पटनाः किराये के कमरे में क्लीनिक खोल 50 रुपये से लेकर 200 रुपये में करता था गैरकानूनी काम

पटना। बिहार की राजधानी पटना के पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक डॉक्टर को धर दबोचा है, जो युवाओं क केवल 50 रुपये में नशे की दवाइयां और इंजेक्शन बेचता था। दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एक युवक खुद से हाथ में नशे का इंजेक्शन लगा रहा था। वीडियो वायरल होने पर पुलिस तक पहुंच गया, जिसके बाद थानेदार केपी सिंह मामले की जांच में जुट गए।

वीडियो वायरल होने पर सतर्क हुई पुलिस

वीडियो वायरल होने पर सतर्क हुई पुलिस

पुलिस अलर्ट होते हुए यह पता लगाने में जुट गई कि इन युवाओं को कौन ने का इंजेक्शन दे रहा है और कहां से सप्लाई हो रही है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस युवक के पास पहुंच गई, जिसका वीडियो वायरल हुआ था। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उस क्लीनिक का भी पता लगा लिया, जहां नशीली दवाईयां दी जा रही थीं। पुलिस ने इंदिरा नगर स्थित अशोक सिंह के मकान में चल रहे शैलेन्द्र कुमार के क्लीनिक पर छापा मारा।

युवाओं को लगाता था नशे के इंजेक्शन

युवाओं को लगाता था नशे के इंजेक्शन

पुलिस ने आयुर्वेदिक डॉक्टर बताकर क्लीनिक चलाने वाले आरोपी डॉक्टर शैलेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया। शैलेंद्र कुमार ही युवाओं को नशे का इंजेक्शन देता था। मौके से पुलिस ने दर्जनों नशे के इंजेक्शन और नकली दवाएं बरामद की है। आरोपी शैलेंद्र पुलिस व ड्रग विभाग के सामने किसी भी तरह का कोई कागजात पेश नहीं कर पाया। पकड़े गए आरोपी के खिलाफ कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी मसौढ़ी थाना क्षेत्र के नदौल बैरमचक का रहने वाला है।

50 रुपये में बेचता था दवा

50 रुपये में बेचता था दवा

बता दें कि आरोपी शैलेंद्र किसी नशा मुक्ति केंद्र पर काम करता था। वहीं पर इसका नशा करने वालों से संपर्क हुआ। इसके बाद उसने काम छोड़कर किराये के कमरे में दवा की दुकान और क्लीनिक खोल ली। वहां वह 50 रुपये से लेकर 200 रुपये तक में ऑटो, रिक्शा चालक से लेकर युवाओं को नशे का इंजेक्शन बेचता था। आरोपी को जेल भेज दिया गया है। औषधि निरीक्षक रंजन कुमार की तरफ से पकड़े गए आरोपित के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

दो साल से कर रहा था गैरकानूनी काम

दो साल से कर रहा था गैरकानूनी काम

थानेदार केपी सिंह ने इस मामले के बारे में स्वास्थ्य विभाग को खबर दी, जिसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर रंजन कुमार और पंकज कुमार वर्मा थाने पहुंचे। ड्रग विभाग ने शैलेंद्र से पूछताछ और दवा खरीद बिक्री से जुड़ा एक भी अभिलेख बरामद नहीं कर सकें। पुलिस के मुताबिक पिछले दो साल से यह सबकुछ चल रहा था।

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