देश की सीमाओं की रक्षा करेगी। तनोट माता मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि देशभक्ति और सुरक्षा का भी प्रतीक है। माता का आशीर्वाद सदा हमारे जवानों के साथ है। तनोट क्षेत्र में हमलों के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। BSF और सेना की टुकड़ियाँ हाई अलर्ट पर हैं। मंदिर परिसर की निगरानी ड्रोन और कैमरों से की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।

श्री तनोट माता मंदिर का इतिहास

श्री तनोट राय मंदिर की स्थापना 9वीं सदी में राजा तंबूल राव द्वारा की गई थी। राजस्थान में थार रेगिस्तान की तपती रेत के बीचोंबीच स्थित श्री तनोट माता मंदिर न केवल एक पौराणिक धार्मिक स्थल है, बल्कि भारत की सैन्य गौरवगाथा का प्रतीक भी बन चुका है। यह मंदिर हिंगलाज माता के एक रूप तनोट राय माता को समर्पित है और इसकी स्थापना कई शताब्दियों पूर्व स्थानीय जनजातियों द्वारा की गई थी।

किंवदंतियों के अनुसार, आदिकाल में इस क्षेत्र की स्थानीय जनजातियाँ तनोट राय माता को अपनी कुलदेवी मानती थीं और उनके आशीर्वाद के लिए यह मंदिर स्थापित किया गया। समय के साथ यह मंदिर राजस्थान और देशभर के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

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