Vrindavan: तीन तलाक के बाद शबनम से 'मीरा' बनी मुस्लिम महिला, कहा: 'कृष्ण बनाते है मेरे सारे काम'
"दुनिया में सबसे बड़ा और अच्छा सिर्फ सनातन धर्म है, क्योंकि यहां महिलाओं को कई बार तलाक नहीं दिया जाता है। यहां लड़की डोली में बैठकर जिस घर जाती है वहीं से उसकी अर्थी उठती है।" ये शब्द हैं वृंदावन में कृष्ण भक्ति में डूबी मुरादाबाद की रहने वाली शबनम के, जिन्होंने 2006 में सनातन धर्म को अपनाया। अब इनका नाम मीरा है और ये श्री कृष्ण की भक्ति में लीन होकर सबकुछ कान्हा के हवाले कर चुकी है। वृंदावन में ये किसी परिचय की मोहताज नहीं है।
तलाक के बाद अपनाया सनातन धर्म
दरअसल, शबनम उर्फ़ मीरा बताती हैं कि वो मुरादाबाद की मूल निवासी हैं और उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। लेकिन उनका बचपन से ही सनातन धर्म से ख़ासा लगाव था। वहीं उनकी शादी के बाद वो दिल्ली में रहकर नौकरी किया करती थी। लेकिन 2005 में उनका तलाक हो गया था। जिसके बाद 2006 में उन्होंने सनातन धर्म अपना लिया।

11 साल पहले हुई 'लाला' से भेंट
शबनम उर्फ़ मीरा ने बताया कि वो 2012 में वृन्दावन आई थी, जहां उन्हें उनके कान्हा मिल गए। वो उन्हें प्रेम में 'लाला' कहती हैं। उसके बाद वो कृष्ण के प्रेम में डूब गई और वृन्दावन की ही होकर रह गई। उनका कहना है कि जबसे उन्हें उनके लाला मिले हैं, तबसे वो उन्ही का ध्यान करती हैं, उन्ही की सेवा करती हैं और उनके लाला ही उन्हें पाल रहे हैं।

जब शबनम को नहीं मिल रहा था कमरा
मीरा ने अपने और श्रीकृष्ण के प्रेम का एक किस्सा भी बताया। उन्होंने बताया कि एक बार वह रक्षाबंधन पर बालाजी मंदिर गई थी। लेकिन आईडी में मुस्लिम नाम होने की वजह से उन्हें वहां कोई कमरा नहीं मिल रहा था। जिससे परेशान होकर वह अपने पास रखी कृष्ण की प्रतिमा को निकालकर उन्हें अपनी परेशानी बताने लगीं। इतने में उन्हें वहां के मैनेजर ने देख लिया और कहा, 'ये तो कन्हैया की मैया है' और उन्हें फ़ौरन कमरा दे दिया। उन्होंने कहा कि लाला हर जगह मेरा साथ देता है।

सब धर्मों का सम्मान, परिवार ने बना ली दूरी
शबनम उर्फ़ मीरा का कहना है कि वो सब धर्मों का सम्मान करती हैं। सब धर्म अपनी जगह अच्छे हैं। लेकिन उनकी आस्था सनातन धर्म में है, इसलिए उन्होंने सनातन धर्म अपनाया है। उन्होंने बताया कि उनके घरवाले उन्हें बिलकुल परेशान नहीं करते हैं। उनका कहना है कि 'तुम्हारा और हमारा अब कोई लेना देना नहीं है। तुम अपनी जिंदगी जियो और हम अपनी जिंदगी जिएंगे।' शबनम के घरवालों ने उनसे सभी रिश्ते नाते तोड़ दिए हैं।

कथाओं और कीर्तन की किताबें बेचकर चलता है गुजारा
शबनम वृन्दावन में भगवान श्री कृष्ण की वाणी भागवत कथाओं और उनके कीर्तन की किताबों को बेचकर अपना जीवन बिता रही है। वो यहां आने वाले भक्तों को श्री कृष्ण की लीलाओं से रूबरू कराती हैं। उनका कहना है कि यहां उन्हें बस रहने का किराया देना पड़ता है, खाने पीने की यहां कोई कमी नहीं है। यहां हर जगह भंडारा होता रहता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की नगरी में कोई भी भूखा नहीं मर सकता।

आर्थिक स्तिथि कमजोर, पर लाला पर भरोसा
वृंदावन की सड़कों पर धार्मिक किताबें बेचने बाली शबनम उर्फ मीरा काफी आर्थिक कमजोरी से गुजर रही हैं। वह कहती हैं कि आज में अपने खर्च के पैसे भी नहीं जुटा पाती हूं, मगर मुझे अपने कृष्ण और लाला पर भरोसा करती हूं और उस पर पूर्ण विश्वास है कि एक दिन वो मेरी जरूर सुनेगा और मेरी स्तिथि थोड़ी ठीक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मै अपने लाला के साथ रहकर हर सुख दुख में समय काट लूंगी।

कृष्ण की भक्ति में काट दूँगी पूरा जीवन
शबनम ने ये भी कहा कि जीवन वो जीवन भर यहीं रहकर अपनी कृष्ण भक्ति करते हुए जीवन गुजार देंगी। शबनम से मीरा बनी ये मुस्लिम महिला रोजाना भगवान श्री कृष्ण के भजन गाती है, सनातन धर्म के अनुसार उनकी पूजा करती है। रोजाना मंदिर जाती है और भोर होते ही भगवान के नाम की माला जपती है।












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