संसद में उठेगा हिन्दी के विकास का मुद्दा, अश्वनी चौबे ने दिखाई उम्मीद

aswani chaubay
नयी दिल्ली। हिन्दी के विकास और सम्मान के लिए सालों से लड़ती आ रही संस्था भाषा सहोदरी-हिंदी ने दिल्ली के आईटीओ में हिंदी परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। आईटीओ स्थित तिवारी भवन में भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जहां हिन्दी के विकास पर चर्चा की गई।

मुख्य अतिथि के रूप में सांसद अश्वनी चौबे भी संगोष्ठी में आमंत्रित किए गए थे। इनके अलावा डा. संजय पासवान (पूर्व केंद्र मंत्री, भारत सरकार), मशहूर शायर डा. कुंवर बेचैन, गीतकार श्री सर्वेश चंदौसवी, वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव समेत कई चर्चित चेहरों ने समारोह में शिरकत की। इस संगोष्ठी में भाषा सहोदरी परिवार ने तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा की। जिसमें तीन अहम सवाल उठाए गए। जिसमें सबसे पहले न्यायालयों में हिंदी का उपयोग क्यों नहीं? दूसरी इस देश की 80% जनता गावों में रहती है, जो हिंदी भी बहुत मुश्किल से पढ़ पाते हैं। उनके सामने कृषि या मवेशियों की दवाओं और अन्य सामान पर लगे लेबल अंग्रेजी में लिखे होते हैं जिन्हें वे पढ़ भी नहीं पाते।

राज्य व भारत सरकार यह सुनिश्चित करे कि जब कोई कंपनी यह शपथ-पत्र देगी कि सामान पर एक तरफ हिंदी में लेबल होगा, तभी उसे लाइसेंस दिया जाए और तीसरा देशभर में NCERT कक्षा 1 से 12 तक की हिंदी की वही 50 साल से भी पुरानी पाठ्यपुस्तकें छात्रों को पढने को दे रहा है।

उनके पाठ्यक्रम में नए साहित्यकारों, लेखकों व कवियों को भी स्थान मिलना चाहिए ताकि आज के छात्र वर्तमान को पढ़ सकें। आने वाले दिनों में हम 1000 रचनाएँ NCERT को देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि साल में कम से कम 30 रचनाकारों की भागीदारी NCERT के पाठ्यक्रम में हो। चर्चा के बाद समारोह में आए अश्वनी चौबे ने आश्वाशन दिया कि हिंदी से "भाषा सहोदरी हिंदी" के सभी मुद्दे वे संसद में उठायेंगे।

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