बिहार चुनाव: उनसे मिलिये जिन्हें विरासत में मिली राजनीति
पटना (मुकुंद सिंह)। राजनीति में परिवारवाद को लेकर भले ही आरोप-प्रत्यारोप चलता रहे, लेकिन कोई भी दल परिवारवाद से अछूता नहीं है। बिहार विधानसभा चुनाव में भी राज्य के कई वरिष्ठ नेता अपनी विरासत उत्तराधिकारी को सौंपने के लिए दांव-पेच आजमा रहे हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद जहां इस चुनाव में अपने दो पुत्रों और पुत्री को चुनावी समर में उतारने के लिए व्यग्र दिख रहे हैं। वहीं पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह, जीतन राम मांझी, रघुनाथ झा और जनार्दन सिंह समेत कई नेता अपने बेटे-बेटियों को चुनाव में उतारने की तैयारी में है। खैर उनकी बात तो हम नीचे तस्वीरों के साथ करेंगे। पहले एक नजर इतिहास पर डालते हैं।
इतिहास के झरोखे में विरासत की राजनीति
राजनीति में वंशज को विरासत सौंपने की परंपरा बिहार में कोई नई नहीं है। कहा जाता है कि बिहार में कांग्रेस के दो दिग्गज ललित नारायण मिश्र और अनुग्रह नारायण सिंह ने राजनीति में परिवाद की नींव रखी। अनुग्रह नारायण सिंह के पुत्र सत्येंद्र नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने, उनके पुत्र निखिल कुमार औरंगाबाद से सांसद चुने गए और बाद में राज्यपाल पद तक पहुंचे।
बिहार चुनाव: बल्लेबाजी करने उतरे राहुल, रनर बनेंगे लालू-नीतीश
कद्दावर कांग्रेस नेता दिवंगत ललित नारायण मिश्र का परिवार भी सियासत में कभी पीछे नहीं रहा। एक भाई जगन्नाथ मिश्र तो मुख्यमंत्री बने ही, दूसरे भाई मृत्युंजय नारायण मिश्र भी भाजपा में सक्रिय हैं। जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्र बिहार के मंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुके हैं। ललित नारायण के पुत्र विजय कुमार मिश्र विधान पार्षद हैं और उनके पुत्र ऋषि मिश्र भी जदयू के विधायक हैं। इसके अलावा भी कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत अपने परिवार के सदस्यों को सौंपा है।
ये था पास्ट, बिहार का प्रेजेंट और फ्यूचर देखें स्लाइडर में-

लालू के बेटे तेज प्रताप
महुआ विधानसभा क्षेत्र से तेज प्रताप की उम्मीदवारी की घोषणा की जा चुकी है।

लालू के बेटे तेजस्वी
तेजस्वी यादव सोनपुर से राजद के संभावित उम्मीदवार हैं।

लालू की बेटी मीसा भारती
राघोपुर से लालू की बड़ी बेटी मीसा भारती को लड़ाए जाने की चर्चा है। हालांकि वे पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से निछला चुनाव हार चुकीं हैं।

नरेंद्र सिंह के बेटे अजय, अमित
बिहार के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह अपने बेटे अजय सिंह और सुमित सिंह को एक बार फिर विधायक बनाने के लिए टिकट के जुगाड़ में लगे हैं।

जीतन के बेटे संतोष मांझी
पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी अपने बेटे संतोष को राजनीति में लाने की फिराक में हैं। मांझी अपने पुत्र को गया या जहानाबाद की किसी सुरक्षित सीट से उतारेंगे।

रघुनाथ झा के बेटे अजीत
हाल ही में राजद छोड़ चुके रघुनाथ झा अपने बेटे अजीत कुमार झा के लिए भी किसी सुरक्षित सीट की तलाश में हैं।

जनार्दन सिंह के बेटे प्रमोद
सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल छपरा सीट से बेटे प्रमोद सिग्रीवाल के लिए टिकट का दावा ठोक रहे हैं।

रमा देवी की बेटी रागिनी
शिवहर की सांसद रमा देवी अपनी बेटी रागिनी गुप्ता के लिए टिकट के जुगाड़ में हैं। रागिनी मधुबन के अलावा नरकटियागंज सीट से भी टिकट चाह रही हैं।

सीताराम सिंह के बेटे रणधीर सिंह
मधुबन सीट से पूर्व सांसद सीताराम सिंह के बेटे राणा रणधीर सिंह भी टिकट के दावेदार बताए जा रहे हैं।

छेदी पासवान के बेटे रवि
भाजपा के सांसद छेदी पासवान सासाराम की चेनारी सीट से अपने बेटे रवि को टिकट दिलाने के प्रयास में हैं।

सीपी ठाकुर के बेटे विवेक
भाजपा के वरिष्ठ नेता सी पी ठाकुर भी अपने पुत्र विवेक को टिकट दिलाने के लिए बड़े नेताओं के यहां दरबार लगा चुके हैं।












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