बिहारः पुलिस ने मॉब लिंचिंग में जिसे मरा समझ कर दिया अंतिम संस्कार, जिंदा लौट आया शख्स
पटना। बिहार पुलिस पर आए दिन उसकी कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहते हैं। ताजा मामला पटना के नौबतपुर का है, जहां पुलिस ने जिसे मॉब लिंचिंग के दौरान मृत मानकर उसके शव का अंतिम संस्कार करवा दिया। वह शख्स अपने घर लौट आया है। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना शुरू हो गया है कि आखिर पुलिस ने जो शव परिजनों को सौंपा था वह किसका शव था और जिन 23 लोगों को लिंचिंग के मामले में गिरफ्तार किया है उनका क्या होगा।

पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया था शव
दरअसल, नौबत थाना क्षेत्र के महमतपुर गांव में बीते 10 अगस्त को मॉब लिंचिंग के दौरान एक शख्स की मौत हो गई थी। मृत व्यक्ति की शिनाख्त रानी तालाब थाना क्षेत्र के निसरपुरा गांव के रहने वाले कृष्णा मांझी के रूप में की गई थी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया। लेकिन इसी बीच कृष्णा अपने घर लौट आया है।

पुलिस के लिए बड़ी समस्या
इसके बाद मृतक की शिनाख्त करना पुलिस के लिए बड़ी समस्या बन गई है। पूरे मामले की छानबीन के लिए पुलिस कृष्णा मांझी को नौबतपुर लाने में जुट गई है। इस पूरे मामले पर थानाध्यक्ष सम्राट दीपक ने कहा कि इस मामले में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। साथ ही कहा कि कृष्णा मांझी का कोर्ट में 164 का बयान भी कलमबंद कराया जाएगा।

पत्नी ने लगाया आरोप
कृष्णा मांझी की पत्नी रूदी देवी का कहना है कि 12 अगस्त को दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में शव देखने गई तो शव सड़ा-गला अवस्था में था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें जबरन शव को कृष्णा मांझी बताकर सौंप दिया। पुलिस के दबाव पर दाह-संस्कार किया गया। इसके लिए हम लोगों को कर्ज भी लेना पड़ा। हालांकि पुलिस ने पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप को नकार दिया है।

पुलिस ने 23 लोगों को किया था गिरफ्तार
बता दें कि बीते 10 अगस्त को नवही पंचायत के महमदपुर गांव में भीड़तंत्र का बेहद खतरनाक चेहरा देखने को मिला जब एक राहगीर को बच्चा चोरी के आरोप में लाठी-डंडों से पीटकर अधमरा कर दिया। सूचना मिलने पर आनन-फानन में पुलिस पहुंची और घायल को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने 23 लोगों को गिरफ्तार किया था।












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