Chunavi Kisse: नाथूराम मिर्धा AIIMS में भर्ती थे, जनता को अस्पताल से ही चिट्ठी भेज रिकॉर्ड तोड़ वोटों से जीते
Chunav Kisse Nagaur lok Sabha Seat: राजस्थान में नागौर लोकसभा सीट का चुनावी किस्सा बड़ा रोचक है, जो लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा उम्मीदवार डॉ. ज्योति मिर्धा के दादा नाथूराम मिर्धा से जुड़ा है।
नागौर सीट मिर्धा परिवार का गढ़ रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगा लिजिए एक बार चुनाव में नाथूराम मिर्धा बीमारी की वजह से एम्स में भर्ती थे। उन्होंने अस्पताल से जनता को पत्र भेजा और चुनाव रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत लिया।

दरअसल, नागौर सीट ने पहले आम चुनाव से लेकर एक उपचुनाव समेत अब तक 18 सांसद दिल्ली भेजे हैं। पांचवें चुनाव से लेकर अब तक 9 बार मिर्धा परिवारों के सदस्य चुनाव जीतते रहे हैं। इनमें अकेले नाथूराम मिर्धा ने 6 चुनाव जीते हैं।
साल 1996 का चुनावी किस्सा तो नागौर में खासा चर्चित है। उस समय नाथूराम मिर्धा काफी बीमार थे। उनको एम्स दिल्ली में भर्ती करवाया गया था। नागौर की जनता पर उनकी पकड़ ऐसी थी कि चुनाव में प्रचार करने जनता के बीच नहीं जाने के बावजूद जीत गए थे।
हुआ यह था कि मिर्धा अस्पताल में भर्ती थे तब उनके कार्यकर्ता अस्पताल से उनसे पत्र लिखवाकर जनता के बीच लाकर पढ़ दिया करता था। वे पत्र के जरिए लोगों से वोट देने की अपील करते थे। लोगों के बीच नाथूराम मिर्धा बाबा के नाम से भी मशहूर थे। उस साल वे चुनाव जीत गए थे। इसके बाद उनका निधन होने पर उपचुनाव में उनके बेटे भानुप्रकाश मिर्धा ने जीता था।
कहा जाता है कि साल 1977 में जब देशभर में कांग्रेस के खिलाफ लहर थी तब उत्तर भारत की एकमात्र सीट नागौर थी, जहां से कांग्रेस के मिर्धा जीते थे। 1996 के उपचुनाव में बेटे भानुप्रकाश मिर्धा को सहानुभूति वोट खूब मिले थे। उस समय नारा चला था कि भानु को जिता दो। इसकी जीत बाबा के लिए थेपड़ी होगी।
नागौर सीट से साल 2009 में जनता ने नाथूराम मिर्धा की पोती डॉ. ज्योमि मिर्धा सांसद चुना था। नागौर में लाडनूं, डीडवाना, जायल, नागौर, खींवसर, मकराना, परबतसर और नावां विधानसभा क्षेत्र आते हैं।












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