रायपुर के Sky Walk पर बड़ा फैसला, भूपेश सरकार ने सौंपा ACB और EOW को जांच का जिम्मा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कई करोड़ों रुपये की लागत से खड़े किये गए स्काई वॉक ढांचे के निर्माण में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार की जांच एसीबी और ईओडब्ल्यू करेगी।

Raipur Sky Walk: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शहर के बीच आधे-अधूरे खड़े स्काई वाक पर भूपेश बघेल सरकार ने जांच कराने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि यह स्काई वाक पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के समय बनाया जा रहा था,जो अधूरा रह गया। सत्ता परिवर्तन के बाद से ही कांग्रेस सरकार लगातार स्काई वाक निर्माण और उसकी उपयोगिता पर सवाल उठा रही थी।

kunal shukla

एसीबी और ईओडब्ल्यू करेगी जांच

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कई करोड़ों रुपये की लागत से खड़े किये गए स्काई वॉक ढांचे के निर्माण में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार की जांच एसीबी और ईओडब्ल्यू करेगी। भूपेश बघेल सरकार ने इस संबंध में फैसला लिए लिया है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ज्ञापन सौंपकर इस संबंध में जांच करवाने की मांग की थी। वहीं भाजपा सरकार में लोक निर्माण विभाग के मंत्री रहे राजेश मूणत ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर न्यायाधीश से इसकी जांच करवाने का सुझाव सरकार को दिया था।

कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह की तरफ से सीएम बघेल को सौंपे गए ज्ञापन में स्काई वॉक में भ्रष्टाचार और अनियमितता को लेकर 8 बिंदुओं पर जानकारी दी गई थी। इसमें तत्कालीन भाजपा सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत पर स्काई वॉक के नाम पर प्रशासनिक प्रक्रिया को दरकिनार करके ठेकदार को फायदा दिलावाने का आरोप है।

क़ानूनी लड़ाई लड़ने वाले कुणाल शुक्ला ने कही यह बात

इधर स्काई वाक के मामले में क़ानूनी लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने सरकार के फैसले पर कहा कि स्काई वाक भ्रष्टाचार की मूरत, भ्रष्टाचार की इमारत है। शहर को जब और जहाँ पर फ्लाईओवर की आवश्यकता थी और जिसके लिए दो बार लाखों रुपए निकाले गए उसके बाद पूरे प्लान को चेंज करके कमीशन के लिए स्काईवॉक बनाने का निर्णय लिया गया । एक तरफ जहां विश्व में स्काई वाक का चलन समाप्त हो रहा है तो दूसरी तरफ शहर एवं प्रदेश वासियों को कमीशन के चक्कर में रमन सिंह और राजेश मूणत द्वारा स्काई वाक थोप दिया गया । इसके लिए ना तो कोई सर्वे करवाया गया, ना ही सेंट्रल जेल अथॉरिटी की एनओसी ली गई। ना ही शहर के नागरिकों की राय जानने की कोशिश की गई। शुक्ला ने कहा कि हमारी पहले दिन से यह मांग रही है के इसमें टैक्स पेयर के पैसों की जो बर्बादी हुई है उसकी वसूली रमन सिंह एवं राजेश मूणत से की जाए।

स्काई वाक पर बनाई गई थी कमेटी

यह भी जानना जरुरी है कि राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक से लगी मुख्य सड़कों पर अधूरे पड़े स्काईवॉक की उपयोगिता को लेकर भी भूपेश बघेल सरकार असंजस में रही है। इसपर फैसला लेने के संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सत्य नारायण शर्मा की अध्यक्षता में 22 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। जिसमे शामिल पीडब्ल्यूडी के अफसर और विशेषज्ञ सर्वसम्मति से स्काईवॉक को नहीं तोड़ने का फैसला लिया था। सभी सदस्यों ने माना था कि स्काईवॉक में अब तक लगभग 45 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। 31 करोड़ रुपए और खर्च करके इसे पूर्ण किया जा सकता है। बहरहाल स्काई वाक आज भी जस की तस अवस्था में खड़ा हुआ है।

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