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Amra Ram MP Sikar: राजस्‍थान से पहले किसान नेता, जो CPI(M) पोलित ब्यूरो सदस्य बने, 6 बार हारे सांसद के चुनाव

Amra Ram CPI(M) Politburo Member: राजस्थान की धरती से एक नया इतिहास लिखा गया है। सीकर से लोकसभा में पहुंचने वाले अमराराम न सिर्फ सीपीआई (एम) के पहले विजयी सांसद बने हैं, बल्कि अब वे पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था पोलित ब्यूरो के सदस्य भी बन गए हैं। अमराराम इस पद तक पहुंचने वाले राजस्थान के पहले नेता हैं।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी के सर्वोच्च नीति निर्धारक निकाय पोलित ब्यूरो में चुने जाने पर माकपा जिला कार्यालय किशन सिंह ढाका स्मृति भवन में पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड मंगलसिंह मांडोता की अध्यक्षता में स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान केंद्रीय कमेटी में चुने गए कामरेड किशन पारीक का भी अभिनंदन किया गया।

Amra Ram Sikar MP

सीपीआईएम जिला सचिव व पूर्व विधायक कामरेड पेमाराम ने अमराराम व किशन पारीक को गुलदस्ता देकर सम्मानित करने के बाद स्वागत भाषण देते हुए कहा कि माकपा के 24 वें महाअधिवेशन जो तमिलनाडु के मदुरई में 2 से 6 अप्रैल तक संपन्न हुआ, में राजस्थान से पहली बार किसी नेता को पार्टी के पोलित ब्यूरो में चुना गया है।

यह भी पढ़ें- Amraram MP Sikar: 6 लोकसभा चुनाव हारने वाले अमराराम 7वीं बार में कैसे जीते? पढ़ें जीत की इनसाइड स्‍टोरी

सीकर सांसद अमराराम ने कहा कि यह सम्मान पार्टी ने राजस्थान के ऐतिहासिक किसान आंदोलन जिसमें बिजली की बढ़ाई गई दरों को वापस लेने के लिए विधानसभा पर 7 दिन का महा पड़ाव, नहरी पानी के लिए रावला-घडसाना तथा किसानों की कर्ज माफी का आंदोलन जिसके फलस्वरुप पहली बार राजस्थान के किसानों का 8000 करोड़ रुपए का कर्ज माफ हुआ था। उसकी पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है। यह सम्मान अब और ज्यादा जिम्मेदारी से काम करने के लिए प्रेरित करता है। आने वाले समय में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी किसान, मजदूर, छात्र, युवा, महिला तथा दलित और अल्पसंख्यकों के हितों के लिए और ज्यादा जन संघर्षों का निर्माण करेगी।

Amra Ram Sikar MP

पार्टी के प्रदेश सचिव कामरेड किशन पारीक जिनको पार्टी की केंद्रीय समिति में चुना गया है। उन्‍होंने अभिनंदन के लिए सभी का अभिवादन करते हुए कहा कि पार्टी ने आने वाले समय में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए 14 सूत्री कार्यक्रम का निर्धारण किया है जो समय पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि नव फासीवाद के खतरे को केवल वामपंथी दल ही हरा सकते हैं।

अमराराम की ऐतिहासिक जीत

72 साल के लोकसभा इतिहास में पहली बार सीकर संसदीय क्षेत्र से माकपा को जीत मिली है। 68 वर्षीय किसान नेता अमराराम ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के दो बार के सांसद सुमेधानंद सरस्वती को 70,819 वोटों से हराकर एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की। अमराराम को कुल 6,59,300 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 5,86,404 वोटों पर संतोष करना पड़ा। दिलचस्प बात यह रही कि अमराराम ने सातवीं बार लोकसभा चुनाव लड़ा और पहली बार जीत हासिल की। इससे पहले वे छह बार चुनाव हार चुके थे।

जीत की रणनीति और मेहनत का असर

सीपीआई (एम) राज्‍य सचिव किशन पारीक के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2024 में अमराराम की जीत एक सुनियोजित और जमीनी रणनीति का नतीजा है।
विधानसभा क्षेत्रों को जोन में बांटना: सीकर क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों को कई जोनों में बांटकर वहां स्थानीय स्तर पर प्रचार किया गया।
डोर-टू-डोर संपर्क: हर बूथ पर 10-20 कार्यकर्ताओं की टीमें बनाई गईं जिन्होंने घर-घर जाकर मतदाताओं से संवाद किया।
किसान संगठनों का समर्थन: अमराराम को किसान सभा, एसएफआई, और अन्य वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं का जबरदस्त समर्थन मिला।
जोन सम्मेलनों से माहौल तैयार: चुनाव से तीन महीने पहले ही जोन स्तर पर लगातार कार्यकर्ता सम्मेलन किए गए, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह आया।

अमराराम की छवि और जातीय समीकरण

अमराराम की छवि एक जमीनी, संघर्षशील किसान नेता की रही है। यही छवि वोटरों के बीच असरदार साबित हुई। शेखावाटी क्षेत्र में मोदी सरकार की अग्निवीर योजना का भारी विरोध भी भाजपा के खिलाफ गया। जाट, मुस्लिम और एससी वोटरों का बड़ा हिस्सा अमराराम के पक्ष में गया।

मूंडवा गांव के रहने वाले हैं अमराराम

अमराराम मूल रूप से सीकर जिले के धोद विधानसभा क्षेत्र के मूंडवा गांव के रहने वाले हैं। सबसे ज्यादा लीड भी उन्हें यहीं से मिली-करीब 30,000 वोटों की। केवल चौमूं और श्रीमाधोपुर से ही माकपा को भाजपा से पीछे रहना पड़ा, बाकी सभी विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल हुई।

पोलित ब्यूरो में शामिल होकर रचा नया इतिहास

संसद पहुंचने के कुछ ही समय बाद अमराराम को सीपीआई (एम) की पोलित ब्यूरो में शामिल कर लिया गया। यह पार्टी की सबसे उच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। यह न सिर्फ अमराराम के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि राजस्थान के लिए भी ऐतिहासिक है-क्योंकि वे इस पद पर पहुंचने वाले राज्य के पहले नेता बन गए हैं।

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