पंजाब: AAP ने तोड़ा 56 सालों का सियासी रिकॉर्ड, टूटे कई ऐतिहासिक चुनावी रिकॉर्ड, जानिए कैसे ?
पंजाब में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत से दर्ज कर कई सियासी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।
चंडीगढ़, 12 मार्च 2022। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत से दर्ज कर कई सियासी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। आम आदमी पार्टी ने पंजाब के 56 सालों का रिकॉर्ड तोड़ कर इतिहास लिख दिया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर कई सियासी रिकॉर्ड तो बनाया ही साथ ही विपक्षी दलों ने दिग्गत नेताओं को करारी मात भी दी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, लेकिन इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 विधानसभा सीट में से 92 सीटों पर अपना क़ब्ज़ा जमा लिया है। ग़ौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने प्रचंडी जीत हासिल कर मुकम्मल विपक्ष बनने तक का मौका नहीं दिया।

56 सालों का आम आदमी पार्टी ने तोड़ा रिकॉर्ड
पंजाब के सियासी जानकारों का मानना है कि पिछले यह 56 सालों में पंजाब में किसी भी सियासी पार्टी ने इस तरह से प्रचंड बहुमत हासिल कर जीत दर्ज नही की थी। आजादी के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी सूबे की तीसरी सबसे बड़ी जीत हासिल की है। पंजाब में इस बार सियासी समीकरण कई मायनों में बदले हुए नज़र आ रहे थे। चुनावी रणनीतिकार और सियासी जानकार कई तरह के क़यास लगा रहे थे लेकिन चुनावी नतीजों के बाद स्थिति पूरी तरह से साफ़ हो गई। आम अदमी पार्टी ने बहुमत के आंकड़े को पीछे छोड़ते हुए विनिंग सीट्स का पहाड़ खड़ा कर दिया। आंकडे की बात की जाए तो पंजाब में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन मिलकर भी आम आदमी पार्टी के एक चौथाई हिस्से तक भी नहीं पहुंच पाए।

56 साल में सबसे बड़ी चुनावी जीत
हरियाणा से पंजाब 1966 में अलग हुआ था, हरियाणा से अलग होने के बाद पंजाब में पहली बार 1992 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 87 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि उस दौरान आतंकवाद का मुद्दा चरम पर था और शिरोमणि अकाली दल ने चुनाव का बहिष्कार किया था। इसके बाद 1997 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने चुनावी रण में उतरी थी। उस दौरान शिअद-भाजपा गठबंधन के खाते में 93 सीटें आई थीं। शिरोमणि अकाली दल को 75 और भारतीय जनता पार्टी को 18 सीटों पर कामयाबी मिली थी। अब आम आदमी पार्टी ने 117 सीटों में से 92 सीटों पर जीत दर्ज कर पिछले 56 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

आज़ादी के बाद तीसरी बड़ी जीत
पंजाब में हुए विधानसभा चुनावों के इतिहास की बात की जाए तो 1952 के चुनाव में कांग्रेस ने 96 सीटों पर जीत दर्ज की थी। आपको बता दें कि उस वक्त पंजाब में कुल 126 विधानसभा सीटें थीं। उसके बाद पंजाब में 1957 के विधानसभा चुनाव में 126 विधानसभा सीटें बढ़ कर 154 सीटें हो गईं थी। 1957 के विधानसभा चुनाव के दौरान शिअद ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। इस वजह से पंजाब में 1957 के विधानसभा चुनाव में इकलौती बड़ी पार्टी कांग्रेस ही बची थी और कांग्रेस को चुनाव में इसका फ़ायदा भी हुआ था। पंजाब की 154 विधानसभा सीटों में से 120 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। वहीं 5 साल बाद 1962 के चुनाव में शिरोमणि अकाली दल चुनावी समर में उतरी लेकिन कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। 1962 के चुनाव में शिअद के चुनाव लड़ने के बावजूद कांग्रेस ने 154 सीटों में से 90 सीटों पर क़ब्ज़ा जमाया था।
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