Sankashti Chaturthi 2026: विभुवन संकष्टी व्रत आज, क्या है शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व?

Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत का खासा मान है। अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इस चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, जो हर तीन साल में एक बार आती है।विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक 'अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जून, बुधवार को रात 9 बजकर 22 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन, 4 जून, गुरुवार को रात 11 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य है और चंद्रोदय का मुहूर्त 3 जून को ही बन रहा है, इसलिए व्रत बुधवार को ही रखा जाएगा।'

Sankashti Chaturthi 2026

संकष्टी चतुर्थी व्रत का क्या है शुभ मुहूर्त?

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:38 बजे से 03:34 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:14 बजे से 07:34 बजे तक

विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना जाता है। इस व्रत को करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।धन, बुद्धि, सफलता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।संतान, शिक्षा और करियर संबंधी समस्याओं में भी लाभ मिलने की मान्यता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने और गणेश जी की पूजा करने से पापों का क्षय होता है।

संकष्टी चतुर्थी की पूजा सामग्री

भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर, लाल या पीला वस्त्र, दूर्वा (21 गांठ या 21 तिनके), लाल फूल, अक्षत (चावल),रोली और कुमकुम, धूप और दीप, मोदक या लड्डू, नारियल, पंचामृत, फल, कलश, चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल, दूध और पुष्प।

संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।पूजा स्थान को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।गणेश जी को रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें।धूप-दीप जलाकर पूजा करें।"ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें।गणेश चालीसा और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।

क्या करें और क्या ना करें?

पूरे दिन श्रद्धा और संयम रखें।गणेश मंत्रों का जाप करें।जरूरतमंद लोगों को दान दें। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें। झूठ बोलने और क्रोध करने से बचें।तामसिक भोजन (मांस, मदिरा आदि) का सेवन न करें। किसी का अपमान या अनादर न करें।

संकष्टी चतुर्थी के FAQ

  • संकष्टी चतुर्थी का व्रत किस देवता के लिए रखा जाता है?
  • यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है।
  • संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
  • मान्यता है कि चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बिना संकष्टी व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।
  • गणेश जी को कौन-सा भोग प्रिय है?
  • मोदक, लड्डू और दूर्वा भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय हैं।
  • संकष्टी चतुर्थी का मुख्य फल क्या है?
  • इस व्रत से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि तथा सफलता की प्राप्ति होती है।
  • क्या महिलाएं और पुरुष दोनों यह व्रत रख सकते हैं?
  • हां, यह व्रत महिलाएं, पुरुष और युवा सभी श्रद्धा के साथ रख सकते हैं।
यह पढ़ें:June Vrat Tyohar 2026: जून में आ रहे हैं ये प्रमुख व्रत-त्योहार, किस दिन एकादशी? कब है वट पूर्णिमा व्रत?
यह पढ़ें:June Vrat Tyohar 2026: जून में आ रहे हैं ये प्रमुख व्रत-त्योहार, किस दिन एकादशी? कब है वट पूर्णिमा व्रत?
यह पढ़ें: Guru Gochar 2026: बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर, तुला समेत इन 5 राशियों की बदलेगी किस्मत, मिलेगा धन-पद और यश
यह पढ़ें: Guru Gochar 2026: बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर, तुला समेत इन 5 राशियों की बदलेगी किस्मत, मिलेगा धन-पद और यश
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+