800 पाकिस्तानी हिन्दू वापस लौटे, नहीं मिली नागरिकता, भड़के सुब्रमण्यम स्वामी

भारत की नागरिकता पाने के उद्देश्य से राजस्थान में रह रहे 800 पाकिस्तानी हिन्दू वापस पाकिस्तान लौट गए हैं। अखबार द हिन्दू के मुताबिक सीमांत लोक संगठन ने यह दावा किया है।

इस्लामाबाद, 09 मईः पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की क्या हालत है यह किसी से छिपी हुई नहीं है। उनकी जिंदगी में बदलाव हो, वे शांति और सम्मान से जी सकें इसके लिए वे भारत आने की पुरजोर कोशिश करते हैं। भारत में रहने का मन बना चुके कई पाकिस्तानी हिन्दू टूरिस्ट वीजा पर भारत आते हैं तथा यहां अपना स्थाई ठिकाना बनाने की जद्दोजहद में जुट जाते हैं। लेकिन यहां अपने लिए नया ठिकाना बना पाना कई बार लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में उनके वापस पाकिस्तान लौट जाने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं बच पाता। ताजा मामला राजस्थान से जुड़ा है जहां भारतीय नागरिकता की आस में रहने वाले कई महीनों से रह पाकिस्तानी हिन्दू वापस पाकिस्तान लौट गए हैं।

Recommended Video

    800 Pakistani Hindus returned to Pakistan: भड़के Subramanian Swamy। CAA पर उठे सवाल | वनइंडिया हिंदी
    वापस लौटे पाकिस्तानी हिन्दू

    वापस लौटे पाकिस्तानी हिन्दू

    भारत की नागरिकता पाने के उद्देश्य से राजस्थान में रह रहे 800 पाकिस्तानी हिन्दू वापस पाकिस्तान लौट गए हैं। अखबार द हिन्दू के मुताबिक सीमांत लोक संगठन जो भारत में पाकिस्तानी अल्पसंख्यक प्रवासियों के लिए काम करती उसने ये दावा किया है कि ये 800 पाकिस्तानी हिन्दू बीते वर्ष पाकिस्तान लौट गए हैं। द हिन्दू की खबर के मुताबिक भारत के लिए नागरिकता आवेदन के बाद की प्रक्रिया में कोई प्रगति न होते देखने के बाद कई हिन्दुओं ने वापस पाकिस्तान लौटने का निश्चय किया। सीमांत लोक संगठन ने पाकिस्तानी हिन्दुओं की वापसी को शर्मनाक बताया। वही, सुब्रमण्यम स्वामी ने भारत सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।

    गृह मंत्रालय ने शुरू की थी आवेदन प्रक्रिया

    गृह मंत्रालय ने शुरू की थी आवेदन प्रक्रिया

    गृह मंत्रालय ने 2018 में एक ऑनलाइन नागरिकता आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें सात राज्यों में 16 कलेक्टरों को ये जिम्मेदारी मिली कि वे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्धों को नागरिकता प्रदान करने के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करें। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है लेकिन इसमें समस्या यह है कि पोर्टल उन पाकिस्तानी पासपोर्टों को स्वीकार नहीं करता जिनकी समय सीमा समाप्त हो चुकी है।

    पासपोर्ट रिन्यू कराने में दिक्कत

    पासपोर्ट रिन्यू कराने में दिक्कत

    शरणार्थियों को अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग जाना होता है। जहां उनसे पासपोर्ट के रिन्यू कराने के एवज में काफी पैसे मांगे जाते हैं। ऐसे में अगर आठ से दस लोगों का परिवार है तो पासपोर्ट को रिन्यू कराने के लिए पाकिस्तानी उच्चायोग उनसे 80 हजार से 1 लाख रुपये तक मांगता है। पहले से ही आर्थिक तंगी के बीच रह रहे लोगों के लिए इतनी रकम जुटाना आसान नहीं होता। ऐसे में इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बजाए वे पाकिस्तान लौटान ज्यादा उचित समझते हैं।

    दस हजार से अधिक मामले लंबित

    दस हजार से अधिक मामले लंबित

    गृहमंत्रालय द्वारा 22 दिसंबर, 2021 को राज्यसभा में दिए गए बयान के मुताबिक ऑनलाइन मॉड्यूल के अनुसार, 14 दिसंबर तक मंत्रालय के पास नागरिकता के लिए 10,635 आवेदन लंबित थे, जिनमें से 7,306 आवेदक पाकिस्तान से थे। सीमांत लोक संगके मुताबिक अकेले राजस्थान में 25,000 पाकिस्तानी हिंदू हैं जो नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आश्चर्य की बात तो ये है कि इनमें से कई हिन्दू तो दो दशकों से भी अधिक समय से भारत में हैं। गृहमंत्रालय ने साल 2015 में नागरिकता नियमों में संशोधन किया था। नए नियमों के मुताबिक दिसंबर 2014 या उससे पहले धार्मिक प्रताड़ना की वजह से भारत आने वाले छह समुदायों से संबंधित विदेशी प्रवासियों को वैद्यता प्रदान की गयी थी। इन्हें पासपोर्ट अधिनियम के प्रावधानों से छूट दी गई थी, क्योंकि इनके पासपोर्ट की समय सीमा समाप्त हो गई थी।

    सुब्रमण्यम स्वामी ने किया तंज

    सुब्रमण्यम स्वामी ने किया तंज


    भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी इस पर भारत सरकार की नीतियों की आलोचना की है। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, "मैं 2016 से इसको लेकर मोदी को पत्र लिखकर और कई समाचारों के जरिए भी चेतावनी दे रहा हूं। लेकिन अब तक इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।" इसके आगे उन्होंने तंज के लहजे में सवालिया निशान के साथ लिखा, "5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था?..हा !!"

    अमित शाह ने दिया बयान

    अमित शाह ने दिया बयान

    बताते चलें कि नागरिकता संशोधन कानून को वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने संसद में पास किया था। इस बिल का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है। इन 6 समुदायों में मुस्लिम समुदाय को शामिल ना किये जाने पर कई राजनीतिक पार्टियाँ इसका विरोध कर रहीं हैं। इस बीच गृहमंत्री अमित शाह ने एक रैली में कहा कि कोरोना खत्म होते ही देश में सीएए लागू कर दिया जाएगा।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+