Trump Tariff Court Ruling: ट्रंप की टैरिफ नीति को बड़ा झटका, अमेरिकी कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को बताया अवैध
Trump Global Tariff Court Ruling 2026: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को एक बार फिर बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (US Court of International Trade) ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ को संघीय कानून के तहत अवैध और अधिकृत सीमा से बाहर करार दिया है।
तीन जजों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से दिए फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस द्वारा दी गई शक्तियों से आगे बढ़कर यह फैसला लिया था। अदालत ने साफ कहा कि यह टैरिफ कानून द्वारा अधिकृत नहीं थे और इन्हें लागू करने का तरीका संवैधानिक सीमाओं से परे था।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब कुछ महीने पहले ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक आयात शुल्कों को खारिज कर दिया था। उस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने नया रास्ता अपनाते हुए अस्थायी 10% ग्लोबल टैरिफ लागू किए थे, लेकिन अब ट्रेड कोर्ट ने उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
US Trade Court 10% Tariff का क्या था पूरा मामला?
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से अमेरिका के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संकट से जोड़ते रहे हैं। राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने चीन समेत कई देशों से आयात होने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाए थे। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) 1977 का इस्तेमाल करते हुए यह तर्क दिया था कि अमेरिका का लगातार बढ़ता व्यापार घाटा राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर रहा है।
इसी आधार पर दुनिया के लगभग हर बड़े व्यापारिक साझेदार देश पर टैरिफ लगाए गए। हालांकि, फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को इतने व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता।
कोर्ट ने माना कि टैक्स और टैरिफ लगाने का मूल अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत कांग्रेस के पास है। सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप प्रशासन ने Trade Act 1974 की धारा 122 के तहत अस्थायी 10% ग्लोबल टैरिफ लागू किए थे। इन्हें 24 जुलाई तक प्रभावी रहना था। अब ट्रेड कोर्ट ने इसी व्यवस्था को भी अवैध करार दिया है।
Trump Global Tariff Court Ruling 2026: कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
न्यूयॉर्क स्थित ट्रेड कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति को सीमित परिस्थितियों में टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है, लेकिन वह अधिकार असीमित नहीं है। कोर्ट ने माना कि ट्रंप प्रशासन ने जिस तरह वैश्विक स्तर पर व्यापक टैरिफ लगाए, वह कांग्रेस की मंशा और संवैधानिक ढांचे से मेल नहीं खाता।
फैसले में कहा गया-"राष्ट्रपति द्वारा लगाया गया यह टैरिफ संघीय कानून के तहत अधिकृत नहीं था और इस तरह यह अमान्य है।"
हालांकि अदालत ने पूरे देश में इन टैरिफों पर तत्काल रोक नहीं लगाई। यह फैसला फिलहाल केवल उन तीन पक्षों पर लागू होगा जिन्होंने अदालत में चुनौती दी थी।
किन लोगों ने दी थी चुनौती?
इस मामले में वॉशिंगटन राज्य, मसाला कंपनी Burlap & Barrel और खिलौना निर्माता Basic Fun! ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इन कंपनियों का कहना था कि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति के कारण उनके व्यापार पर गंभीर असर पड़ा और आयात लागत अचानक बढ़ गई। Liberty Justice Center के मुकदमेबाजी निदेशक जेफरी श्वाब, जिन्होंने इन कंपनियों का प्रतिनिधित्व किया, ने कहा कि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि फैसले का असर बाकी कंपनियों पर भी पड़ेगा या नहीं।
भारत पर भी पड़ा था असर
ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति का असर भारत पर भी देखने को मिला था। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25% आयात शुल्क लगाया था। इसके अलावा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25% "पेनल्टी टैरिफ" भी लगाया गया था। हालांकि बाद में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते के तहत प्रभावी टैरिफ दर घटाकर 18% कर दी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट और अब ट्रेड कोर्ट के फैसलों ने ट्रंप की पूरी टैरिफ रणनीति को कानूनी संकट में डाल दिया है।
क्या ट्रंप प्रशासन फिर करेगा अपील?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले को चुनौती दे सकता है। अगर अपील दायर होती है तो मामला पहले US Court of Appeals for the Federal Circuit जाएगा और उसके बाद एक बार फिर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है। यह मामला केवल व्यापार नीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति और कांग्रेस की शक्तियों के बीच संतुलन की बड़ी बहस बन चुका है।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप लंबे समय से टैरिफ को अपनी आर्थिक और राजनीतिक रणनीति का सबसे बड़ा हथियार बताते रहे हैं। वे America First नीति के तहत आयात शुल्क बढ़ाकर घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने की बात करते रहे हैं।
लेकिन अदालतों ने बार-बार यह संकेत दिया है कि राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति के इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला आने वाले अमेरिकी चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि ट्रंप एक बार फिर व्यापार और चीन विरोधी एजेंडे को अपनी राजनीति के केंद्र में रख रहे हैं।














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