भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में पूर्व दरोगा धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ दर्ज हुई FIR, आय से अधिक संपत्ति का है मामला
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में पूर्व दरोगा धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ दर्ज हुई FIR, आय से अधिक संपत्ति का है मामला
मेरठ, 21 अप्रैल: आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में हस्तिनापुर के पूर्व थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ मेरठ के मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। दरोगा ने पिछले 09 सालों में करीब 62 लाख रुपए कमाए, लेकिन कर्चा करीब डेढ़ करोड़ रुपए का किया। जी हां..दरोगा ने मेरठ में फ्लैट समेत कई संपत्ति खड़ी कर दी। इतना ही नहीं, धर्मेंद्र सिंह ने आय से 134 प्रतिशत अधिक संपत्ति भी जुटाई है, जिसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

दरोगा धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ करीब डेढ़ साल से प्रभारी निरीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा जांच की जा रही थी। जांच में पाया कि दरोगा ने अपनी आय की तुलना में 134 प्रतिशत अधिक संपत्ति जुटाई है। अब जांच पूरी हो गई है और दरोगा को दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बता दें कि दरोगा धर्मेंद्र सिंह मेरठ में मेडिकल, सरूरपुर और हस्तिनापुर थाने में तैनात रह चुका है। जब वो हस्तिनापुर थाने में तैनात थे, तब उसने यहां पत्नी के नाम पर कुछ जमीन खरीदकर फार्म हाउस बनाया था।
दरोगा का यह फार्म हाउस घने जंगल के बीच सभी सुविधाओं से लैस था। दरोगा की भ्रष्टातारी गतिविधियों के खिलाफ गोपाल काली नाम के एक जनप्रतिनिधिने 2020 में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। जिसमें हस्तिनापुर वन सेंचुरी की जमीन पर दरोगा के अवैध आलीशान फार्म हाउस का खुलासा किया था। इसके अलावा दरोगा के घर पर बिजली विभाग ने भी छापा मारा था, जिसमें चोरी की बिजली से दरोगा का घर रोशन होता हुआ मिला। जिसके बाद दरोगा धर्मेंद्र सिंह को तत्कालीन एसएसपी अजय साहनी ने हस्तिनापुर के चार्ज से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले करीब डेढ़ साल से भ्रष्टाचार निवारण संगठन की तरफ से इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी इसमें जांच कर रहे थे। अब यह जांच पूरी कर ली गई है। जिसके बाद मेरठ के मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एफआईआर के मुताबिक, एंटी करप्शन में तैनात इंस्पेक्टर अशोक शर्मा ने बताया कि दरोगा धर्मेद्र मूलरूप से आगरा के सिकंदरा थानाक्षेत्र के भोपालकुंज का निवासी है। 2011 में पिता की मृत्यु के बाद आश्रित में धर्मेंद्र को नौकरी मिली थी।












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