इस्लामाबाद के सेशन कोर्ट पर 26/11 जैसा हमला

अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। धमाका कोर्ट परिसर के बाहर हुआ है। धमाके में घायल हुए सेशन कोर्ट के जज की मृत्यु हो गयी है।
पाकिस्तान में कट्टरपंथियों और सरकार के बीच किसी भी तरह का समझौता नहीं हो सका है। आजादी के बाद लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई नवाज शरीफ सरकार से जनता को उम्मीद थी कि आतंकी घटनाओं पर लगाम लगेगी लेकिन दोनों पक्षों में बात नहीं हो सकी।
बताया जाता है कि कट्टरपंथी चाहते हैं कि पूरे मुल्क में शरीया कानून लागू हो। जिसके लिए वह इन धमाकों को अंजाम देते रहते हैं।












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