Bademiya Full Story: चूहे-कॉकरोच ने बंद करवाया मुंबई का 76 साल पुराना बड़े मियां रेस्टोरेंट
What is the history of Bade Miyan Mumbai: मुम्बई को 76 साल से लजीज चिकन रोल, सीख कबाब खिला रहे बड़े मिया बंद हो गया है। किचन में चूहे-तिलचट्टे पाए जाने के बाद एफडीए ने बडे मिया के तीन आउटलेट सील कर दिए।
Bademiya The Kebab Restaurant Mumbai: मुम्बई में कबाब के बेहतरीन रेस्टोरेंट में से एक बड़े मियां अब बंद हो गया है। वजह बने हैं चूहे और कॉकरोच। पिछले 76 साल से मुम्बई को चिकन रोल, कबाब, बिरयानी, चिकन टिक्का और मटन की डिश परोसने वाले रेस्टोरेंट बड़े मियां की पूरी कहानी काफी दिल्चस्प है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वच्छता संबंधी कई शिकायतों के बाद महाराष्ट्र की खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीम ने बड़े मियां के कोलाबा आउटलेट्स पर छापा मारा। टीम को किचन में चूहे और कॉकरोच मिले।

एफडीए की टीम को यह भी पता चला कि 76 साल पुराना इतिहास होने के बावजूद, बड़े मियां के पास भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के तहत काम करने का लाइसेंस नहीं है। ऐसे में मुम्बई में बड़े मियां के कोलाबा, बांद्रा व दक्षिण मुम्बई स्थित तीन आउटलेट सील कर दिए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति ने एक बार उसने बडेमिया से बिरयानी ऑर्डर की थी। उसने बताया कि बिरयानी से एक घंटे में बासी गंध आने लगी थी। ऐसा लग रहा था जैसे यह चार दिन पुराना हो और मांस अभी भी कच्चा था। अब वह खुश है कि बड़े मियां बंद हो गया है।
मोहम्मद यासीन ने खोला था बड़े मियां
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के छोटे गांव में जन्मे मोहम्मद यासीन 13 साल की उम्र में मुम्बई चले गए थे। यहां आकर कसाई का काम करने लगे थे। होटलों में मीट सप्लाई किया करते थे।
साल 1946 में यासीन ने मुम्बई के कोलाबा में ताज होटल के पीछे कबाब की एक छोटी सी दुकान कबाब कॉर्नर खोली थी। यासीन दाढी रखा करते थे। लोग उन्हें प्यार से बडे़ मियां कहकर बुलाते थे।
मीडिया से बातचीत में यासीन के पोते व वर्तमान में बडे़ मियां रेस्टोरेंट के मालिक सलमान शेख हैं कि बड़े मियां की शुरुआत सिगड़ी व सीक कबाब से हुई थी। दादाजी ने मुम्बई में कई कामों में हाथ आजमाया था। उनके सारे पैसे खत्म हो गए थे।

घर बिजनौर लौटने से पहले वे अपने गुरु हजरत मोहम्मद आदम चिश्ती के पास गए। चिश्ती ने उनको 20 रुपए दिए और बोले कि मुम्बई से जाते वक्त अपना आखिरी खाना खाकर जाइए। इन्हीं पैसों से दादा ने सिगड़ी, मीट खरीदा और मसाला लगाकर कबाब बेचना शुरू किया।
यासीन को शुरुआत में सफलता नहीं मिली। फिर धीरे-धीरे कबाब लोगों को पसंद आने लगा। ग्राहकी बढ़ी तो बड़े मियां भी फेमस हो गया।
कारोबार बढ़ने के साथ बड़े मियां ने चिकन टिक्का और मटन की डिश बनाना भी शुरू कर दिया। इसके बाद रेस्टोरेंट में बिरयानी और बैदा रोटी भी बनने लगी। यहां कि चिकन और मटन बैदा रोटी बहुत मशहूर है।












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