पाकिस्तान: टिड्डी पकड़कर एक रात में 20,000 तक कमा रहे हैं किसान, स्कीम को पूरे देश में लॉन्च करेंगे इमरान खान
इस्लामाबाद। पाकिस्तान इन दिनों टिड्डी हमले से खासा परेशान है। पिछले दिनों यहां पर टिड्डी पकड़ने की एक ऐसी स्कीम लॉन्च हुई जिसकी चर्चा हर जगह हो रही है। अब प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी इस स्कीम का समर्थन किया है। इस स्कीम के तहत किसानों को एक बैग टिड्डी के 20 रुपए दिए जाएंगे। पाकिस्तान पिछले 25 सालों में पहली इतने गंभीर टिड्डी अटैक को झेल रहा है, जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है।

कैबिनेट मीटिंग में हुई चर्चा
प्रधानमंत्री इमरान खान ने चिकन फीड के तौर पर इकट्ठा की जाने वाली इन टिड्डियों को पकड़ने वाले प्रोजेक्ट पर मंगलवार को अहम बात कही। उन्होंने कैबिनेट मीटिंग में न सिर्फ इसका समर्थन किया बल्कि इसे एक बेहतरीन स्कीम करार दिया। पाकिस्तान के अखबार द डॉन की तरफ से बताया गया है कि इमरान खान इस बात से काफी खुश थे कि इस योजना को ओकारा में लागू किया जा चुका है। उन्होंने इस आइडिया का स्वागत किया और कहा कि इसे प्रांतों की मंजूरी मिलने के बाद पूरे देश में लागू कर दिया जाए। इस स्कीम में ओकारा में किसानों से कहा गया है कि वे टिड्डियों को पकड़कर मुर्गी दाना यानी चिकन फीड बनाने वाले प्लांट्स को दे दें।

संकट को मौके में बदलने की अपील
किसानों को एक किलो टिड्डी पकड़ने पर 20 रुपए दिए जा रहे हैं। पाक मीडिया के मुताबिक इससे हाई प्रोटीन चिकन फीड बनाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक टिड्डियों में करीब 70 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इस स्कीम के आने के बाद से पाकिस्तान में किसान एक-एक रात में जाल डालकर कई-कई टन टिड्डी पकड़ रहे हैं। हालत यह है कि अब मुर्गी दाना बनाने वाले प्लांट्स के अलावा पशु आहार बनाने वाली फैक्ट्रियां भी किसानों से टिड्डी खरीद रही हैं। पाकिस्तान की सरकार में सूचना मंत्री शिहबिल फराज ने पुष्टि की और कहा कि पीएम चाहते हैं कि इस संकट को मौके में बदल दिया जाएगा। इसलिए टिड्डी पकड़ने वाली योजना को मंजूरी दे दी गई है।
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ओकरा में लॉन्च हुआ था प्रोजेक्ट
पाक के वैज्ञानिकों ने पाकिस्तान के ओकरा जिले में एक पायलट प्रोजेक्ट पिछले दिनों लॉन्च किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत किसान, टिड्डियों को पकड़कर एक तरफ अपनी फसलों को बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ कमाई भी कर रहे हैं। पाकिस्तान के नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड रिसर्च मिनिस्ट्री के साथ काम करने वाले वैज्ञानिक मोहम्मद खुर्शीद और पाकिस्तान एग्रीकल्चर रिसर्च काउंसिल में बायो-टेक्नोलॉजिस्ट जौहर अली के दिमाग में टिड्डी पकड़ने का यह नायाब आइडिया आया था। अली के मुताबिक इस बात कर जरा भी उम्मीद नहीं थी कि किसान वास्तव में टिड्डियों को पकड़कर चिकन फीड प्लांट तक पहुंचाने लगेंगे। खुर्शीद और जौहर ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए पंजाब प्रांत के ओकरा जिले को चुना क्योंकि यहां घनी आबादी वाले ग्रामीण इलाके हैं।

रात में टिड्डी पकड़ रहे हैं किसान
उन्होंने सबसे पहले देपालपुर में पीपली पहाड़ जंगल में तीन दिन का ट्रायल प्रोजेक्ट चलाया था। उन्होंने बताया कि हमने जंगली इलाके का चुनाव इसलिए किया क्योंकि यहां कीटनाशकों का सबसे कम प्रयोग किया जाता है। उन्होंने अपने प्रोजेक्ट को 'टिड्डी पकड़ो, पैसा कमाओ, फसल बचाओ' का नारा भी दिया। किसानों को एक किलो टिड्डी पकड़ने पर 20 पाकिस्तानी रुपए देने की पेशकश की गई। टिड्डियां सिर्फ दिन में उड़ती हैं, रात में ये पेड़ों और खुले मैदानों में जमा हो जाती हैं। खुर्शीद कहते हैं कि इन्हें रात में पकड़ना बहुत आसान होता है।

20,000 रुपए तक की टिड्डी पकड़ रहे किसान
खुर्शीद के मुताबिक, एक किसान एक रात में सात टन तक टिड्डियां पकड़ लेता है। इसके बाद चिकन फीड प्लांट्स तक इन्हें पहुंचाने का काम प्रोजेक्ट टीम करती है। अनुमान के मुताबिक, एक किसान एक रात में 20,000 रुपए तक की कमाई कर रहा है। द थर्ड पोल की रिपोर्ट के मुताबिक, अली ने बताया कि हमारी अपील पर पहले दिन 10 से 15 लोग ही आए। लेकिन जब एक रात में होने वाली कमाई की बात लोगों तक पहुंची तो तीसरे दिन से सैकड़ों किसान प्रोजेक्ट से जुड़ गए। अब हमें उन्हें पकड़ी गई टिड्डियों को जमा करने के लिए बैग्स भी नहीं देने पड़ रहे हैं। हमें बस उन टिड्डियों से भरे हुए बैग्स को तोलने, प्लांट्स तक पहुंचाने और उसका भुगतान करने का काम करना पड़ रहा है।












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