कत्ल के आरोपी मुशर्रफ बोले 1971 की हार का बदला था कारगिल
कराची। पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह और कारगिल युद्ध में मुंह की खाने वाली पाक सेना के पूर्व जनरल परवेज मुशर्रफ ने दावा किया है कि वर्ष 1999 में भारत के साथ हुआ यह युद्ध दरअसल बांग्लादेश युद्ध के दौरान मिली हार का बदला लेने के लिए लड़ा गया था।

मान ली कारगिल की बात
मुशर्रफ ने यह बात पाक टीवी चैनल सामां को दिए इंटरव्यू के दौरान कही। मुशर्रफ जो कि पाक की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या में आरोपी हैं मुशर्रफ से पूछा गया कि उन्होंने कारगिल युद्ध की भूमिका क्यों रची? इस पर उनका जवाब था कि भारत ने 1971 में बांग्लादेश का निर्माण कराया और साथ ही उस समय पाक को भारत के साथ हुए युद्ध में बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा था।
इस वजह से ही कारगिल युद्ध हुआ। मुशर्रफ ने कहा कि भारत ने इस तरह के कई ऑपरेशन चलाए जिसकी वजह से कारगिल युद्ध का सामना उसे करना पड़ा। मु शर्रफ इससे पहले हर बार इस बात को नकारते रहे हैं कि कारगिल युद्ध में उनकी कोई बड़ी भूमिका थी। उन्होंने हमेशा ही इस युद्ध के लिए नवाज शरीफ को ही जिम्मेदार बताया है।
मुशर्रफ ने तो यहां तक दावा कर डाला कि जब वह पाक के राष्ट्रपति थे तो भारत और पाक इस दौरान बड़े मुद्दों जैसे कश्मीर, सर क्रीक और जल संधि को सुलझाने के मुहाने पर भी पहुंच गए थे।
आत्मसम्मान से बढ़कर कुछ नहीं
एक सवाल का जवाब देते हुए मुशर्रफ ने कहा कि भारत के दोस्ती एक समान स्तर पर ही संभव है और पाक के आत्मसम्मान की कीमत पर यह दोस्ती कतई नहीं हो सकती है।
मुशर्रफ ने कहा कि लोगों को लगता है कि वह भारत के साथ दोस्ती नहीं चाहते हैं। ऐसा नहीं है और भारत के साथ पाक के रिश्ते उनके दौर में खूब निखरे थे।
मुशर्रफ ने साफ कर दिया कि जब तक भारत पाक का सम्मान नहीं करेगा तब तक उसके साथ दोस्ती का कोई सवाल ही नहीं उठता है।
मुशर्रफ ने अपने इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में भले ही मोदी की सरकार हो लेकिन इस दौरान भी भारत के साथ दोस्ती संभव है। उन्होंने भारत को पाक सैनिकों की हत्या करने,
सीमा पर फायरिंग करने और बलूचिस्तान में आतंकवाद के बढ़ावे का भी दोषी ठहराया। मुशर्रफ के मुताबिक जब तक मोदी अपनी आक्रामकता में कमी नहीं लाते हैं तब तक तो दोस्ती नहीं हो सकती है।
आईएसअाई की वकालत करते मुशर्रफ
मुशर्रफ ने इस इंटरव्यू में भारत के साथ 'जैसे को तैसा' वाला रवैया रखने की बात कही है। साथ ही साथ उन्होंने पाक में अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बोला कि वह पाक में जनता के सामने तीसरे विकल्प के तौर पर तैयार हैं। साथ ही उन्होंने आईएसआई के लिए भी बड़े राजनीतिक रोल की वकालत की।












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