एक्सटेंशन से एग्जिट तक! कौन हैं IAS राहुल सिंह? CBSE OSM विवाद के बीच लगा 30 साल के करियर पर दाग
IAS Rahul Singh: देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में हाल ही में हुए प्रशासनिक बदलावों के बाद पूर्व चेयरमैन राहुल सिंह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से जुड़े टेंडर विवाद के बीच केंद्र सरकार ने उन्हें उनके पद से हटा दिया, जिसके बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के बीच उनकी भूमिका और करियर को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
राहुल सिंह उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने राज्य और केंद्र सरकार दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 1996 बैच के IAS अधिकारी राहुल सिंह ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर शिक्षा क्षेत्र में कई बदलावों की दिशा में काम किया। हालांकि उनका कार्यकाल अब विवादों के कारण सुर्खियों में है, लेकिन इससे पहले वे प्रशासनिक व्यवस्था में एक अनुभवी अधिकारी के रूप में पहचाने जाते रहे हैं।

कौन हैं IAS राहुल सिंह? बिहार कैडर से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर
राहुल सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1996 बैच के अधिकारी हैं और बिहार कैडर से जुड़े रहे हैं। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने राज्य सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। अपने करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों में काम करते हुए शासन और नीति निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों का अनुभव हासिल किया।
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केंद्र सरकार में मिली बड़ी जिम्मेदारी
राज्य स्तर पर लंबे अनुभव के बाद राहुल सिंह को केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। CBSE की कमान संभालने से पहले वह कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। यह विभाग केंद्र सरकार की नौकरशाही से जुड़े मामलों और प्रशासनिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस भूमिका में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े कई मामलों पर काम किया।
मार्च 2024 में बने CBSE चेयरमैन
मार्च 2024 में केंद्र सरकार ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत राहुल सिंह को CBSE का चेयरमैन नियुक्त किया। उस समय बोर्ड में कई बदलावों और सुधारों की चर्चा चल रही थी। ऐसे में एक अनुभवी IAS अधिकारी के रूप में राहुल सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। उनकी नियुक्ति को शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते उपयोग और परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रयासों से जोड़कर देखा गया।
परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने पर दिया जोर
CBSE प्रमुख के रूप में राहुल सिंह ने मूल्यांकन प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दिया। उनके कार्यकाल में डिजिटल मूल्यांकन, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने से जुड़े कई कदम उठाए गए। बोर्ड का उद्देश्य था कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में समय कम लगे और पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सके।
CBSE में बढ़ाया गया था राहुल सिंह का कार्यकाल
राहुल सिंह के कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। वर्ष 2025 में उनके कार्यकाल को नवंबर 2027 तक बढ़ाने की मंजूरी दी गई। इससे यह संकेत मिला कि सरकार शिक्षा बोर्ड में चल रहे सुधारों को आगे बढ़ाना चाहती थी।
OSM विवाद के बाद बदल गया पूरा गणित
कुछ समय पहले CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़े टेंडर को लेकर विवाद सामने आया। मामला सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। इसी क्रम में राहुल सिंह और CBSE सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया। साथ ही टेंडर प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
निजी जीवन से ज्यादा प्रशासनिक काम के लिए रहे चर्चित
राहुल सिंह उन अधिकारियों में शामिल हैं जो सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई देते हैं। उनके परिवार और निजी जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। उनकी पहचान मुख्य रूप से एक प्रशासनिक अधिकारी और नीति निर्माण से जुड़े अधिकारी के रूप में रही है।
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