'PM Modi देश की प्रतिष्ठा' शरद पवार ने प्रधानमंत्री की आलोचना करने वालों को दी नसीहत
एनसीपी ((SP) प्रमुख शरद पवार राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्षधर रहे हैं। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में शरद पवार ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जब बात देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय सम्मान की आती है, तो सभी दलों को एक साझा दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
पवार ने स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और राजनीतिक मुद्दों पर उनकी राय भले ही अलग हो, लेकिन जब देश की प्रतिष्ठा और सम्मान को विदेश में कम करने या उससे समझौता करने की बात आती है, तो इसे बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'राष्ट्र के गौरव और सम्मान के मामले में कोई सियासी मतभेद या राजनीतिक विवाद नहीं होना चाहिए।'

PM Modi देश की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे
एनसीपी प्रमुख ने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तो सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए।
शरद पवार ने दी नसीहत- देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए
अपने पूर्व सहयोगियों और अन्य राजनेताओं से अपील करते हुए पवार ने अंत में दोहराया, "यदि राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तो आप सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ भाग लेना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।"
इंदिरा गांधी और पीवी नरसिम्हा का भी किया जिक्र
पूर्व प्रधानमंत्रियों की बात करते हुए पवार ने इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि इन सभी ने अपने नेतृत्व के दौरान हमेशा देश के भविष्य और उसकी प्रतिष्ठा को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कुछ लोग भले ही विभिन्न पार्टियों में हों, लेकिन वे सभी आम लोगों के बीच जुड़े हुए हैं और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है।
शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन सोवियत संघ की आधिकारिक यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी को लगा कि भारत के प्रधानमंत्री को वहां उचित सम्मान नहीं दिया गया। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए पवार ने साझा किया कि इंदिरा गांधी ने सोवियत अधिकारियों से स्पष्ट कहा था कि वह 40 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके सम्मान का अपमान वह कभी स्वीकार नहीं करेंगी।
शरद पवार ने शेयर किया कांग्रेंस ज्वॉइन करने का किस्सा
पवार ने अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1958 में, जब वे मात्र 18 वर्ष के थे, तब उनके गृह नगर बारामती में कोई कॉलेज न होने के कारण वे पढ़ाई के लिए पुणे आए थे। उन्होंने वहीं युवा आंदोलन से जुड़कर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। चार साल के भीतर ही वे पुणे शहर युवा कांग्रेस के प्रमुख बन गए, जिसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र युवा कांग्रेस का नेतृत्व किया और फिर राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।













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