हल होगा आरक्षण पर आया संवैधानिक संकट? छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्यपाल उईके को भेजे जवाब
कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने सभी संवैधानिक पहलुओं की पड़ताल करके आरक्षण संशोधन विधेयक बनाया है। सवालों के जबाब मिलने के बाद इस पर राज्यपाल को अविलंब हस्ताक्षर करना चाहिये।
छत्तीसगढ़ सरकार ने आरक्षण संशोधन विधेयक पर राजभवन को सवालों का जबाब भेज दिया है । छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि अब सर्व समाज के हित में तथा राज्य के युवाओं के भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि राजभवन इस विधेयक पर तत्काल हस्ताक्षर करें ताकि यह विधेयक कानून का रूप ले सके ।विधेयक पर अनावश्यक बिलम्ब करने से प्रदेश के हर वर्ग का नुकसान हो रहा है। सभी विधेयक के कानून बनने का बेसब्री से इंतजार है।

कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने सभी संवैधानिक पहलुओं की पड़ताल करके उसका तथ्यात्मक निराकरण करके आरक्षण संशोधन विधेयक बनाया है। जिसे विधानसभा में सर्वसमिति से पारित किया गया। सवालों के जबाब मिलने के बाद इस पर राज्यपाल को अविलंब हस्ताक्षर करना चाहिये। अनावश्यक विलंब करने से हर वर्ग को नुकसान हो रहा सभी के हित में यह जरूरी है कि राजभवन विधेयक पर तत्काल निर्णय ले। कांग्रेस सरकार ने वर्तमान विधेयक को बनाने के ठोस आधारों का अध्ययन किया है। कांग्रेस ने सर्वसमाज को आरक्षण देने अपना काम पूरी ईमानदारी से करके सभी वर्गो के लिये आरक्षण का प्रावधान किया है। अनुसूचित जन जाति, अनुसूचित जाति को उनकी जनगणना के आधार पर तथा पिछड़ा वर्ग को क्वांटी फायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का प्रावधान किया। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगो को भी 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। 76 प्रतिशत का आरक्षण सभी वर्गो की आबादी के अनुसार निर्णय लिया है। यह विधेयक यदि कानून का रूप लेगा तो हर वर्ग के लोग संतुष्ट होंगे यदि कोई अदालत में जायेगा तो भी सरकार के पास आरक्षण के पक्ष में तमाम तर्क संगत कारण है जिसका जवाब दिया जायेगा। भविष्य में क्या होगा इस कल्पना का आधार बनाकर विधेयक को कानून बनने से नहीं रोका जाना चाहिये।
दरअसल आरक्षण संशोधन विधेयकों पर छत्तीसगढ़ सरकार में असमंजस कायम है। 25 दिनों बाद अब तक आरक्षण संशोधन विधेयकों पर राज्यपाल अनुसईया उईके ने ना तो हस्ताक्षर किये हैं और ना ही उसे सरकार को लौटाया है,बल्कि राजभवन ने भूपेश बघेल सरकार को 10 सवालों की एक सूची भेजी है। इसमें पूछा गया है कि अनुसूचित जाति और जनजाति को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ा मानने का आधार क्या है। अपने सवालों के माध्यम से राजभवन ने कुछ जरूरी कानूनी सवाल उठाये हैं।
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