Moradabad: स्कूलों के गेट पर लगे 'नो फीस-नो एग्जाम' के पोस्टर
Moradabad News, मुरादाबाद। कोरोना वायरस महामारी के चलते पिछले 11 महीने से प्रदेश ही नहीं पूरे देश में स्कूल-कॉलेज बंद है। हालांकि, स्कूल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। लेकिन छात्रों द्वारा फीस जमा नहीं किए जाने की वजह से टीचरों को सैलरी मिलने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। तो वहीं, अब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ने शहर के स्कूलों के बाहर 'नो फीस-नो एग्जाम' के पोस्टर लगाए दिए हैं।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है, 'अगर छात्र फीस नहीं देते हैं तो हम छात्रों को परीक्षा में नहीं बैठने देंगे।' उन्होंने कहा, 'साल 2020 हम सभी के लिए कोविड-19 के कारण कठिन रहा है। छात्र स्कूल नहीं आ रहे थे और इस वजह से उन्होंने फीस जमा नहीं की है। हम वास्तव में कड़ी मेहनत कर रहे हैं और ऑनलाइन छात्रों को पढ़ा रहे हैं। छात्रों द्वारा फीस जमा नहीं किए जाने की वजह से हमें सैलरी मिलने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। यदि छात्र परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें फीस जमा कराना होगा।'
ये फैसला मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूलों ने एक बैठक कर लिया है। स्कूल एसोसिएशन की अध्यक्ष संतराम ने साफ शब्दों में कहा है कि अब जो बच्चे वापस स्कूल आ रहे हैं, उन्हें लॉक डाउन के समय की फीस जमा करनी पड़ेगी, तभी उनको वापस एडमिशन लिया जाएगा और उनका प्रमोशन होगा। अगर वह फीस जमा नहीं करते हैं तो उनका प्रमोशन हरगिज़ नहीं होगा, निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल के निर्णय के बाद अब उन लोगों के सामने समस्या खड़ी हो जाएगी जो यह सोच रहे थे कि लॉकडाउन के दौरान बंद स्कूलों के समय की फीस उन्हें जमा नहीं करनी होगी।
स्कूल एसोसिएशन की अध्यक्ष कहा है कि स्कूल चलाने में काफी खर्च होता है। पिछले वर्ष कोई फीस जमा नहीं हुई है। लगभग 50 प्रतिशत बच्चों की फीस ना आने से काफी असर पड़ा है। कोरोना वायरस के चलते केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था। लॉकडाउन के दौरान सब कुछ बंद होने से लोगों की आमदनी पर भी असर पड़ा था। इस दौरान लोगों ने स्कूल बंद होने की वजह से फीस भी जमा नहीं की थी लेकिन फिर भी बाद में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई थी।
तो वहीं, स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों ने विरोध जताया है। अभिभावकों का कहना है कि निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल एसोसिएशन ने स्कूलों के गेट पर यह बैनर लगा दिए हैं कि नो फ़ीस, नो एग्जाम। अभिभावकों का आरोप है कि लॉकडाउन के दौरान बंद समय की भी फीस स्कूल वाले मांग रहे हैं। अभी उनके पास फीस है नहीं। वह स्कूल प्रशासन से यह कह रहे हैं कि उनको फ़ीस में छूट दी जाए और थोड़ा-थोड़ा करके फीस जमा कराई जाए।












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