मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव पर लगाया BJP ने दांव, जिला पंचायत सदस्य का दिया टिकट

मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव पर लगाया BJP ने दांव, जिला पंचायत सदस्य का दिया टिकट

मैनपुरी। यूपी पंचायत चुनाव 2021 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी में बड़ा दांव चला है। बीजेपी ने मैनपुरी में जिला पंचायत सदस्य सीट के लिए मुलायम सिंह यादव की भतीजी व पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की सगी बहन को टिकट दिया है। दरअसल, बीजेपी ने मंगलवार देर शाम जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशियों की सूची जारी की। जिसमें संध्या यादव को वार्ड नंबर 18 घिरोर तृतीय से प्रत्याशी बनाया गया है।

संध्या यादव को बीजेपी ने बनाया प्रत्याशी

संध्या यादव को बीजेपी ने बनाया प्रत्याशी

बता दें कि मैनपुरी में 30 सीटों पर जिला पंचायत वार्डों के लिए सदस्य पद का चुनाव किया जाना है। 30 सीटों के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने मंगलवार शाम प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। तो वहीं, वार्ड नंबर 18 घिरोर तृतीय से बीजेपी ने मुलायम सिंह यादव की भतीजी व पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की सगी बहन संध्या यादव को टिकट दिया है। संध्या यादव के बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने से सपाई खेमा सकते में है। अब मैनपुरी में मुलायम की सगी भतीजी को सदस्य बनने से रोकने के लिए सपाई किस तरह से मुकाबला करेंगे राजनैतिक जानकार इस बात का इंतजार कर रहे हैं।

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    UP Panchayat Chunav 2021: Mulayam Singh Yadav की भतीजी Sandhya को BJP ने दिया टिकट | वनइंडिया हिंदी
    निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष हैं संध्या यादव

    निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष हैं संध्या यादव

    संध्या यादव मैनपुरी की निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की भतीजी और बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बड़ी बहन हैं। संध्या यादव को 2015 में सपा ने टिकट देकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया था, लेकिन चाचा भतीजे के झगड़े में वह राजनीति का शिकार हुईं और जिला पंचायत अध्यक्ष का पद डगमगाते देख भाजपा का सहारा लिया और भाजपा ने संध्या को टिकट देकर एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। तो वहीं, संध्या यादव के पति पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

    2017 में आया था अविश्वास प्रस्ताव

    2017 में आया था अविश्वास प्रस्ताव

    जिला पंचायत अध्यक्ष संध्या यादव अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी कुर्सी बचाने में सफल रही थीं। दरअसल, जनवरी 2015 में समाजवादी पार्टी के समर्थन से पद संभालने के बाद जुलाई 2017 में सपा ने ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। अविश्वास प्रस्ताव पर कुल 32 जिला पंचायत सदस्यों में से 23 के हस्ताक्षर थे। बाद में वह भाजपा के साथ जोड़ तोड़कर जिला पंचायत अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचा ले गईं।

    धर्मेंद और संध्या के बीच बंद है बातचीत

    धर्मेंद और संध्या के बीच बंद है बातचीत

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संध्या यादव ने जिस वक्त भाजपा का दामन साधा था उस वक्त बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने पत्र जारी कर कर संबंधों का विच्छेदन कर दिया था। रिश्तो में खटास आई जिसके बाद से भाई बहन की दूरियां बढ़ गईं। सूत्र बताते हैं कि उस वक्त से लेकर अब तक धर्मेंद्र यादव और संध्या यादव के बीच बातचीत भी बंद है।

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