Amraram MP Sikar: 6 लोकसभा चुनाव हारने वाले अमराराम 7वीं बार में कैसे जीते? पढ़ें जीत की इनसाइड स्टोरी
Amraram MP sikar Rajasthan: अमराराम लोकसभा के पहले सत्र में ट्रैक्टर पर सवार होकर पहुंचे हैं। राजस्थान के सीकर को किसान नेता अमराराम के रूप में नया मिला सांसद मिला है। सीकर सीट पर कामरेड अमराराम की 'लाल सलाम' जीत ने इतिहास रचा है। अमराराम संभवतया राजस्थान के वो पहले नेता भी बने हैं, जो लोकसभा चुनाव में लगातार छह बार हारने के बाद सातवीं कोशिश में जीते हैं।
72 साल के लोकसभा चुनाव के इतिहास में सीकर सीट पर माकपा व अमराराम ने पहली बार जीत दर्ज की है। माकपा तो सीकर संसदीय क्षेत्र से चुनावों में हार चुकी हैं। माकपा उम्मीदवार के रूप में 1967, 1971 व 1977 में त्रिलोक सिंह व 1996 से 2019 के बीच छह बार लोकसभा चुनाव लड़े और सारे हारे।

सीकर लोकसभा चुनाव 2024 परिणाम
- साल 2024 का लोकसभा चुनाव अमराराम ने इंडिया गठबंधन के तहत माकपा प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। कांग्रेस ने अमराराम के लिए सीकर सीट छोड़ी थी। अपना प्रत्याशी नहीं उतारा।
- 68 वर्षीय अमराराम ने सीकर सीट पर साल 2024 के चुनाव में भाजपा के दो बार के सांसद सुमेधानंद सरस्वती को 70 हजार 819 वोटों से हराया।
- लोकसभा चुनाव 2024 में सीकर सीट पर माकपा के अमराराम को कुल 6 लाख 59 हजार 300 वोट और भाजपा के सुमेधानंद सरस्वती को 5 लाख 86 हजार 404 वोट मिले।
- पोस्ट ग्रेजुएट अमराराम 1993 से 2008 तक तीन बार धोद व 2008 में एक बार दांतारामगढ़ से विधायक रहे हैं। इसके अलावा 2018 व 2023 के विधानसभा चुनाव में दांतारामगढ़ से हार का सामना करना पड़ा।
लोकसभा चुनाव 2024 में अमराराम की रणनीति
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में सीपीआई (एम) सीकर के जिला सचिव किशन पारीक ने अमराराम की चुनावी रणनीति शेयर की, जो इस प्रकार से है।
-विधानसभा क्षेत्रों को जोन में बांटा: सीकर संसदीय क्षेत्र में लक्ष्मणगढ़, धोद, सीकर, दांतारामगढ़, खंडेला, नीम का थाना, श्रीमाधोपुर, चौमूं विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें जोन बांटकर चुनाव प्रचार किया गया है। हर जोन में चार-पांच ग्राम पंचायत शामिल की गई।
-डोर टू डोर सम्पर्क: जोन में बांटने के बाद बूथ कमेटियां बनाई गई। हर कमेटी में 10 से 20 कार्यकर्ता शामिल किए गए। उनको जिम्मेदारी कि मतदाता सूची लेकर डोर टू डोर जाएं तो पता करें कि उनको समस्या तो नहीं। किसी में अमराराम को लेकर कोई नाराजगी तो नहीं।

-किसान संगठन का साथ: अमराराम के चुनाव में सीकर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अलावा किसान संगठनों को भी जबरदस्त साथ मिला। किसान सभा, एसएफआई, सीआईपीयू कार्यकर्ताओं की तहसील स्तर पर कमेटियां बनाई गई।
-जोन सम्मेलन: अमराराम और उनकी टीम ने तीन माह पहले ही लोकसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। यह मानकर कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो सीपीआईएम उम्मीदवार के रूप में तो चुनाव लड़ना ही है।
ऐसे में संसदीय क्षेत्र में खूब जोन सम्मेलन किए गए हैं। सम्मेलनों में कहीं 300 तो कहीं 400 कार्यकर्ता शामिल हुए और उन्होंने गांव-गांव ढाणी-ढाणी जाकर चुनाव प्रचार किया।

अमराराम की सीकर में जीत की वजह ये भी
- इंडिया गठबंधन में शामिल होने के कारण माकपा को कांग्रेस के वोट भी मिले।
- फौजियों वाले इलाके शेखावाटी में मोदी सरकार की अग्निवीर योजना का विरोध।
- अमराराम की संघर्ष करने वाले किसान नेता की छवि। लंबा राजनीतिक अनुभव।
- जातीय समीकरण में जाट, मुस्लिम व एससी वर्ग के ज्यादातर वोट अमराराम को मिले।
अमराराम को धोद में मिले सबसे ज्यादा वोट
अमराराम मूलरूप से धोद इलाके के गांव मूंडवा के रहने वाले हैं। सरपंच से सांसद तक का सफर तय कर लिया है। लोकसभा चुनाव 2024 में सबसे ज्यादा वोट धोद इलाके से ही मिले। अपने गढ़ धोद में माकपा भाजपा से 30 हजार वोटों से आगे रही। सबसे कम 10 हजार 336 वोटों की लीड खंडेला से मिली। केवल चौमूं व श्रीमाधोपुर इलाके में माकपा पिछड़ी। बाकी सब जगह से लीड रही।
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