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खुल गया 675 साल पहले बरसी काली मौत का राज

Provided by Deutsche Welle

नई दिल्ली, 16 जून। ब्लैक डेथ या ब्यूबोनिक प्लेग से मरने वाले लोगों के डीएनए के अध्ययन ने अब तक की सबसे घातक घटनाओं में से एक के बारे में कई जानकारियां उजागर की हैं. मसलन, अब वैज्ञानिक यह बता सकते हैं कि करोड़ों लोगों की जान लेने वाली इस महामारी की शुरुआत कहां हुई होगी.

वैज्ञानिकों ने मध्य एशिया में पुराने सिल्क रोड व्यापार मार्ग पर कई कब्रिस्तानों में दफन ऐसे लोगों के शवों का अध्ययन किया है, जो 14वीं सदी में ब्यूबोनिक प्लेग से मारे गए थे. बुधवार को शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्हें तियान शान पहाड़ी के एक कब्रिस्तान में 1338-39 में दफनाई गईं तीन महिलाओं के दातों से डीएनए के नमूने मिले हैं. इन नमूनों में येरजीनिया प्लेग के बैक्टीरिया मिले हैं. यानी इन महिलाओं की मौत उसी प्लेग से हुई होगी. इससे पहले कहीं भी प्लेग से मृत्यु के शुरुआती मामले 1346 के थे.

उस पैथोजन के जीनोम के रीकंस्ट्रक्शन से पता चला कि बैक्टीरिया के किस स्ट्रेन ने उस ब्लैक डेथ को जन्म दिया जिसने यूरोप, एशिया, मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका में कहर बरपाया और करोड़ों लोगों की जान ली. इसी बैक्टीरिया ने उन प्लेग जीवाणुओं को भी जन्म दिया जो आज प्लेग के रूप में मौजूद हैं.

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स्कॉटलैंड के स्टर्लिंग विश्वविद्याल के इतिहासकार फिलिप स्लाविन कहते हैं, "हमारी यह खोज कि ब्लैक डेथ का उद्गम स्थल मध्य एशिया में 1330 में था, बाकी सारी बहसों को विराम दे देती है." यह अध्ययन नेचर पत्रिका में छपा है.

सिल्क रोड 14-15वीं सदी का एक बेहद व्यस्त व्यापार मार्ग था जिसके जरिए चीन से साज ओ सामान बाकी दुनिया को ले जाया और लाया जाता था. यह मार्ग पूरे मध्य एशिया से गुजरता था जिसमें बाइजैंटाइन की राजधानी कॉन्स्टैंटिनोपल और पर्शिया आदि इलाके भी शामिल थे. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसी रास्ते से व्यापारियों के जरिए ब्लैक डेथ मध्य एशिया से बाकी दुनिया तक पहुंची.

कैसे हुआ प्रसार?

अध्ययन की मुख्य शोधकर्ता जर्मनी के ट्यूबिनगेन विश्वविद्याल में पुरातत्वविज्ञानी मारिया स्पाईरू कहती हैं, "ऐसे बहुत सारे हाइपोथीसिस रहे हैं कि वह महामारी पूर्वी एशिया से निकली होगी, या चीन, मध्य एशिया, भारत से निकली होगी. यह भी कहा जाता है कि काला सागर और कैस्पियन इसका उद्गम स्थल है जहां 1346 में महामारी सबसे पहले फैली थी. हम जानते हैं कि ब्लैक डेथ की शुरुआत में यूरोप में इसके प्रसार का संभावित कारण व्यापार था. तो यह एक तार्किक निष्कर्ष है कि इसी प्रक्रिया से यह बीमारी मध्य एशिया से काला सागर तक 1338 से 1346 के बीच पहुंची होगी."

फलीस्तीनियों को प्लेग होने की मांगी दुआ!

किसी भी महामारी की शुरुआत को लेकर अक्सर विवाद होते हैं. कोविड-19 महामारी के चीन से उद्गम को लेकर हाल के सालों में काफी विवाद हो चुके हैं. ब्लैक डेथ इन विवादों में सबसे बड़ा है. अब तक के दर्ज इतिहास में यह सबसे बड़ी महामारी थी जिसने पश्चिमी यूरोप और मध्य पूर्व की आधी आबादी का सफाया कर दिया था.

स्लाविन कहते हैं, "कुल मिलाकर 5-6 करोड़ लोगों की जान गई होगी. कॉकेशस, ईरान और मध्य एशिया में हुई मौतों का तो कोई हिसाब ही नहीं है."

कैसे हुआ अध्ययन?

जर्मनी के माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर साइंस ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री के निदेशक योहानेस क्राउस भी ब्लैक डेथ पर हुए इस अध्ययन का हिस्सा थे. वह बताते हैं, "मध्य युग में बीमारियों का तेज प्रसार देखा जा सकता है. हमें इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि किन्हीं छोटे दूर-दराज इलाकों में जानवरों से इंसानों में बीमारी के आने के बाद इनका प्रसार बाकी दुनिया में हुआ हो."

अपने अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने बुराना और कारा-जीगाख समुदायों के कब्रिस्तानों से सात शवों के डीएनए के नमूनों का अध्ययन किया. उन्हें कारा-जीगाख समुदाय के तीन शवों में प्लेग का डीएनए मिला. जहां से ये नमूने लिए गए थे, उन कब्रिस्तानों की खोज 19वीं सदी में हुई थी. वहां लोगों के पास से मिले मोती, सिक्के और कपड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये इलाके अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल थे या फिर दूर-दराज से यात्रा करते व्यापारी यहां रुकते होंगे.

जब यह महामारी फैली, तब वह प्लेग लाइलाज थी लेकिन आज एंटीबायोटिक से उसका इलाज संभव है. उसमें नसें सूज जाती हैं और उनमें पस पड़ जाती है जो नाक और मुंह के जरिए खून के साथ बाहर आने लगती है. यह संक्रमण धीरे-धीरे फेफड़ों तक फैल जाता है और इंसान की जान ले लेता है.

वीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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