Trump China Visit: निक्सन से ट्रंप तक कितने अमेरिकी राष्ट्रपति गए चीन? किसकी हुई ज्यादा बेइज्जती?

Trump China Visit: ईरान को लेकर बढ़ते तनाव और दुनिया में बदलती जियो पॉलिटिक्स के बीच डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा ने एक बार फिर अमेरिका-चीन संबंधों को चर्चा में ला दिया है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब पश्चिम एशिया में सीजफायर पूरी तरह स्थिर नहीं है और हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। ऐसे में ट्रंप चीन से क्या लेकर लौटेंगे कहना मुश्किल है लेकिन ऐसे में ये जानना जरूरी है पिछले कितने अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने चीन के दौरे किए और कौन-क्या लौटा।

ट्रंप की इस यात्रा में क्या?

ट्रंप दूसरी बार चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। इससे पहले वे एक बार 2017 में भी जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों की चीन यात्राएं सिर्फ औपचारिक स्वागत या फोटो अवसर नहीं रही हैं इसमें काम भी हुआ है। वहीं, इस यात्रा में व्यापार और डिफेंस पर बड़ी डील हो सकती है। खासकर बोइंग विमान, डार्क मैटर, AI और टेक्नोलॉजी में। हालांकि इस यात्रा में दोनों देशों के पास एक-एक जियो पॉलिटिकल मुद्दा है, जिसमें चीन के पास होर्मुज है बात करने के लिए तो ट्रंप के पास ताइवान की संप्रभुता।

Trump China Visit

1. 1972: रिचर्ड निक्सन की 7 दिवसीय यात्रा

सात दिन की यात्रा के दौरान निक्सन ने चीन के प्रधानमंत्री झोउ एनलाई से हाथ मिलाया। यह सिर्फ एक साधारण अभिवादन नहीं था, बल्कि उस राजनीतिक दूरी को खत्म करने का संकेत था जो दशकों से बनी हुई थी। 1954 के जिनेवा सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन फोस्टर डलेस ने झोउ एनलाई से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था। जबकि इस यात्रा का सबसे बड़ा परिणाम शंघाई कम्युनिके रहा। इसी के जरिए वन चाइना पॉलिसी का आधार बना, जो आज भी अमेरिका-चीन संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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2. 1984: रोनाल्ड रीगन का भाषण किया सेंसर

अगर निक्सन ने दरवाजा खोला था, तो रोनाल्ड रीगन उस दरवाजे के अंदर तक पहुंचे। 1984 में रीगन चीन जाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने, जब 1979 में दोनों देशों ने औपचारिक संबंध स्थापित कर लिए थे। रीगन पहले ताइवान के समर्थक माने जाते थे, लेकिन चीन यात्रा के दौरान उन्होंने व्यापार, तकनीक और सहयोग पर जोर दिया। इस दौरान न्यूक्लियर प्रोग्राम और डबल टैक्स से बचाव जैसे समझौतों पर साइन किए। इसी दौरान रीगल ने फुदान यूनिवर्सिटी में भाषण दिया जिसके कई हिस्सों पर चीन ने बाद में कैंची चला दी थी। जिसे अमेरिकी अखबारों ने निक्सन के लिए बेइज्जती की तरह दिखाया था।

3. 1998: तनाव के बाद पहुंचे बिल क्लिंटन

1989 के तियानमेन स्क्वायर नरसंहार के बाद अमेरिका और चीन के संबंध बेहद खराब हो गए थे। लेकिन 1998 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की चीन यात्रा ने रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश की। क्लिंटन ने पेकिंग यूनिवर्सिटी में लाइव ब्रॉडकास्टिंग में हिस्सा लिया। वहां उन्होंने मानवाधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर चीन को सीधे चुनौती दी। उस समय इंटरनेट और ग्रेट फायरवॉल का दौर नहीं था, इसलिए यह चर्चा पूरे देश ने देखी। साथ ही इस यात्रा ने चीन के 2001 में WTO में प्रवेश का रास्ता साफ किया। तब से लेकर अभी तक अमेरिकी मार्केट में चीन की पकड़ जोरदार है।

4. 2014: बराक ओबामा क्या लेकर लौटे?

2014 तक अमेरिका-चीन संबंध सहयोग से बदलकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में बदल चुके थे। इसके बावजूद बराक ओबामा और शी जिनपिंग क्लाइमेट चेंज पर एक बड़ा समझौता करने में सफल रहे।दोनों नेताओं ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने के बड़े लक्ष्य घोषित किए। इसी समझौते ने 2015 के पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट के लिए माहौल तैयार किया। इस यात्रा ने साबित किया कि बड़ी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देश ऐसे मुद्दों पर साथ आ सकते हैं जो पूरी दुनिया को प्रभावित करते हैं।

5. 2017: डोनाल्ड ट्रंप को मिली थी खास इज्जत

2017 में ट्रंप की चीन यात्रा को स्टेट विजिट-प्लस कहा गया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप के लिए बीजिंग के ऐतिहासिक फॉरबिडन सिटी में विशेष स्टेट डिनर रखा। 1949 में चीन की स्थापना के बाद ऐसा सम्मान पाने वाले ट्रंप पहले विदेशी नेता बने। इस यात्रा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच 250 अरब डॉलर से ज्यादा के व्यापारिक समझौते घोषित किए गए। हालांकि इनमें से कई समझौते बहुत के नहीं थे।

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यहीं से शुरू हुआ नया ट्रेड वॉर

भले ही उस समय ट्रंप और शी जिनपिंग की दोस्ताना तस्वीरें सामने आईं, लेकिन इसके तुरंत बाद अमेरिका ने अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत चीन के खिलाफ सख्त व्यापारिक रुख अपनाया। यहीं से आधुनिक अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध की शुरुआत मानी जाती है।

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