Vasai-Virar Thakurs: कौन हैं विरार के ठाकुर्स'? जो BJP के विनोद तावड़े का सिर दर्द बने, दाऊद से तगड़ा कनेक्शन!
Vasai-Virar Thakurs: महाराष्ट्र की चुनावी सियासत में वसई-विरार के ठाकुर परिवार का नाम न जुड़े ऐसा हो ही नहीं सकता। हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के खिलाफ कैश फॉर वोट मामले ने ठाकुर परिवार और उनकी पार्टी बहुजन विकास अघाड़ी (BVA) को फिर से चर्चा में ला दिया है। यह मामला जहां बीजेपी के लिए मुसीबत बनता दिख रहा है, वहीं ठाकुर परिवार की ताकत और उनके राजनीतिक प्रभाव की एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
ठाकुर परिवार ने हर सरकार के साथ तालमेल बैठाकर अपना दबदबा बनाए रखा है। यह परिवार शिवसेना, कांग्रेस, और एनसीपी-सभी दलों के साथ किसी न किसी समय जुड़ा रहा है। आइए, जानते हैं इस ताकतवर परिवार की पूरी कहानी...

ठाकुर परिवार: वसई-विरार की राजनीति के 'सत्ता केंद्र'
- ग्रासरूट लेवल की पकड़: ठाकुर परिवार ने सड़क स्तर पर काम करके लोगों का भरोसा जीता है। त्योहारों और स्थानीय आयोजनों में मदद करके उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत की है।
- Who is Hitendra Thakur (हितेंद्र ठाकुर): हितेंद्र ठाकुर इस परिवार के मुखिया और बहुजन विकास अघाड़ी (BVA) के अध्यक्ष हैं। वह वसई विधानसभा सीट से 6 बार विधायक रह चुके हैं। वसई, विरार और नालासोपारा जैसे इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ है। राजनीति के साथ-साथ ठाकुर परिवार का इन क्षेत्रों में कई व्यवसायों पर प्रभाव है।
- Who is Praveen Thakur (प्रवीणा ठाकुर): 2010 में नगर निगम चुनाव में हितेंद्र ठाकुर की पत्नी प्रवीणा ठाकुर मैदान में उतरीं। प्रवीणा जैसी उम्मीदवार, जिनकी संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक थी, निर्विरोध चुनी गईं। कोई भी पार्टी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारने की हिम्मत नहीं कर पाई।
- Who is Kshitij Thakur(क्षितिज ठाकुर): हितेंद्र ठाकुर के बेटे, जो नालासोपारा से तीन बार विधायक रह चुके हैं।
- भाई ठाकुर: हितेंद्र ठाकुर के भाई, जिनका नाम अक्सर विवादों में आता है। कहा जाता है कि उनके अंडरवर्ल्ड से संबंध हैं और दाऊद इब्राहिम जैसे डॉन से उनके संपर्क रहे हैं।
- Who is Rajesh Patil (राजेश पाटिल): बीवीए के विधायक और ठाकुर परिवार के सहयोगी।
ठाकुर परिवार का राजनीतिक सफर: MVA से बीजेपी तक
2019 के विधानसभा चुनावों के बाद, ठाकुर परिवार ने शुरुआत में महाविकास अघाड़ी (MVA) को समर्थन दिया। हालांकि, बाद में मतभेदों के चलते उन्होंने बीजेपी और शिंदे की शिवसेना का साथ दिया। जून 2022 राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया, जिसके बाद MVA की सरकार गिर गई। बीजेपी और ठाकुर परिवार के बीच हाल के दिनों में संबंध कमजोर हुए हैं। आगामी चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तनाव किस दिशा में जाता है।
What is Vinod Tawde 'Cash for vote' : क्या है विनोद तावड़े का "कैश फॉर वोट" मामला?
बीवीए ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने मतदाताओं को पैसे देकर प्रभावित करने की कोशिश की। यह मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है, और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो चुका है। बीजेपी ने इन आरोपों को झूठा बताया है और जांच की मांग की है।
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Kshitij Thakur Controversy: क्षितिज ठाकुर का पुराना विवाद
2013 में, क्षितिज ठाकुर का नाम उस समय चर्चा में आया था, जब उन्होंने बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर एक पुलिस अधिकारी के साथ विवाद किया। इस मामले में विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया गया था।
ठाकुर परिवार का चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
- बीजेपी के लिए चुनौती: कैश फॉर वोट मामला बीजेपी को वसई-विरार जैसे इलाकों में नुकसान पहुंचा सकता है।
- BVA के लिए फायदा: ठाकुर परिवार इस विवाद का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
वसई विरार बिल्डरों का स्वर्ग
मुंबई की तुलना में सस्ती ज़मीन होने के कारण यह इलाका बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए आकर्षक है। नगर निगम पर राजनीतिक नियंत्रण के चलते भवन निर्माण के नियमों को अनदेखा किया जाता है। हालांकि, यातायात, पानी और सफाई जैसे बुनियादी मुद्दे अभी भी बड़े पैमाने पर अनसुलझे हैं। वसई विरार में तेज़ी से बढ़ती आबादी के कारण प्रशासन पर भारी दबाव है।
ठाकुर परिवार न केवल वसई-विरार की राजनीति में बल्कि पूरे महाराष्ट्र में एक प्रभावशाली भूमिका निभाता है। विनोद तावड़े पर लगे आरोप और ठाकुर परिवार का राजनीतिक कद यह संकेत देते हैं कि यह मामला सिर्फ स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। अगले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा पक्ष इसका अधिक फायदा उठाता है।
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